मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के बीच ईरान को लेकर एक नई चिंता सामने आई है। ऐसी चर्चा तेज हो गई है कि ईरान एक बड़ा रणनीतिक कदम उठा सकता है, जिससे अमेरिका और इजरायल की चिंता बढ़ सकती है।अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप लगातार यह दावा करते रहे हैं कि ईरान पर कार्रवाई इसलिए की गई क्योंकि वह परमाणु हथियार बनाने के करीब पहुंच रहा था।
इसी बीच खबर है कि ईरान की संसद में परमाणु अप्रसार संधि (NPT) से बाहर निकलने पर विचार हो रहा है।अगर ईरान इस संधि से बाहर निकलता है, तो इसका सीधा मतलब होगा कि उस पर अंतरराष्ट्रीय निगरानी काफी हद तक खत्म हो जाएगी। साथ ही, अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) की निगरानी भी हट सकती है, जिससे ईरान को अपने परमाणु कार्यक्रम को आगे बढ़ाने की अधिक स्वतंत्रता मिल सकती है।ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने कहा है कि सरकार इस मुद्दे पर गंभीरता से विचार कर रही है।
उनका कहना है कि ऐसी संधि में बने रहने का क्या फायदा, जहां देश पर दबाव डाला जाए और उसे अपने अधिकारों का पूरा उपयोग करने से रोका जाए। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि ईरान के परमाणु ठिकानों पर हमले किए गए हैं।हालांकि, ईरान ने यह स्पष्ट किया है कि उसका परमाणु हथियार बनाने का कोई इरादा नहीं है। सरकार का कहना है कि वह सिर्फ अपनी नीतियों की समीक्षा कर रही है, न कि हथियार बनाने की दिशा में बढ़ रही है।इससे पहले भी, पिछले वर्ष एक छोटे सैन्य टकराव के बाद ईरानी सांसदों ने NPT से बाहर निकलने के विकल्प पर चर्चा की थी।
उसी दौरान ईरान के फोर्डो, नतांज और इस्फहान जैसे परमाणु स्थलों को निशाना बनाया गया था।गौरतलब है कि भारत, पाकिस्तान, इजरायल और उत्तर कोरिया जैसे देश या तो इस संधि का हिस्सा नहीं हैं या इससे बाहर निकल चुके हैं।कुल मिलाकर, ईरान का संभावित कदम क्षेत्रीय और वैश्विक सुरक्षा के लिए नई चुनौतियां खड़ी कर सकता है, जिस पर पूरी दुनिया की नजर बनी हुई है।

