धनंजय भारद्वाज, पीएचडी स्कॉलर, सुभारती यूनिवर्सिटी मेरठ
भारत सरकार ने 16 जून 2022 को अग्निपथ योजना की घोषणा की। इसे एक परिवर्तनकारी एवं दूरगामी सोच के तहत लाया गया है। इस योजना के अंतर्गत 17.5 से 21 वर्ष के भारतीय युवाओं को 4 साल के लिए अग्निवीर के रूप में थल सेना, वायु सेना एवं नौसेना में भर्ती किया जाता है। इसका उद्देश्य सशस्त्र बालों में जोश, तकनीकी कुशलता और आधुनिकता को बढ़ाना है। इस योजना की मंजूरी भारत सरकार की सुरक्षा मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति ने 14 जून 2022 को दी थी। इसका मुख्य उद्देश्य सेवा की औसत उम्र को घटाना एवं रक्षा पेंशन बिल के बोझ को कम करने के साथ ही ज्यादा से ज्यादा युवाओं को फौज में बनाए रखना था। यह योजना अधिकारी पद के नीचे के रैंकों के लिए बनाई गई है। अधिकारी पद के लिए ऐसी योजना दशकों से चली आ रही है जिसे शॉर्ट्स सर्विस कमिशन ऑफिसर्स कहते हैं। अग्निपथ योजना के तहत सेवा कॉल चार वर्षों का है जिसमें 6 महीने का प्रशिक्षण भी शामिल है। 4 वर्ष के बाद 25 फीसदी अग्नि वीरों को कुशलता के आधार पर स्थाई किया जाएगा। और बाकी के चार साल की अवधि पूरी करने के बाद उन्हें सेवा निधि पैकेज (लगभग 11.71 लाख) के साथ विदा किया जाएगा। इस योजना के तहत भर्ती किए हुए पहले बैच ने 2022 से कार्य करना शुरू कर दिया था। इससे भारतीय सेवा के ढांचे में एक बड़ा और सकारात्मक बदलाव आया है। एनडीए सरकार का यह कदम एक ऐतिहासिक एवं आवश्यक कदम के रूप में देखा जा रहा है। भारतीय सेना में 40000 के लगभग अग्निवीर जवान, भारतीय नौसेना में 7385 अग्निवीर और वायु सेना में 4955 अग्निवीर सेवा दे रहे हैं।

भारतीय सेना ने अग्निवीरों, उनकी यूनिट कमांडर, सब यूनिट कमांडर और रेजीमेंटल सेंटर के भर्ती एवं प्रशिक्षण कर्मचारियों से इनपुट लिया है। जिसमें लगभग 10 प्रश्नों वाला एक सर्वेक्षण किया गया है। यह इनपुट अग्निवीरों के सेना में शामिल होने के कारण उनके उत्साह, सामान्य जागरूकता और ऑनलाइन प्रवेश परीक्षा के प्रति ग्रामीण एवं शहरी आवेदकों की प्रतिक्रिया को समझने के लिए किया गया है।
समाज के एक धड़ा का कहना है कि योजना के स्वरूप मे कुछ कमियां है। कुछ सूत्रों के प्रतिक्रिया में ऑन द जॉब ट्रेनिंग की कमी शामिल है जिसे अनुभवहीनता और पर्याप्त विशेषज्ञता का कारण माना जा रहा है। समाज के दूसरे धड़ा का मानना है कि उत्तर की तरफ चीन और पश्चिम की तरफ पाकिस्तान अपनी ताकत और तालमेल बढ़ा रहे हैं। इसलिए भारतीय सेना की योजनाओं में संशोधन करने का यह सही समय है। माना जा रहा है की सेवा की चार साल की अवधि अग्निवीरों को टीम के रूप में काम करने की बजाय सीमित पदों के लिए एक दूसरे के साथ प्रतिस्पर्धा करने के लिए मजबूर करती है अग्निपथ योजना में सुधार करना भी आवश्यक है।
कुछ सूत्रों का यह भी मानना है कि अगर अग्निपथ योजना को अभी रोक दिया जाता है तो अधिकारी रैंक के नीचे के कर्मचारियों की संख्या में एक जोरदार कमी आ जाएगी। इससे नंबरों को पूरा करने के लिए भारतीय सेना को एक दशक से भी अधिक समय लग सकता है। इसलिए योजना को मजबूत करने से सैनिकों को तेजी से शामिल करने में मदद मिलेगी और व्यापक प्रशिक्षण प्रदान किया जा सकेगा।
कुछ लोगों का मानना है कि अनुभव के मुद्दे को मामूली बदलाव के साथ हल किया जा सकता है पुरानी भर्ती योजना के तहत भर्ती किए गए कर्मी आमतौर पर 35 साल की उम्र में सेवानिवृत्त हो जाते हैं। परंतु कुछ संख्या जो सूबेदार मेजर के पद पर पदोन्नति होते हुए 52 साल की उम्र में सेवानिवृत्त होते हैं। वह अनुभवी रहते हैं और वह हर ऑपरेशन कौशल और ड्रिल में पूरी तरह से प्रशिक्षित होते हैं।
