नई दिल्ली। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) अपने संगठनात्मक ढांचे में व्यापक बदलाव की दिशा में आगे बढ़ती दिखाई दे रही है। सूत्रों के अनुसार, देशभर में पार्टी के तेजी से बढ़े विस्तार और बढ़ती संगठनात्मक जिम्मेदारियों को देखते हुए शीर्ष नेतृत्व संगठन को अधिक प्रभावी, आधुनिक और जवाबदेह बनाने की रणनीति पर काम कर रहा है। इसी कड़ी में राष्ट्रीय स्तर पर कई बड़े बदलावों पर मंथन जारी है।
बताया जा रहा है कि पिछले कुछ वर्षों में भाजपा का जनाधार और संगठनात्मक विस्तार अभूतपूर्व गति से बढ़ा है, लेकिन उसी अनुपात में संगठन का ढांचा विकसित नहीं हो सका। इसका असर केंद्रीय नेतृत्व पर बढ़ते कार्यभार के रूप में सामने आया। अब पार्टी जिम्मेदारियों के बेहतर बंटवारे और निर्णय प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाने के उद्देश्य से संगठनात्मक पुनर्गठन की तैयारी कर रही है।
सूत्रों के मुताबिक, भाजपा के राष्ट्रीय पदाधिकारियों की मौजूदा संख्या 45 है, जिसे बढ़ाकर 60 किए जाने का प्रस्ताव विचाराधीन है। माना जा रहा है कि इससे विभिन्न विभागों, प्रकोष्ठों और राज्यों के बीच जिम्मेदारियों का अधिक संतुलित वितरण हो सकेगा तथा संगठनात्मक कार्यों में गति आएगी।
इसके साथ ही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के ‘क्षेत्र प्रचारक’ मॉडल से प्रेरित एक नई संगठनात्मक व्यवस्था पर भी गंभीरता से विचार किया जा रहा है। प्रस्तावित व्यवस्था के तहत देश के प्रमुख भौगोलिक क्षेत्रों की सीधी निगरानी और संगठनात्मक जिम्मेदारी शीर्ष नेतृत्व के बीच बांटी जा सकती है। सूत्रों का कहना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और भाजपा अध्यक्ष नितिन नबीन को अलग-अलग क्षेत्रों की जिम्मेदारी देकर संगठन की गतिविधियों की नियमित समीक्षा की व्यवस्था बनाई जा सकती है।
पार्टी के सर्वोच्च नीति-निर्धारण मंच में भी बदलाव की संभावना जताई जा रही है। लंबे समय से रिक्त पड़े कई महत्वपूर्ण पदों को भरा जा सकता है, जबकि बदलते राजनीतिक और सामाजिक समीकरणों को ध्यान में रखते हुए नए चेहरों को भी शीर्ष स्तर पर अवसर मिलने की संभावना है।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यदि इन प्रस्तावों को अंतिम रूप दिया जाता है, तो यह भाजपा के संगठनात्मक ढांचे में पिछले कई वर्षों का सबसे बड़ा बदलाव साबित हो सकता है। इससे पार्टी का निर्णय तंत्र अधिक विकेंद्रीकृत, जवाबदेह और परिणामोन्मुख बनने की दिशा में आगे बढ़ेगा।
हालांकि, इन प्रस्तावों को लेकर अभी तक भाजपा की ओर से कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। माना जा रहा है कि संगठनात्मक पुनर्गठन से जुड़े फैसलों की घोषणा उचित समय पर पार्टी नेतृत्व द्वारा की जाएगी।

