बागपत (उत्तर प्रदेश)। देश के प्रमुख एफएमसीजी समूह धर्मपाल सत्यपाल ग्रुप (डीएस ग्रुप) ने ग्रामीण उत्तर प्रदेश की महिला किसानों को कीटनाशकों और रासायनिक पदार्थों के दुष्प्रभावों से बचाने के लिए एक अभिनव पहल शुरू की है। कंपनी ने बागपत जिले के सात गांवों—पाली, कथा, बांडपुर, सुनहेरा, बसी, मावीकला और सांकरौध—में ‘पल्लू प्रोटेक्शन इक्विपमेंट’ (PPE) जागरूकता अभियान की शुरुआत की है। इस अभियान का उद्देश्य महिला किसानों को स्वास्थ्य संबंधी जोखिमों के प्रति जागरूक करने के साथ-साथ उनकी जीवनशैली के अनुरूप एक सरल और प्रभावी सुरक्षा समाधान उपलब्ध कराना है।
अभियान के तहत डीएस ग्रुप ने धोकर दोबारा इस्तेमाल किए जा सकने वाले नैनो-फाइबर फिल्टर पेश किए हैं, जिन्हें साड़ी के पल्लू या दुपट्टे में आसानी से लगाया जा सकता है। यह फिल्टर खेती के दौरान कीटनाशकों के महीन कणों, धूल, हानिकारक रसायनों और पीएम 2.5 जैसे प्रदूषकों से बचाव में मदद करता है। कंपनी इन फिल्टरों को बागपत के सात गांवों में चयनित टेलर की दुकानों, कीटनाशक विक्रेताओं और मेडिकल स्टोरों के माध्यम से निःशुल्क उपलब्ध करा रही है।
महिला किसानों तक इस पहल को प्रभावी ढंग से पहुंचाने के लिए मोबाइल जागरूकता वैन, पारंपरिक कठपुतली शो, स्थानीय भाषा में नुक्कड़ नाटक, घर-घर संपर्क अभियान और निःशुल्क स्वास्थ्य जांच शिविर आयोजित किए जा रहे हैं। स्थानीय प्रशासन और ग्रामीण समुदाय के सहयोग से चल रहे इस अभियान के माध्यम से महिलाओं को कीटनाशकों के संपर्क से होने वाले स्वास्थ्य जोखिमों तथा सुरक्षित कृषि पद्धतियों को अपनाने के लिए प्रेरित किया जा रहा है।
स्वास्थ्य शिविरों में महिला किसानों का ब्लड प्रेशर और ब्लड शुगर परीक्षण किया जा रहा है। साथ ही उन्हें सुरक्षा मास्क, सुरक्षित खेती का संदेश देने वाले कैलेंडर और आईने भी वितरित किए जा रहे हैं, ताकि स्वास्थ्य और सुरक्षा के प्रति जागरूकता लगातार बनी रहे।
डीएस ग्रुप के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट (कॉर्पोरेट मार्केटिंग) राजीव जैन ने कहा कि महिला किसान भारतीय कृषि अर्थव्यवस्था की मजबूत आधारशिला हैं, लेकिन खेती के दौरान उन्हें जिन स्वास्थ्य जोखिमों का सामना करना पड़ता है, उनके प्रति जागरूकता अभी भी सीमित है। उन्होंने बताया कि कंपनी के अध्ययन में सामने आया कि अधिकांश महिला किसान कीटनाशकों के छिड़काव के समय केवल साड़ी के पल्लू या दुपट्टे से चेहरा ढकती हैं, जो पर्याप्त सुरक्षा नहीं देता। इसी आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए ऐसा समाधान तैयार किया गया है, जिसे महिलाएं बिना अपनी पारंपरिक कार्यशैली बदले आसानी से अपना सकें।
उन्होंने कहा कि ‘पल्लू प्रोटेक्शन इक्विपमेंट’ केवल एक उत्पाद नहीं, बल्कि महिला किसानों को सुरक्षित और स्वस्थ खेती के प्रति जागरूक करने का अभियान है, जो व्यवहारिक और सुलभ सुरक्षा समाधान उपलब्ध कराता है।
यह पहल डीएस ग्रुप के ‘फार्महर (FarmHER)’ कार्यक्रम का हिस्सा है, जिसके माध्यम से देशभर की महिला किसानों के योगदान को सम्मान देने और उन्हें स्वास्थ्य एवं सुरक्षा संबंधी जानकारी उपलब्ध कराने का प्रयास किया जा रहा है। कार्यक्रम का उद्देश्य महिला किसानों को उनकी आवश्यकताओं के अनुरूप व्यावहारिक समाधान उपलब्ध कराकर सुरक्षित कृषि को बढ़ावा देना है।
कंपनी ने पुरुष किसानों के लिए भी विशेष व्यवस्था की है। इसके तहत एक अलग पर्सनल प्रोटेक्टिव इक्विपमेंट (PPE) तैयार किया गया है, जिसे गमछे में लगाया जा सकता है। इससे पुरुष किसान भी खेती के दौरान कीटनाशकों, धूल और अन्य हानिकारक कणों से बेहतर सुरक्षा प्राप्त कर सकेंगे।
गौरतलब है कि वर्ष 1929 में स्थापित डीएस ग्रुप देश के प्रमुख एफएमसीजी और बहु-व्यवसायिक समूहों में शामिल है। कंपनी का कारोबार फूड एवं बेवरेज, कन्फेक्शनरी, माउथ फ्रेशनर, हॉस्पिटैलिटी, एग्री बिजनेस, लक्जरी रिटेल सहित कई क्षेत्रों में फैला हुआ है। समाज कल्याण, पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास के प्रति अपनी प्रतिबद्धता के तहत कंपनी जल संरक्षण, कार्बन न्यूनीकरण और वैश्विक ईएसजी मानकों के अनुरूप विभिन्न पहलें भी संचालित कर रही है।