कोई भी जब योजना नई रूप में आती है तो उसको लेकर के कई पक्षों में अलग-अलग मतभेद दिखाई देते हैं। अग्निवीरों का पहला बैच 2022 में आना शुरू हो गया था तो लगभग 2026 के अंत तक पहले बैच का 4 वर्ष का कार्यकाल पूरा होने का समय आ गया है। अग्निपथ योजना के भविष्य को लेकर चल रही चर्चाओं और आंतरिक सर्वेक्षणों के आधार पर, भारतीय सेना और रक्षा विशेषज्ञों द्वारा भारत सरकार को कई महत्वपूर्ण बदलाव और भविष्य की नीतियां अपनाने की सिफारिशें की जा सकती हैं। तीनों सेना में एक आंतरिक सर्वेक्षण किया गया है जिसके तहत अग्नि वीरों के बीच सामंजस्य और विशेषज्ञ में सुधार के लिए बदलाव करने के सुझाव दिए भारतीय सेवा इसमें कई बदलावों की सिफारिश कर सकती है कई मीडिया रिपोर्ट के अनुसार या घटनाक्रम तीनों सेनन के आंतरिक सर्वेक्षण के बाद आने का उम्मीद है। चूंकि यह योजना अभी समाप्त नहीं हुई है, बल्कि इसमें संभावित बड़े बदलाव की चर्चा है, इसलिए भविष्य के लिए निम्नलिखित सुझाव दिए जा सकते हैं:
अग्निपथ योजना में सर्वेक्षण भविष्य के लिए संभावित सिफारिशें:
- भर्ती पर प्रभाव – रिक्रूटर्स से योजना के प्रभाव और रेजीमेंट स्टाफ से पिछले सैनिकों की तुलना में अग्नि वीरों के शारीरिक मानसिक, प्रशिक्षण व शैक्षणिक स्तर पर सवाल पूछे गए।
- स्थायी भर्ती का कोटा बढ़ाना: वर्तमान में 25 फीसदी अग्निवीरों को 4 साल बाद स्थायी करने का प्रावधान है। सिफारिश है कि इसे बढ़ाकर 60 से 70 फीसदी कर दिया जाए। इससे सैनिकों में सुरक्षा की भावना बढ़ेगी और सेना का मनोबल ऊंचा रहेगा।
- सेवा अवधि में विस्तार: 4 साल के कार्यकाल को बढ़ाकर 7 से 8 साल करने का सुझाव दिया गया है। इससे सैनिकों को अधिक व्यावहारिक प्रशिक्षण और अनुभव प्राप्त होगा।
- तकनीकी क्षेत्र में उम्र सीमा में वृद्धि: तकनीकी शाखाओं (जैसे सिग्नल, ई एम ई, एयर डिफेंस, इंजीनियर्स) के लिए भर्ती की ऊपरी आयु सीमा को 21 से बढ़ाकर 23 वर्ष करने की सिफारिश की गई है, ताकि अधिक योग्य और तकनीकी रूप से निपुण युवा मिल सकें।
5.सेवा निधि और पेंशन संबंधी सुधार: साल बाद बाहर होने वाले अग्निवीरों के लिए बेहतर सेवा निधि पैकेज और पुनर्वास की स्पष्ट नीति बनाई जाए ताकि विकलांगता होने पर ट्रेनिंग के दौरान भी उचित मुआवजा और सहायता का प्रावधान हो। - अन्य सुरक्षा बलों में आरक्षण: केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (CAPF, BSF, CRPF, CISF) असम राइफल्स और राज्य पुलिस बलों में पूर्व-अग्निवीरों के लिए 10-20 फीसदी आरक्षण को अनिवार्य रूप से लागू करने की सिफारिश है।
- प्रशिक्षण की अवधि बढ़ाना: मौजूदा 6 महीने के प्रशिक्षण को बढ़ाकर 9 से 12 महीने करने का सुझाव दिया जा सकता है, ताकि आधुनिक युद्ध के लिए सैनिक बेहतर तरीके से तैयार हो सकें।
- कौशल प्रमाणन: सेवा के दौरान प्राप्त तकनीकी और गैर-तकनीकी प्रशिक्षण को मान्यता देने के लिए डिग्री या डिप्लोमा का प्रावधान अधिक प्रभावी बनाया जाए, ताकि वे सिविलियन नौकरियों के लिए तैयार हो सकें।
- अन्य सिफारिशों में प्रशिक्षण के दौरान विकलांगता होने पर अनुग्रह राशि मंजूर करना, एक पेशेवर एजेंसी के तहत एग्जिट मैनेजमेंट और ड्यूटी के दौरान शहीद हुए अग्नि वीरों के परिवारों को निर्वाह भत्ता देना शामिल है। विश्वसनीय सूत्रों के मुताबिक भारतीय सेवा में अग्निवीरों को नागरिक जीवन में नौकरी खोजने में मदद करने के लिए एक एजेंसी स्थापित करने की भी सिफारिश की गई है।
इस तरह भविष्य की नीति का उद्देश्य सेना को युवा रखने के साथ-साथ अनुभवी बनाए रखना होना चाहिए। उपयोग करो और फेंको की धारणा को खत्म करने के लिए अधिकांश अग्निवीरों को सेना में रखने या अन्य सरकारी नौकरियों में सुनिश्चित भविष्य प्रदान करने वाली नीति अपनाई जानी चाहिए।

