देश के करोड़ों गरीब और जरूरतमंद लोगों के लिए केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में SARTHAK PDS Scheme को मंजूरी दे दी गई है। सरकार का दावा है कि इस योजना से देश के करीब 81 करोड़ 35 लाख लोगों को सीधा फायदा मिलेगा और सार्वजनिक वितरण प्रणाली यानी राशन व्यवस्था पहले से ज्यादा मजबूत और पारदर्शी बनेगी।
केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि सरकार अगले पांच वर्षों में इस योजना पर करीब 25 हजार 530 करोड़ रुपये खर्च करेगी। इस योजना का उद्देश्य राशन वितरण प्रणाली को आधुनिक तकनीक से जोड़कर अंतिम व्यक्ति तक सही तरीके से खाद्यान्न पहुंचाना है।
सरकार ने इस नई योजना को तैयार करने के लिए दो पुरानी योजनाओं को एक साथ मिलाया है। इनमें राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत राज्यों को खाद्यान्न परिवहन और राशन दुकानदारों के मार्जिन के लिए दी जाने वाली सहायता योजना और Smart PDS योजना शामिल हैं। अब इन्हें मिलाकर “सार्थक पीडीएस योजना” बनाई गई है।
इस योजना के तहत राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को खाद्यान्न के परिवहन, भंडारण और उचित मूल्य की दुकानों के संचालन के लिए आर्थिक सहायता मिलेगी। साथ ही राशन दुकानदारों के कमीशन में भी सुधार किया जाएगा ताकि पूरी वितरण व्यवस्था अधिक प्रभावी बन सके। यह योजना 31 मार्च 2031 तक लागू रहेगी।
सरकार अब राशन व्यवस्था को हाईटेक बनाने की दिशा में भी तेजी से काम कर रही है। योजना के तहत Artificial Intelligence यानी AI, Machine Learning, Natural Language Processing और Blockchain जैसी आधुनिक तकनीकों का उपयोग किया जाएगा। इसके अलावा रियल टाइम मॉनिटरिंग सिस्टम, शिकायत निवारण तंत्र और राज्य स्तरीय कंट्रोल सेंटर भी बनाए जाएंगे ताकि गड़बड़ियों पर रोक लग सके और लाभार्थियों को समय पर सुविधा मिल सके।
अश्विनी वैष्णव ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में सरकार ने राशन व्यवस्था में कई बड़े डिजिटल सुधार किए हैं। राशन कार्डों का डिजिटलीकरण, आधार से लिंकिंग, ई-पॉस मशीनों का इस्तेमाल, ऑनलाइन आवंटन और सप्लाई चेन का कंप्यूटरीकरण पहले ही लागू किया जा चुका है। “मेरा राशन”, “अन्न मित्र” और “अन्न सहायता” जैसे प्लेटफॉर्म भी लोगों की सुविधा बढ़ा रहे हैं।
कुल मिलाकर, केंद्र सरकार का यह फैसला सिर्फ राशन व्यवस्था को मजबूत करने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह गरीबों की खाद्य सुरक्षा, तकनीकी पारदर्शिता, मानवीय संवेदनशीलता और राष्ट्रीय सुरक्षा को साथ लेकर चलने की बड़ी पहल माना जा रहा है।

