लखनऊ/गाजियाबाद। बहुजन समाज पार्टी (बसपा) में संगठनात्मक फेरबदल और अनुशासनात्मक कार्रवाई का सिलसिला लगातार जारी है। पार्टी सुप्रीमो मायावती के निर्देश पर शुक्रवार को दो नेताओं को पार्टी विरोधी गतिविधियों और अनुशासनहीनता के आरोप में पार्टी से निष्कासित कर दिया गया। इसकी जानकारी जिला अध्यक्ष मनोज कुमार जाटव ने दी।
जिला अध्यक्ष के अनुसार, वर्ष 2024 के शहर विधानसभा उपचुनाव में बसपा ने पी.एन. गर्ग को उम्मीदवार बनाया था, लेकिन चुनाव में हार के बाद उनकी कार्यशैली और कथित पार्टी विरोधी गतिविधियों को लेकर संगठन में लगातार शिकायतें मिल रही थीं। उन्हें कई बार नोटिस जारी कर सुधार का अवसर भी दिया गया, लेकिन अपेक्षित बदलाव नहीं दिखने पर पार्टी नेतृत्व ने उन्हें बाहर का रास्ता दिखा दिया।बसपा ने पूर्व मंडल प्रभारी रवि जाटव को भी पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोप में निष्कासित कर दिया है। पिछले चार महीनों के दौरान पार्टी पांच नेताओं के खिलाफ ऐसी कार्रवाई कर चुकी है। पार्टी नेतृत्व बूथ स्तर तक संगठन को मजबूत करने का दावा कर रहा है, लेकिन जमीनी स्तर पर कार्यकर्ताओं में अपेक्षित सक्रियता और उत्साह दिखाई नहीं दे रहा है।
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 को ध्यान में रखते हुए सभी दल अपनी संगठनात्मक तैयारियों में जुटे हैं। इसी क्रम में 17 मार्च को बसपा ने मुरादनगर के पूर्व विधायक वहाब चौधरी को पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोप में निष्कासित कर दिया था, लेकिन 28 मई को उन्हें दोबारा पार्टी में शामिल कर लिया गया। वहाब चौधरी वर्ष 2012 में मुरादनगर से विधायक चुने गए थे, जबकि 2017 में उन्होंने मोदीनगर सीट से चुनाव लड़ा था, जहां उन्हें हार का सामना करना पड़ा था।
नवंबर 2017 में भी वहाब चौधरी को पार्टी से निकाला गया था। उनकी पत्नी छम्मी चौधरी वर्तमान में मुरादनगर नगर पालिका परिषद की चेयरमैन हैं। इससे पहले 24 अप्रैल को बसपा ने सहारनपुर मंडल के जोन प्रभारी हाजी सरफराज और केरल प्रभारी जयप्रकाश सिंह को भी पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोप में निष्कासित किया था।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बसपा नेतृत्व 2027 के चुनाव से पहले संगठन में अनुशासन बनाए रखने और निष्क्रिय या असंतुष्ट नेताओं को किनारे कर नये सिरे से संगठन खड़ा करने की रणनीति पर काम कर रहा है। पार्टी गैर-यादव पिछड़े वर्ग और दलित वोट बैंक को फिर से मजबूत करने के लिए भाईचारा कमेटियों और जनसंपर्क अभियान पर विशेष जोर दे रही है। हालांकि लगातार हो रही निष्कासन की कार्रवाइयों से यह सवाल भी उठ रहा है कि क्या बसपा के भीतर असंतोष बढ़ रहा है या फिर पार्टी नेतृत्व चुनावी तैयारियों के अंतर्गत कठोर अनुशासन लागू कर रहा है।

