नई दिल्ली। भारत का विनिर्माण क्षेत्र तेजी से एक नए दौर में प्रवेश कर रहा है, जहां प्रतिस्पर्धा का आधार केवल उत्पादन क्षमता नहीं, बल्कि तकनीक, ऊर्जा दक्षता, स्वचालन और स्थिरता बनती जा रही है। ऑटोमोबाइल, रेलवे, रक्षा, एयरोस्पेस और भारी इंजीनियरिंग जैसे क्षेत्रों की रीढ़ माने जाने वाले फोर्जिंग उद्योग में भी यह परिवर्तन स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है। इसी बदलाव को दिशा देने और उद्योग जगत को भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार करने के उद्देश्य से एसोसिएशन ऑफ इंडियन फोर्जिंग इंडस्ट्री (AIFI) ने हाल ही में जमशेदपुर में एक विशेष सत्र का आयोजन किया, जिसने पूर्वी भारत में फोर्जिंग उद्योग की बढ़ती संभावनाओं को नई ऊर्जा प्रदान की।
फोर्जिंग उद्योग: भारतीय विनिर्माण की मजबूत नींव
फोर्जिंग उद्योग किसी भी औद्योगिक अर्थव्यवस्था की आधारशिला माना जाता है। वाहनों के इंजन से लेकर रेलवे के महत्वपूर्ण पुर्जों, पवन ऊर्जा संयंत्रों, रक्षा उपकरणों और औद्योगिक मशीनरी तक, फोर्जिंग से बने कलपुर्जे हर क्षेत्र में उपयोग किए जाते हैं। ऐसे में इस उद्योग की दक्षता और गुणवत्ता सीधे तौर पर देश की औद्योगिक क्षमता और वैश्विक प्रतिस्पर्धा को प्रभावित करती है।
आज जब दुनिया स्मार्ट मैन्युफैक्चरिंग, इंडस्ट्री 4.0 और हरित उत्पादन मॉडल की ओर बढ़ रही है, तब भारतीय फोर्जिंग उद्योग भी खुद को उसी दिशा में रूपांतरित कर रहा है।
जमशेदपुर बना तकनीकी मंथन का केंद्र
फोर्जिंग उद्योग के लिए आयोजित इस विशेष सत्र में उद्योग जगत के वरिष्ठ प्रतिनिधि, तकनीकी विशेषज्ञ, इंजीनियर और पेशेवर एक मंच पर जुटे। चर्चा का केंद्र था—कैसे आधुनिक तकनीकें, स्वचालन और उन्नत परिचालन रणनीतियां फोर्जिंग उद्योग को अधिक सक्षम, टिकाऊ और प्रतिस्पर्धी बना सकती हैं।
कार्यक्रम की शुरुआत रामकृष्ण फोर्जिंग्स लिमिटेड के प्रबंध निदेशक नरेश जालान के संबोधन से हुई। उन्होंने उद्योग के बदलते स्वरूप पर प्रकाश डालते हुए कहा कि भविष्य उन्हीं कंपनियों का होगा जो तकनीक अपनाने, गुणवत्ता सुधारने और सतत विकास के सिद्धांतों को अपने व्यवसाय का हिस्सा बनाएंगी।
ऊर्जा दक्षता: लागत घटाने और उत्पादकता बढ़ाने की कुंजी
वर्तमान समय में ऊर्जा लागत किसी भी विनिर्माण इकाई के लिए सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक है। ऐसे में मेगाथर्म इंडक्शन लिमिटेड के वरिष्ठ उपाध्यक्ष सैकत चटर्जी ने इंडक्शन हीटिंग और हार्डनिंग प्रक्रियाओं में ऊर्जा दक्षता बढ़ाने के उपायों पर विस्तृत जानकारी दी।
उन्होंने बताया कि आधुनिक हीटिंग तकनीकों के माध्यम से ऊर्जा की खपत को कम करते हुए उत्पादन क्षमता बढ़ाई जा सकती है। इससे न केवल परिचालन लागत घटती है, बल्कि पर्यावरणीय प्रभाव भी कम होता है। ऊर्जा दक्षता भविष्य के उद्योग की सबसे महत्वपूर्ण आवश्यकता बन चुकी है।
पारंपरिक से स्मार्ट फोर्जिंग की ओर
फोर्जिंग उद्योग में सबसे बड़ा बदलाव स्वचालन और डिजिटल तकनीकों के रूप में सामने आ रहा है। एचएफएम कंपनी लिमिटेड के अध्यक्ष एवं सीईओ जियोंग जोंग हो ने बताया कि आधुनिक प्रेस तकनीक और स्मार्ट मैन्युफैक्चरिंग सिस्टम पारंपरिक उत्पादन प्रक्रियाओं को पूरी तरह बदल रहे हैं।
