पाकिस्तान की राजधानी में करीब 21 घंटे तक चली लंबी और अहम बातचीत के बावजूद अमेरिका और ईरान के बीच कोई ठोस समझौता नहीं हो सका। इस असफल वार्ता के बाद दो हफ्तों के लिए लागू युद्धविराम (सीजफायर) पर भी अनिश्चितता के बादल मंडराने लगे हैं।
दोनों देशों ने बातचीत के नतीजे पर एक-दूसरे को जिम्मेदार ठहराया है। ईरान का कहना है कि अमेरिका की सख्त और बढ़ती मांगों ने समझौते की राह में रुकावट पैदा की।ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची के अनुसार, तेहरान ने लंबे समय बाद अमेरिका के साथ सीधे उच्चस्तरीय वार्ता शुरू की थी और वह समझौते के काफी करीब भी पहुंच गया था। लेकिन उनका आरोप है कि आखिरी समय में अमेरिका ने अपना रुख बदल लिया, जिससे बातचीत पटरी से उतर गई।वहीं, ईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद बाघेर गालिबाफ ने भी वार्ता विफल होने के लिए अमेरिका को जिम्मेदार ठहराया।
उन्होंने कहा कि ईरान बातचीत के लिए तैयार था, लेकिन पिछले अनुभवों के कारण उसे अमेरिका पर भरोसा नहीं था। उनके मुताबिक, अमेरिकी पक्ष इस भरोसे को जीतने में सफल नहीं हो पाया।गालिबाफ ने यह भी कहा कि ईरान की जनता ने इस पूरे दौर में अपने नेतृत्व का समर्थन किया और देश एकजुट होकर इस प्रक्रिया में खड़ा रहा।इस वार्ता का आयोजन पाकिस्तान की पहल पर 9 और 10 अप्रैल को किया गया था। अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने किया, जबकि ईरान की ओर से गालिबाफ प्रमुख भूमिका में थे।
बातचीत खत्म होने के बाद जेडी वेंस ने साफ कहा कि कोई समझौता नहीं हो सका और यह स्थिति ईरान के लिए सही नहीं है।करीब 40 दिनों से चल रहे तनाव के बीच अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पहले दो सप्ताह के लिए युद्धविराम की घोषणा की थी। हालांकि, अब बातचीत असफल होने के बाद इस सीजफायर का भविष्य अनिश्चित नजर आ रहा है।

