नई दिल्ली। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) द्वारा हाल के दिनों में किए गए कुछ महत्वपूर्ण संगठनात्मक और राजनीतिक निर्णयों ने केंद्र सरकार के मंत्रिमंडल में संभावित फेरबदल की चर्चाओं को तेज कर दिया है। पार्टी ने जहां दो केंद्रीय मंत्रियों को राज्यों की भाजपा इकाइयों की कमान सौंपी है, वहीं दो अन्य केंद्रीय मंत्रियों को राज्यसभा के लिए पुनः नामित नहीं किया गया है। इन घटनाक्रमों को आगामी मंत्रिमंडलीय पुनर्गठन के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) सरकार ने हाल ही में अपने वर्तमान कार्यकाल के दो वर्ष पूरे किए हैं। 9 जून 2024 को शपथ लेने वाली 72 सदस्यीय मंत्रिपरिषद में 30 कैबिनेट मंत्री, पांच राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) और 36 राज्य मंत्री शामिल हैं।
संविधान के 91वें संशोधन के तहत केंद्र और राज्यों में मंत्रिपरिषद का आकार संबंधित सदन की कुल सदस्य संख्या के 15 प्रतिशत तक सीमित है। इस कारण मंत्रिमंडल में फेरबदल के दौरान राजनीतिक और सामाजिक संतुलन साधना सरकार के लिए महत्वपूर्ण चुनौती होती है।
पहले भी दो वर्ष बाद हुआ है विस्तार
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मंत्रिमंडल में बदलाव की संभावना इसलिए भी प्रबल है क्योंकि प्रधानमंत्री मोदी इससे पहले भी अपने दूसरे वर्ष के बाद मंत्रिमंडल का विस्तार और पुनर्गठन कर चुके हैं। वर्ष 2016 और 2021 में भी सरकार के दो वर्ष पूरे होने के लगभग एक माह बाद मंत्रिमंडल में बड़े बदलाव किए गए थे।
राज्यसभा नामांकन ने बढ़ाई अटकलें
भाजपा ने आगामी राज्यसभा चुनावों के लिए पांच राज्यों से 11 नेताओं को उम्मीदवार बनाया है। हालांकि केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू और जॉर्ज कुरियन को इस सूची में स्थान नहीं दिया गया। दोनों नेताओं का राज्यसभा कार्यकाल 21 जून को समाप्त हो रहा है।
बिट्टू पंजाब से कांग्रेस के पूर्व सांसद रहे हैं और वर्तमान में राजस्थान से राज्यसभा सदस्य हैं। वहीं केरल से आने वाले जॉर्ज कुरियन मध्य प्रदेश का प्रतिनिधित्व करते हैं। संविधान के अनुसार किसी भी मंत्री को नियुक्ति के छह माह के भीतर संसद के किसी एक सदन का सदस्य होना आवश्यक है। ऐसे में इन दोनों नेताओं के भविष्य को लेकर राजनीतिक हलकों में चर्चाएं तेज हैं।
18 जून को 10 राज्यों की 24 राज्यसभा सीटों के लिए चुनाव और महाराष्ट्र, तमिलनाडु तथा ओडिशा की एक-एक सीट पर उपचुनाव होने हैं।
संगठन और सरकार में दोहरी जिम्मेदारी
भाजपा ने हाल ही में केंद्रीय मंत्री हर्ष मल्होत्रा को दिल्ली भाजपा का अध्यक्ष नियुक्त किया है। इससे पहले दिसंबर 2025 में केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी को उत्तर प्रदेश भाजपा का प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया था।
भाजपा के संविधान में “एक व्यक्ति, एक पद” का सिद्धांत शामिल है, लेकिन यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि कोई नेता कितने समय तक संगठन और सरकार दोनों पदों पर एक साथ बना रह सकता है। पंकज चौधरी फिलहाल केंद्रीय मंत्री और प्रदेश अध्यक्ष दोनों जिम्मेदारियां निभा रहे हैं।
महिला और सहयोगी दलों को मिल सकता है अधिक प्रतिनिधित्व
सूत्रों और राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि संभावित फेरबदल में महिलाओं, पिछड़े वर्गों, अनुसूचित जातियों तथा चुनावी राज्यों के नेताओं को अधिक प्रतिनिधित्व दिया जा सकता है। वर्तमान 72 सदस्यीय मंत्रिपरिषद में केवल सात महिलाएं हैं, जिसे बढ़ाने की संभावना जताई जा रही है।
इसके अलावा भाजपा अपने सहयोगी दलों को भी अधिक भागीदारी देकर राजनीतिक संतुलन साधने का प्रयास कर सकती है। उत्तर प्रदेश, पंजाब, मणिपुर, गोवा और उत्तराखंड में 2027 की शुरुआत तक विधानसभा चुनाव होने हैं, जबकि हिमाचल प्रदेश और गुजरात में भी 2027 के अंत तक चुनाव प्रस्तावित हैं।
नए चेहरों के लिए खुल सकता है रास्ता
केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी का राज्यसभा कार्यकाल नवंबर में समाप्त हो रहा है। उनके साथ उत्तर प्रदेश के 10 और उत्तराखंड के एक राज्यसभा सदस्य भी सेवानिवृत्त होंगे। इन रिक्तियों के माध्यम से भाजपा ऐसे नेताओं को संसद में ला सकती है जो फिलहाल सांसद नहीं हैं, लेकिन जिन्हें सरकार में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी जा सकती है।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यदि मंत्रिमंडल में फेरबदल होता है तो उसका मुख्य उद्देश्य आगामी विधानसभा चुनावों की तैयारी, सामाजिक प्रतिनिधित्व का विस्तार और संगठनात्मक मजबूती होगा। ऐसे में आने वाले कुछ सप्ताह केंद्र की राजनीति के लिए काफी महत्वपूर्ण साबित हो सकते हैं।

