नई दिल्ली। मानसून के आगमन के साथ ही देश के कई हिस्सों में डेंगू का खतरा बढ़ने लगा है। विशेषज्ञों का मानना है कि डेंगू पर प्रभावी नियंत्रण केवल सरकारी प्रयासों से संभव नहीं है, बल्कि इसके लिए व्यापक सामुदायिक जागरूकता और जनभागीदारी भी उतनी ही आवश्यक है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, हर वर्ष दुनिया भर में लगभग 39 करोड़ लोग डेंगू वायरस से संक्रमित होते हैं। इनमें से करीब 9 से 10 करोड़ लोगों में बीमारी के स्पष्ट लक्षण दिखाई देते हैं, जबकि बड़ी संख्या में संक्रमित व्यक्तियों में कोई लक्षण विकसित नहीं होते। वर्तमान समय में डेंगू भारत सहित अनेक देशों के लिए गंभीर जनस्वास्थ्य चुनौती बन चुका है और कई क्षेत्रों में महामारी जैसी स्थिति पैदा कर रहा है।
डेंगू एक वायरल संक्रमण है, जो मादा एडीज एजिप्टि मच्छर के काटने से फैलता है। संक्रमित मच्छर के काटने के बाद वायरस रक्त के माध्यम से पूरे शरीर में फैल जाता है। डेंगू वायरस के चार अलग-अलग प्रकार (सीरोटाइप) होते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, यदि किसी व्यक्ति को पहले डेंगू हो चुका है, तो दोबारा संक्रमण होने पर बीमारी अधिक गंभीर रूप ले सकती है।
जलवायु परिवर्तन बढ़ा रहा है खतरा
पिछले कुछ वर्षों में मौसम संबंधी बदलावों ने डेंगू, मलेरिया और चिकनगुनिया जैसी मच्छरजनित बीमारियों के प्रसार को बढ़ावा दिया है। बढ़ते तापमान, अनियमित वर्षा और अधिक आर्द्रता ने मच्छरों के प्रजनन के लिए अनुकूल वातावरण तैयार किया है। वर्षा के बाद जमा होने वाला पानी मच्छरों के पनपने का प्रमुख स्रोत बनता है। गर्म और नम मौसम में इनकी संख्या तेजी से बढ़ती है, जिससे संक्रमण फैलने का जोखिम कई गुना बढ़ जाता है।
क्या हैं डेंगू के लक्षण?
डेंगू के शुरुआती लक्षणों में अचानक तेज बुखार, तीव्र सिरदर्द, आंखों के पीछे दर्द, मांसपेशियों और जोड़ों में दर्द, त्वचा पर लाल चकत्ते, मतली, उल्टी और भूख में कमी शामिल हैं। जोड़ों और मांसपेशियों में अत्यधिक दर्द के कारण इसे कभी-कभी “ब्रेक बोन फीवर” भी कहा जाता है।
सामान्यतः बुखार कुछ दिनों में उतर जाता है, लेकिन शरीर को पूरी तरह स्वस्थ होने में कई सप्ताह लग सकते हैं। बड़े बच्चों और वयस्कों में इसके लक्षण अपेक्षाकृत अधिक स्पष्ट और गंभीर हो सकते हैं।
गंभीर रूप भी ले सकता है डेंगू
अधिकांश मामलों में डेंगू सामान्य बुखार की तरह ठीक हो जाता है, लेकिन कुछ रोगियों में यह डेंगू हेमोरेजिक फीवर या डेंगू शॉक सिंड्रोम जैसी गंभीर स्थितियों का रूप ले सकता है। ऐसी स्थिति में रक्तस्राव, प्लेटलेट्स की संख्या में तेजी से गिरावट तथा शरीर के महत्वपूर्ण अंगों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। समय पर उपचार नहीं मिलने पर यह जानलेवा भी साबित हो सकता है।
शहरों से गांवों तक बढ़ रहा संक्रमण
तेजी से हो रहे शहरीकरण, अव्यवस्थित जल निकासी व्यवस्था और बदलती जीवनशैली के कारण अब डेंगू का प्रभाव केवल बड़े शहरों तक सीमित नहीं रह गया है। ग्रामीण और उपशहरी क्षेत्रों में भी इसके मामलों में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की जा रही है। दिल्ली, पश्चिम बंगाल, केरल, तमिलनाडु, गुजरात, कर्नाटक, महाराष्ट्र, राजस्थान, पंजाब और हरियाणा जैसे राज्य समय-समय पर डेंगू के गंभीर प्रकोप का सामना करते रहे हैं।
बचाव ही सबसे बड़ा उपचार
चूंकि डेंगू का कोई विशिष्ट इलाज उपलब्ध नहीं है, इसलिए बचाव को ही सबसे प्रभावी उपाय माना जाता है। विशेषज्ञों के अनुसार निम्नलिखित सावधानियां अपनाकर डेंगू के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है—
घर और आसपास कहीं भी पानी जमा न होने दें।
कूलर, फूलदान, पानी की टंकी और ड्रम की नियमित सफाई करें।
जल संग्रहण वाले सभी पात्रों को ढककर रखें।
छतों और खुले स्थानों पर जमा वर्षा जल को समय-समय पर हटाएं।
पुराने टायर, नारियल के छिलके, खाली बोतलें और अन्य अनुपयोगी वस्तुओं को नष्ट करें या उचित स्थान पर रखें।
पानी की टंकियों को मजबूत ढक्कन से बंद रखें और ओवरफ्लो पाइपों पर जाली लगाएं।
मच्छरदानी, रिपेलेंट और पूरे शरीर को ढकने वाले कपड़ों का उपयोग करें।
लक्षण दिखें तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें
यदि किसी व्यक्ति में डेंगू जैसे लक्षण दिखाई दें तो उसे तुरंत चिकित्सकीय परामर्श लेना चाहिए। बुखार और दर्द के लिए डॉक्टर की सलाह के अनुसार पैरासिटामोल का उपयोग किया जा सकता है, लेकिन एस्पिरिन जैसी दवाओं से बचना चाहिए क्योंकि वे रक्तस्राव का खतरा बढ़ा सकती हैं। रोगी को पर्याप्त आराम और अधिक मात्रा में तरल पदार्थों का सेवन करना चाहिए।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि डेंगू फैलाने वाले मच्छर मुख्य रूप से दिन के समय सक्रिय रहते हैं, इसलिए पूरे दिन सावधानी बरतना जरूरी है। स्वच्छता, मच्छर नियंत्रण और सामुदायिक जागरूकता के संयुक्त प्रयासों से ही डेंगू के बढ़ते खतरे को प्रभावी ढंग से नियंत्रित किया जा सकता है।
वास्तव में, डेंगू के खिलाफ सबसे प्रभावी हथियार आज भी जागरूकता, सतर्कता और बचाव ही है।
(नोट: डेंगू या किसी अन्य बीमारी के लक्षण दिखाई देने पर स्वयं उपचार करने के बजाय योग्य चिकित्सक से परामर्श अवश्य लें।)

