5–10 दिन से अधिक रहने वाला मुंह का छाला हो सकता है कैंसर का संकेत, समय पर जांच और नियमित फॉलो-अप से बचाई जा सकती है जान
मुंबई । भारत में हेड एंड नेक (सिर और गर्दन) कैंसर के बढ़ते मामलों के बीच चिकित्सा विशेषज्ञों ने इलाज के बाद भी सतर्क रहने की आवश्यकता पर जोर दिया है। विश्व हेड एंड नेक कैंसर दिवस के अवसर पर एसएसओ हॉस्पिटल के हेड एंड नेक कैंसर सर्जन डॉ. अमित चक्रवर्ती ने कहा कि सफल उपचार के बाद भी मरीजों में कैंसर दोबारा लौटने का खतरा बना रहता है। इसलिए नियमित जांच, समय-समय पर फॉलो-अप और स्वस्थ जीवनशैली अपनाना बेहद जरूरी है।
डॉ. अमित चक्रवर्ती ने बताया कि उपचार करा चुके हर 100 मरीजों में से लगभग 20 से 40 मरीजों में कैंसर दोबारा हो सकता है। हालांकि, यदि नियमित फॉलो-अप किया जाए और शुरुआती लक्षणों की समय रहते पहचान हो जाए, तो दोबारा होने वाले कैंसर का भी प्रभावी उपचार संभव है।
उन्होंने लोगों को आगाह करते हुए कहा कि यदि मुंह का कोई छाला 5 से 10 दिनों से अधिक समय तक ठीक नहीं होता, या मुंह में सफेद धब्बे, गांठ अथवा अन्य असामान्य बदलाव दिखाई दें, तो इसे सामान्य समस्या समझकर नजरअंदाज न करें। ऐसी स्थिति में तुरंत विशेषज्ञ चिकित्सक से जांच करानी चाहिए, क्योंकि यह कैंसर का शुरुआती संकेत हो सकता है।
इस अवसर पर कैंसर से स्वस्थ हो चुके 43 वर्षीय मिहिर जोबनपुत्रा और 70 वर्षीय दिनकर आढव ने अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने बताया कि समय पर जांच और सर्जरी के कारण वे आज सामान्य और स्वस्थ जीवन जी रहे हैं। दोनों ने लोगों से तंबाकू, गुटखा, सुपारी और धूम्रपान से दूर रहने तथा मुंह में होने वाले किसी भी असामान्य परिवर्तन को गंभीरता से लेने की अपील की।

विशेषज्ञों के अनुसार तंबाकू, गुटखा, सुपारी, शराब का सेवन और एचपीवी (HPV) संक्रमण हेड एंड नेक कैंसर के प्रमुख जोखिम कारक हैं। इनसे बचकर और समय-समय पर स्वास्थ्य जांच कराकर इस बीमारी के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
इस बीच, एसएसओ हॉस्पिटल ने जल्द ही हेड एंड नेक कैंसर सेंटर ऑफ एक्सीलेंस शुरू करने की घोषणा की है। इस केंद्र में मरीजों को एक ही स्थान पर स्क्रीनिंग, सर्जरी, रिकंस्ट्रक्टिव उपचार, रेडिएशन थेरेपी, पुनर्वास (रीहैबिलिटेशन) और दीर्घकालिक फॉलो-अप जैसी समग्र चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी।
चिकित्सकों का कहना है कि कैंसर के खिलाफ सबसे बड़ा हथियार समय पर पहचान, नियमित जांच और जागरूकता है। यदि शुरुआती लक्षणों को गंभीरता से लिया जाए और उपचार में देरी न की जाए, तो हेड एंड नेक कैंसर पर प्रभावी नियंत्रण पाया जा सकता है।

