नई दिल्ली। बच्चों में पोषण संबंधी जागरूकता बढ़ाने और स्वस्थ भारत के निर्माण के उद्देश्य से एमवे इंडिया ने अपने प्रमुख ‘पावर ऑफ 5 (Power of 5)’ स्कूल न्यूट्रिशन एजुकेशन प्रोग्राम के दूसरे चरण की शुरुआत की है। पहले चरण की सफलता के बाद अब यह कार्यक्रम दिल्ली के 10 नए सरकारी और सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों तक पहुंचाया जाएगा, जिससे लगभग 15,000 लोग लाभान्वित होंगे।
कंपनी के अनुसार, कार्यक्रम का उद्देश्य पोषण शिक्षा को स्कूली पढ़ाई का अभिन्न हिस्सा बनाना है। इसके लिए कक्षा आधारित गतिविधियों, डिजिटल लर्निंग टूल्स और सामुदायिक सहभागिता को एक साथ जोड़कर बच्चों में बचपन से ही स्वस्थ खान-पान की आदतें विकसित की जाएंगी।
पहले चरण में 40 हजार से अधिक लोगों को मिला लाभ
एमवे इंडिया ने बताया कि वित्त वर्ष 2025-26 में संचालित पहले चरण के दौरान 10,000 स्कूली बच्चों सहित 40,000 से अधिक लोग इस कार्यक्रम से लाभान्वित हुए। कार्यक्रम के मूल्यांकन में बच्चों के स्वास्थ्य और पोषण संबंधी व्यवहार में सकारात्मक बदलाव दर्ज किए गए। सामान्य बॉडी मास इंडेक्स (बीएमआई) वाले बच्चों की संख्या में वृद्धि हुई, जबकि कुपोषण और मोटापे के मामलों में कमी आई। साथ ही बच्चों में हाथ धोने जैसी स्वच्छता संबंधी आदतों और संतुलित भोजन अपनाने की प्रवृत्ति भी बढ़ी।
10 स्कूलों में लागू होगा दूसरा चरण
चाइल्डफंड इंडिया के सहयोग से संचालित यह कार्यक्रम वित्त वर्ष 2026-27 के दौरान दक्षिण दिल्ली के 10 सरकारी एवं सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों में लागू किया जाएगा। इससे पहली से आठवीं कक्षा तक के करीब 2,500 छात्र-छात्राओं, उनके शिक्षकों, अभिभावकों और पूरे स्कूल समुदाय सहित लगभग 15,000 लोग लाभान्वित होंगे।
कार्यक्रम का औपचारिक शुभारंभ दक्षिण दिल्ली के लाजपत नगर स्थित शहीद हेमू कालानी सर्वोदय बाल विद्यालय में किया गया। इस अवसर पर दिल्ली सरकार की स्टेट नोडल ऑफिसर (एजुकेशन एंड लिटरेसी) मनीषा तनेजा, एमवे इंडिया के मैनेजिंग डायरेक्टर रजनीश चोपड़ा और चाइल्डफंड इंडिया के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर आनंद विश्वकर्मा मौजूद रहे। कार्यक्रम के दौरान किचन गार्डन और हर्ब पॉट तैयार किए गए, छात्रों के लिए विभिन्न गतिविधियों का आयोजन किया गया तथा पौष्टिक भोजन भी परोसा गया।
पोषण शिक्षा से स्वस्थ भविष्य का निर्माण
एमवे इंडिया के मैनेजिंग डायरेक्टर रजनीश चोपड़ा ने कहा कि ‘पावर ऑफ 5’ केवल जागरूकता अभियान नहीं, बल्कि बच्चों को स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के लिए ज्ञान और आत्मविश्वास प्रदान करने की पहल है। उन्होंने कहा कि पहले चरण के सकारात्मक परिणामों ने इस कार्यक्रम के प्रभाव को साबित किया है और अब दूसरे चरण के माध्यम से पोषण साक्षरता को स्कूलों की शिक्षा व्यवस्था का स्थायी हिस्सा बनाने की दिशा में काम किया जाएगा।
वहीं, चांदनी चौक से सांसद प्रवीण खंडेलवाल ने कहा कि कुपोषण मुक्त और स्वस्थ भारत का निर्माण सरकार के साथ-साथ समाज और कॉर्पोरेट जगत की भी साझा जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि एमवे इंडिया का यह कार्यक्रम कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (CSR) का एक उत्कृष्ट उदाहरण है, जो राष्ट्रीय पोषण लक्ष्यों को मजबूती प्रदान करेगा।
चाइल्डफंड इंडिया के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर आनंद विश्वकर्मा ने कहा कि स्कूली उम्र में पोषण संबंधी सही जानकारी बच्चों के स्वस्थ भविष्य की मजबूत नींव रखती है और यह कार्यक्रम बच्चों, शिक्षकों तथा समुदाय में दीर्घकालिक सकारात्मक बदलाव लाने में मदद करेगा।
चार प्रमुख स्तंभों पर आधारित है कार्यक्रम
एक वर्ष की अवधि वाले इस कार्यक्रम को चार प्रमुख स्तंभों—बच्चों के लिए पोषण शिक्षा, शिक्षकों की क्षमता विकास, तकनीक आधारित शिक्षण तथा अभिभावकों एवं समुदाय की सक्रिय भागीदारी—पर तैयार किया गया है। इसमें संतुलित आहार, स्वच्छता, स्थानीय पौष्टिक खाद्य पदार्थों, न्यूट्रिशन एंबेसडर कार्यक्रम, डिजिटल लर्निंग प्लेटफॉर्म और स्मार्ट हेल्थ मॉनिटरिंग कियोस्क जैसी पहलें शामिल हैं।
कार्यक्रम के प्रभाव का मूल्यांकन नॉलेज, एटीट्यूड एंड प्रैक्टिस (KAP) असेसमेंट के माध्यम से किया जाएगा। इसका लक्ष्य कम से कम 70 प्रतिशत छात्रों में पोषण संबंधी ज्ञान और उनके पोषण स्तर में 30 प्रतिशत तक सुधार सुनिश्चित करना है।
एमवे इंडिया का यह अभियान संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्य (SDG-2: जीरो हंगर और SDG-3: अच्छी सेहत एवं तंदुरुस्ती) के साथ-साथ भारत सरकार के पोषण अभियान और आयुष्मान भारत स्कूल हेल्थ एंड वेलनेस प्रोग्राम को भी मजबूती प्रदान करता है।