सेंसर आधारित निगरानी, डेटा विश्लेषण, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और स्वचालित मशीनों की मदद से उत्पादन की गुणवत्ता में सुधार, त्रुटियों में कमी और उत्पादकता में उल्लेखनीय वृद्धि संभव हो रही है। स्मार्ट फोर्जिंग केवल तकनीकी बदलाव नहीं, बल्कि व्यवसायिक प्रतिस्पर्धा का नया मानक बन चुकी है।
नई धातुएं, नई तकनीकें और बढ़ती संभावनाएं
विनिर्माण क्षेत्र में नॉन-फेरस धातुओं के उपयोग में लगातार वृद्धि हो रही है। इस विषय पर इंडक्टोथर्म इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के पार्थेय पटेल ने नवीनतम इंडक्शन हीटिंग तकनीकों की जानकारी साझा की।
उन्होंने बताया कि नई तकनीकें उत्पादन में सटीकता बढ़ाने, समय बचाने और प्रक्रिया की विश्वसनीयता सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। इससे उद्योग को उच्च गुणवत्ता वाले उत्पाद बनाने में मदद मिल रही है।
छोटे बदलाव, बड़ा प्रभाव
उद्योग की सफलता केवल बड़ी मशीनों और उन्नत तकनीकों पर निर्भर नहीं करती, बल्कि कई बार छोटे लेकिन महत्वपूर्ण घटक भी बड़ी भूमिका निभाते हैं। येस्कोल्यूब इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के निदेशक संदीप गायकवाड़ ने फोर्जिंग डाई लुब्रिकेंट्स के महत्व पर प्रकाश डाला।
उन्होंने बताया कि उच्च गुणवत्ता वाले लुब्रिकेंट्स डाई की आयु बढ़ाने, रखरखाव लागत कम करने और उत्पाद की गुणवत्ता बेहतर बनाने में मदद करते हैं। यह निवेश कंपनियों को दीर्घकालिक लाभ प्रदान करता है।
पूर्वी भारत: फोर्जिंग उद्योग का उभरता केंद्र
जमशेदपुर में आयोजित यह सत्र केवल तकनीकी चर्चा तक सीमित नहीं था, बल्कि इसने पूर्वी भारत में फोर्जिंग उद्योग की बढ़ती संभावनाओं को भी रेखांकित किया। झारखंड, ओडिशा और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में खनिज संसाधनों, औद्योगिक आधार और कुशल मानव संसाधन की उपलब्धता इस क्षेत्र को फोर्जिंग और इंजीनियरिंग उद्योग के लिए महत्वपूर्ण केंद्र बना रही है। एआईएफआई के अध्यक्ष यश मुनोत के अनुसार, पूर्वी भारत में उद्योग जगत की उत्साहपूर्ण भागीदारी इस क्षेत्र में बढ़ती औद्योगिक गति का संकेत है। उनका मानना है कि ज्ञान, नवाचार और सहयोग ही भविष्य की प्रतिस्पर्धा में सफलता की कुंजी होंगे।
आज दुनिया हरित उत्पादन, डिजिटल परिवर्तन और स्मार्ट विनिर्माण की दिशा में आगे बढ़ रही है। ऐसे में भारतीय फोर्जिंग उद्योग के लिए तकनीक अपनाना अब विकल्प नहीं, बल्कि आवश्यकता बन चुका है। ऊर्जा दक्षता, स्वचालन, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और उन्नत इंजीनियरिंग समाधान आने वाले वर्षों में उद्योग की दिशा तय करेंगे।
जमशेदपुर में आयोजित यह विशेष सत्र इस बात का संकेत है कि भारतीय फोर्जिंग उद्योग केवल वैश्विक बदलावों के साथ कदम मिलाकर नहीं चल रहा, बल्कि भविष्य की औद्योगिक क्रांति का सक्रिय भागीदार बनने की तैयारी भी कर रहा है। यही परिवर्तन भारत को वैश्विक विनिर्माण केंद्र बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है।

