भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान एमएस धोनी को मद्रास हाई कोर्ट ने 10 लाख रुपये जमा करने का निर्देश दिया है। यह राशि एक सीडी के कंटेंट के अनुवाद और ट्रांसक्रिप्शन लिखित रूप में तैयार करने की प्रक्रिया से जुड़ी है।
क्या है मामला?
यह मामला एक मानहानि याचिका से संबंधित है, जो धोनी ने रिटायर्ड आईपीएस अधिकारी जी संपतकुमार के खिलाफ दायर की थी। संपतकुमार ने 2013 के आईपीएल सट्टेबाजी प्रकरण में धोनी का नाम जोड़ा था, जिसके बाद धोनी ने 100 करोड़ रुपये के हर्जाने का दावा करते हुए अदालत का रुख किया।मामले की सुनवाई कर रहीं न्यायमूर्ति आर एन मंजुला ने अंतरिम आदेश में कहा कि केस से संबंधित एक सीडी में मौजूद सामग्री का अनुवाद और ट्रांसक्रिप्शन जरूरी है। अदालत के पूर्व आदेश (25 अक्टूबर 2025) के तहत कोर्ट के दुभाषिया ने यह काम शुरू कर दिया है।दुभाषिया ने अदालत को बताया कि पूरी प्रक्रिया में लगभग तीन से चार महीने का समय लग सकता है। साथ ही, कार्य पूरा करने के लिए एक अतिरिक्त इंटरप्रेटर और एक टाइपिस्ट की भी आवश्यकता होगी।अदालत ने स्पष्ट किया कि चूंकि इस मामले में वादी (प्लेंटिफ) धोनी हैं और दस्तावेज अदालत में उन्हीं की ओर से पेश किए गए हैं, इसलिए अनुवाद और ट्रांसक्रिप्शन की लागत भी उन्हें ही वहन करनी होगी। अदालत ने उन्हें 12 मार्च तक 10 लाख रुपये जमा करने का निर्देश दिया है। यह राशि मुख्य न्यायाधीश राहत कोष खाते में जमा की जाएगी।मामले की अगली सुनवाई 12 मार्च को निर्धारित है, जबकि अनुवाद और ट्रांसक्रिप्शन का कार्य मार्च के तीसरे सप्ताह में आगे बढ़ाया जाएगा।

