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राम मंदिर चढ़ावा विवाद में टिन्नू यादव का नाम चर्चा में, एसआईटी जांच पर टिकीं सबकी निगाहें

अयोध्या। अयोध्या स्थित राम मंदिर में चढ़ावे और कथित वित्तीय अनियमितताओं से जुड़े विवाद की जांच लगातार तेज होती जा रही है। उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गठित विशेष जांच दल (एसआईटी) पिछले कई दिनों से राम मंदिर परिसर और उससे जुड़े लोगों से पूछताछ कर रहा है। इस मामले ने राजनीतिक और सामाजिक हलकों में व्यापक चर्चा को जन्म दिया है। जहां विपक्षी दल इसे गंभीर मामला बता रहे हैं, वहीं राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट से जुड़े लोग सभी आरोपों को निराधार करार दे रहे हैं।

सूत्रों के अनुसार, एसआईटी ने सोमवार को करीब सात से आठ घंटे तक मंदिर परिसर में जांच की। इसके बाद मंगलवार और बुधवार को भी जांच और पूछताछ का सिलसिला जारी रहा। जांच के दौरान राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट से जुड़े दस से अधिक लोगों से पूछताछ किए जाने की जानकारी सामने आई है। इनमें ट्रस्ट के वरिष्ठ अधिकारी गोपाल राव सहित कई प्रमुख नाम शामिल बताए जा रहे हैं। हालांकि अभी तक एसआईटी और ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय के बीच किसी औपचारिक बातचीत की पुष्टि नहीं हुई है।

टिन्नू यादव का नाम सबसे अधिक चर्चा में

इस पूरे विवाद में राम शंकर उर्फ टिन्नू यादव का नाम सबसे ज्यादा चर्चा में है। सोशल मीडिया और राजनीतिक गलियारों में उन्हें चढ़ावे से जुड़े विवाद का प्रमुख चेहरा बताया जा रहा है। जानकारी के अनुसार एसआईटी ने टिन्नू यादव सहित छह सेवादारों से पूछताछ की है।

टिन्नू यादव ने मीडिया से बातचीत में अपने ऊपर लगाए जा रहे सभी आरोपों को खारिज किया है। उनका कहना है कि जिस कक्ष में मंदिर के चढ़ावे की नकदी की गिनती होती थी, उससे उनका कोई संबंध नहीं था और उस व्यवस्था का प्रभार अन्य लोगों के पास था।

साधारण पृष्ठभूमि से चर्चा के केंद्र तक

टिन्नू यादव की पृष्ठभूमि को लेकर भी विभिन्न चर्चाएं सामने आ रही हैं। स्थानीय लोगों के अनुसार, वह कभी अयोध्या में टेंपो और ऑटो चलाने का काम करते थे। बताया जाता है कि उनके पिता नया घाट क्षेत्र में एक छोटी चाय की दुकान चलाते थे।

जानकारी के मुताबिक, वर्ष 1994-95 के दौरान उनकी पहचान श्रीराम जन्मभूमि मुक्ति यज्ञ समिति के तत्कालीन पदाधिकारी महेश नारायण से हुई थी। बाद में वे उनके चालक के रूप में कार्य करने लगे। इसी दौरान उनका संपर्क कारसेवकपुरम और राम मंदिर आंदोलन से जुड़े कई प्रमुख लोगों से हुआ।

बताया जाता है कि वर्ष 1998 में उनकी मुलाकात चंपत राय से हुई, जिसके बाद वे मंदिर आंदोलन और उससे जुड़ी गतिविधियों में सक्रिय होते चले गए। वर्ष 2019 में राम मंदिर निर्माण की प्रक्रिया तेज होने के बाद उन्हें ट्रस्ट से जुड़े कार्यों में वेतनभोगी कार्यकर्ता के रूप में जिम्मेदारी मिलने की चर्चा है।

संपत्ति को लेकर उठ रहे सवाल

विवाद के बीच टिन्नू यादव की संपत्ति को लेकर भी कई तरह के दावे किए जा रहे हैं। अयोध्या, लखनऊ और बस्ती जिले में मकान, छात्रावास, कृषि भूमि तथा अन्य व्यवसायों में हिस्सेदारी को लेकर चर्चाएं तेज हैं। हालांकि इन दावों की अब तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और जांच एजेंसियों ने भी इस संबंध में कोई अंतिम निष्कर्ष सार्वजनिक नहीं किया है।

टिन्नू यादव की पत्नी ने भी सभी आरोपों को निराधार बताते हुए कहा है कि उनके परिवार को गलत तरीके से विवाद में घसीटा जा रहा है।

राजनीतिक बयानबाजी भी तेज

मामले ने राजनीतिक रंग भी ले लिया है। समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष Akhilesh Yadav ने पूरे प्रकरण की गहन जांच की मांग करते हुए इसे “महापाप और महाघोटाला” बताया है। उन्होंने कहा कि मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और यदि कोई अनियमितता हुई है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए।

वहीं भाजपा नेता Brij Bhushan Sharan Singh ने भी इस मामले पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। राजनीतिक दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है।

तीन सदस्यीय एसआईटी कर रही जांच

गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश सरकार ने 13 जून को राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के अनुरोध पर तीन सदस्यीय विशेष जांच दल का गठन किया था। सरकार के अनुसार, ट्रस्ट ने तथ्यों की निष्पक्ष जांच और मंदिर की छवि को नुकसान पहुंचाने संबंधी आरोपों की सत्यता सामने लाने का अनुरोध किया था।

एसआईटी में लखनऊ मंडलायुक्त विजय विश्वास पंत, पुलिस महानिरीक्षक किरण एस तथा वित्त विभाग के विशेष सचिव नील रतन को शामिल किया गया है।

अब सभी की निगाहें एसआईटी की जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि राम मंदिर से जुड़े इस बहुचर्चित विवाद में कितनी सच्चाई है और आरोपों का वास्तविक आधार क्या है।

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