भारत सरकार की चेतावनी के बाद Meta की सफाई, AI के जरिए संदिग्ध कंटेंट पर रखी जा रही नजर; 7 दिन में मांगा गया जवाब
नई दिल्ली। बच्चों के यौन शोषण और दुर्व्यवहार (CSAM) से जुड़े कथित कंटेंट और विज्ञापनों को लेकर भारत सरकार की सख्ती के बाद Meta ने अपनी स्थिति स्पष्ट की है। कंपनी ने कहा है कि बच्चों के यौन शोषण से संबंधित किसी भी प्रकार के कंटेंट के प्रति उसकी “Zero Tolerance Policy” है और ऐसे मामलों में वह कड़ी कार्रवाई करती है।
कंपनी के प्रवक्ता ने कहा कि चाहे मामला किसी विज्ञापन का हो या सामान्य पोस्ट का, यदि उसमें बच्चों के यौन शोषण से जुड़ा अवैध कंटेंट पाया जाता है तो उसे तुरंत हटाया जाता है और संबंधित खातों के खिलाफ कार्रवाई की जाती है।
AI की मदद से अपराधियों की पहचान का दावा
Meta के अनुसार, कंपनी अपने प्लेटफॉर्म पर ऐसे अवैध कंटेंट की पहचान करने और उसे हटाने के लिए उन्नत आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) तकनीक का उपयोग कर रही है।
कंपनी का कहना है कि उसके प्लेटफॉर्म पर मौजूद 3.5 अरब से अधिक उपयोगकर्ताओं के बीच सक्रिय अपराधियों की पहचान करने के लिए विशेषज्ञ टीमें लगातार निगरानी कर रही हैं और संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखी जा रही है।
सरकार ने जारी किया था सख्त नोटिस
इससे पहले इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) ने इंस्टाग्राम पर कथित तौर पर प्रसारित हो रहे आपत्तिजनक कंटेंट और विज्ञापनों को तत्काल हटाने का निर्देश दिया था।
सरकार ने Meta को सात दिनों के भीतर विस्तृत जवाब देने को कहा है। साथ ही चेतावनी दी गई है कि संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर कंपनी के खिलाफ सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम (IT Act) और पॉक्सो अधिनियम, 2012 (POCSO Act) के तहत कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।
सरकार ने Meta को अपने उस एल्गोरिदम में भी सुधार करने का निर्देश दिया है, जिस पर ऐसे कंटेंट को बढ़ावा देने के आरोप लगे हैं।
BBC रिपोर्ट के बाद सामने आया मामला
यह पूरा विवाद एक BBC की जांच रिपोर्ट के बाद सामने आया, जिसमें आरोप लगाया गया कि इंस्टाग्राम और फेसबुक पर विज्ञापन नीतियों का उल्लंघन करते हुए बच्चों के यौन शोषण से जुड़े अवैध कंटेंट का प्रचार किया जा रहा था।
रिपोर्ट में दावा किया गया कि कुछ विज्ञापनों में आपत्तिजनक शब्दों का इस्तेमाल कर उपयोगकर्ताओं को आकर्षित किया जा रहा था। इन विज्ञापनों पर क्लिक करने के बाद कथित तौर पर यूजर्स को Telegram चैनलों पर भेजा जाता था, जहां अवैध सामग्री उपलब्ध कराई जा रही थी।
Meta से सरकार के कड़े सवाल
सरकार ने Meta से पूछा है कि ऐसे विज्ञापनों को प्लेटफॉर्म पर स्वीकृति कैसे मिली और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए कंपनी कौन-कौन से ठोस कदम उठा रही है।
सरकारी सूत्रों का कहना है कि यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं, तो Meta केवल यह कहकर जिम्मेदारी से बच नहीं सकती कि कंटेंट किसी तीसरे पक्ष द्वारा अपलोड किया गया था। चूंकि विज्ञापनों के माध्यम से कंपनी को राजस्व प्राप्त होता है, इसलिए नियमों के उल्लंघन की स्थिति में उसकी जवाबदेही भी तय की जा सकती है।
बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा पर बढ़ी निगरानी
विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म पर बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करना सोशल मीडिया कंपनियों की प्राथमिक जिम्मेदारी है। ऐसे मामलों में समय पर कार्रवाई, प्रभावी मॉडरेशन और पारदर्शी निगरानी व्यवस्था आवश्यक है, ताकि ऑनलाइन माध्यमों का दुरुपयोग रोका जा सके और बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।

