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शिवसेना के बाद समाजवादी पार्टी में सियासी पारा हाई, आखिर क्यों हो रही है ‘बागी बलिया’ की चर्चा?

नई दिल्ली। महाराष्ट्र में शिवसेना (यूबीटी) और पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस के भीतर उभरे राजनीतिक संकट के बाद अब उत्तर प्रदेश की राजनीति में भी संभावित उथल-पुथल की चर्चाएं तेज हो गई हैं। समाजवादी पार्टी (सपा) के भीतर बड़ी टूट की अटकलों के बीच उत्तर प्रदेश सरकार के कैबिनेट मंत्री और सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष ओम प्रकाश राजभर के ताजा बयान ने राजनीतिक गलियारों में नई हलचल पैदा कर दी है।

राजभर ने एक बार फिर दावा किया है कि समाजवादी पार्टी के भीतर असंतोष तेजी से बढ़ रहा है और जल्द ही पार्टी में बड़ा विभाजन देखने को मिल सकता है। इतना ही नहीं, उन्होंने यह संकेत भी दिया कि इस संभावित बगावत की कमान उत्तर प्रदेश की “बागी धरती” कहे जाने वाले बलिया जिले से जुड़ा कोई प्रमुख नेता संभाल सकता है।

‘बागी धरती’ के लाल के नेतृत्व का दावा

लंबे समय से सपा प्रमुख अखिलेश यादव पर हमलावर रहे ओम प्रकाश राजभर ने सोशल मीडिया मंच एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर एक पोस्ट के जरिए बड़ा राजनीतिक संकेत दिया। उन्होंने लिखा कि समाजवादी पार्टी के सांसदों का एक मजबूत “बागी गुट” आकार ले रहा है।

राजभर ने अपने पोस्ट में कहा, “कल से हर कोई पूछ रहा है कि सपा में क्या टूटने वाला है? तो सुनिए, सपा के बागी सांसदों के गुट की अगुवाई उत्तर प्रदेश की ‘बागी धरती’ का एक ‘लाल’ करेगा। जिस तरह सपा कार्यालय में सम्मेलन की आड़ में ब्राह्मणों का अपमान किया गया, उससे ‘बागी बलिया’ का लाल बेहद आहत हुआ है। योजना पहले से थी, लेकिन इस घटना ने आग में घी डालने का काम किया है। फूट अब तय है।”

राजभर के इस बयान के बाद राजनीतिक विश्लेषक यह समझने में जुट गए हैं कि आखिर वह किस नेता की ओर इशारा कर रहे हैं और समाजवादी पार्टी के भीतर किस स्तर तक असंतोष मौजूद है।

ब्राह्मण सम्मेलन विवाद बना नया राजनीतिक मुद्दा

राजभर के अनुसार समाजवादी पार्टी कार्यालय में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान ब्राह्मण समाज के सम्मान को ठेस पहुंची, जिसने पहले से मौजूद नाराजगी को और बढ़ा दिया। उनका दावा है कि यही घटना संभावित बगावत के लिए उत्प्रेरक (कैटेलिस्ट) साबित हुई है।

हालांकि समाजवादी पार्टी की ओर से अभी तक इस आरोप पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन विपक्षी दल इस मुद्दे को लेकर लगातार सपा नेतृत्व पर निशाना साध रहे हैं।

केशव प्रसाद मौर्य ने भी बढ़ाई अटकलें

समाजवादी पार्टी में संभावित असंतोष को लेकर उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने भी बड़ा बयान दिया है। कानपुर में पत्रकारों से बातचीत करते हुए उन्होंने दावा किया कि भारतीय जनता पार्टी आगामी चुनावों में भारी बहुमत के साथ सत्ता में वापसी करेगी, जबकि समाजवादी पार्टी को एक और राजनीतिक झटका लग सकता है।

मौर्य ने कहा कि सपा के कई नेता और सांसद अखिलेश यादव के नेतृत्व से असंतुष्ट हैं। उन्होंने यह भी दावा किया कि पार्टी के लगभग 25 से 26 सांसद अलग राह अपनाने की तैयारी में हैं।

क्या सपा में सचमुच बढ़ रहा है असंतोष?

राजभर और मौर्य के बयानों ने उत्तर प्रदेश की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। हालांकि अभी तक समाजवादी पार्टी में किसी बड़े नेता या सांसद द्वारा खुलकर असहमति का प्रदर्शन नहीं किया गया है, लेकिन विपक्षी दल लगातार पार्टी के भीतर असंतोष का दावा कर रहे हैं।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यदि आने वाले दिनों में सपा नेतृत्व इन अटकलों पर स्पष्ट प्रतिक्रिया नहीं देता है, तो पार्टी के भीतर टूट और बगावत की चर्चाएं और तेज हो सकती हैं।

फिलहाल उत्तर प्रदेश की राजनीति में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या यह केवल राजनीतिक बयानबाजी है या फिर समाजवादी पार्टी वास्तव में किसी बड़े आंतरिक संकट की ओर बढ़ रही है। आने वाले दिनों में इस पर तस्वीर और स्पष्ट हो सकती है।

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