पति की मौत के 19 दिनों बाद पीड़िता ने किस दबाव में की गिफ्ट डीड
लखनऊ। शहर के प्रमुख कारोबारी रहे दिवंगत चन्द्रभूषण त्रिपाठी की बेटी से निकाह करने वाले मोनिश हसन ने अपनी पत्नी शिल्पी त्रिपाठी और उसकी मां गीता त्रिपाठी को टूलकिट बनाकर सम्पत्तियों और कारोबार को हड़पने के कार्य को अंजाम दिया, ताकि वह अपने आपको कानूनी शिकंजे से बचा सके। मोनीश के इस टूलकिट के कारण बरबादी के कगार पर पहुंचे त्रिपाठी परिवार में बची दो विधवा महिलायें न्याय के लिये दर-दर की ठोकरें खा रही है और पुलिस प्रशासन इस मामले को पारिवारिक सम्पत्ति विवाद बताकर आरोपी मोनिश के खिलाफ कार्यवाही करने से बच रही है।
इस पूरे मामले में महत्वपूर्ण चौंकाने वाली सबसे बड़ी बात यह सामने आयी है कि त्रिपाठी परिवार के सबसे छोटे पुत्र मनीष त्रिपाठी की 4 दिसम्बर 2025 को निधन होने के मात्र 19 दिनों बाद ही उसकी पत्नी पीड़िता निहारिका त्रिपाठी के ऊपर ऐसा कौन सा दबाव था, जिसको 23 अगस्त को नरही और राणा प्रताप मार्ग स्थित फ्लैट जहां पारिवारिक विज्ञापन कारोबार चलता है, की गिफ्टडीड सास गीता त्रिपाठी के पक्ष में करनी पड़ी, और उसके कुछ ही दिन ही दिन बाद सम्पत्तियों की गिफ्ट डीड गीता त्रिपाठी ने अपनी पुत्री यानी शिल्पी त्रिपाठी उर्फ अरशी हसन के नाम कर दी।
सम्पत्ति की यह लिखा-पढ़ी आनन-फानन में कराने और पारिवारिक कारोबार चाणक्य एजेन्सी को भी वहां के कर्मचारी समीर पाठक से मिलीभगत कर अपने कब्जे में लेना, पूरी तरह से यह सिद्ध करता है कि मोनिश हसन अपने आपको कानूनी शिकंजे से बचाते हुये अपनी पत्नी और सास को डरा धमकाकर टूलकिट की तरह इस्तेमाल कर रहा है।
इसके अलावा चाणक्य एजेन्सी को संभाल रहे समीर को लेकर वर्षों पुराना एक मामला भी चर्चा में आ रहा है कि वह दूसरों से लिये कर्जों से बचने के लिये अपनी मौत की खबर छपवाकर अंडरग्राउण्ड हो गये थे।
इस मामले में पीड़ित विधवा महिलाओं ने कई गंभीर आरोप लगाये है, जिसकी जांच गंभीरता के साथ जरूरी है। वहीं त्रिपाठी परिवार को न्याय दिलाने और आरोपियों के खिलाफ कार्यवाही की मांग को लेकर अखण्ड आर्यावर्त आर्य त्रिदंडी महासभा सहित कई हिन्दूवादी संगठन आगामी चार अगस्त को प्रदर्शन करने की तैयारी कर रहे है।

