नई दिल्ली। भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को भविष्य की पीढ़ियों के लिए सुरक्षित रखने और आम लोगों तक उसकी आसान पहुंच सुनिश्चित करने के उद्देश्य से केंद्र सरकार संग्रहालयों, पांडुलिपियों और ऐतिहासिक अभिलेखों के व्यापक डिजिटलीकरण पर तेजी से काम कर रही है। संस्कृति मंत्रालय ने संग्रहालयों, अभिलेखागार और सांस्कृतिक संस्थानों में डिजिटल संरक्षण, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), संवर्धित वास्तविकता (एआर) और आभासी वास्तविकता (वीआर) जैसी आधुनिक तकनीकों के उपयोग को बढ़ावा दिया है।
केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने लोकसभा में लिखित उत्तर में बताया कि मंत्रालय सी-डैक, पुणे द्वारा विकसित ‘जतन (JATAN)’ सॉफ्टवेयर के माध्यम से संग्रहालयों और अभिलेखीय संग्रहों का डिजिटलीकरण कर रहा है। इसके तहत भारत के संग्रहालय पोर्टल पर राष्ट्रीय स्तर के आठ संग्रहालयों, दो भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) संग्रहालयों तथा डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर संग्रहालय, पुणे के डिजिटल संग्रह उपलब्ध कराए गए हैं।
ज्ञान भारतम मिशन से 3.5 लाख से अधिक पांडुलिपियां ऑनलाइन
संस्कृति मंत्रालय के ज्ञान भारतम मिशन के तहत देश की प्राचीन हस्तलिखित धरोहरों को संरक्षित करने का कार्य जारी है। वर्तमान में ज्ञान भारतम पोर्टल पर 3.5 लाख से अधिक पांडुलिपियां डिजिटल स्वरूप में आम जनता के लिए उपलब्ध हैं, जिससे शोधकर्ताओं, विद्यार्थियों और आम नागरिकों को दुर्लभ ज्ञान-संपदा तक आसानी से पहुंच मिल रही है।
राष्ट्रीय अभिलेखागार भी कर रहा व्यापक डिजिटलीकरण
भारतीय राष्ट्रीय अभिलेखागार (एनएआई) देश के ऐतिहासिक दस्तावेजों का डिजिटलीकरण कर उन्हें ‘अभिलेख पटल’ पोर्टल पर उपलब्ध करा रहा है। इससे शोधकर्ताओं और इतिहासकारों को महत्वपूर्ण अभिलेखों तक ऑनलाइन पहुंच प्राप्त हो रही है।
विज्ञान और संस्कृति में भी डिजिटल नवाचार
राष्ट्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी संग्रहालय परिषद (एनसीएसएम) ने प्रतिष्ठित भारतीय वैज्ञानिकों के पत्रों, शोधपत्रों और पांडुलिपियों को संजोते हुए राष्ट्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी डिजिटल अभिलेखागार विकसित किया है। वहीं इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र (आईजीएनसीए) ने पांडुलिपियों, दुर्लभ पुस्तकों, तस्वीरों, ऑडियो-विजुअल रिकॉर्डिंग और सांस्कृतिक दस्तावेजों का विशाल डिजिटल संग्रह तैयार किया है।
एआई, एआर और वीआर से बदलेगा संग्रहालयों का अनुभव
सरकार संग्रहालयों को तकनीक आधारित आधुनिक अनुभव से जोड़ रही है। एनसीएसएम अपने संग्रहालयों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), संवर्धित वास्तविकता (एआर), आभासी वास्तविकता (वीआर), कंप्यूटर विजन और सेंसर आधारित इंटरैक्टिव तकनीकों का उपयोग कर रहा है, जिससे आगंतुकों को अधिक आकर्षक और सहभागितापूर्ण अनुभव मिल सके।
भारतीय संग्रहालय और IIT खड़गपुर की साझेदारी
कोलकाता स्थित भारतीय संग्रहालय ने पुरातात्विक धरोहरों के एआई आधारित संरक्षण और जीर्णोद्धार के लिए आईआईटी खड़गपुर के साथ साझेदारी की है। साथ ही, गूगल आर्ट एंड कल्चर के सहयोग से वर्चुअल प्रदर्शनी भी विकसित की गई है, जिससे दुनिया भर के लोग भारतीय विरासत को डिजिटल माध्यम से देख सकते हैं।
एएसआई के संग्रहालयों का भी डिजिटल विस्तार
भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) ने गोवा और नागार्जुनकोंडा संग्रहालयों की हजारों पुरावस्तुओं का डिजिटलीकरण किया है। इसके अलावा हम्पी और नालंदा के पुरातत्व संग्रहालयों के लिए मोबाइल एप विकसित किए गए हैं, जिनके माध्यम से आगंतुक वर्चुअल टूर और डिजिटल जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।
छात्रों में विरासत के प्रति जागरूकता
सांस्कृतिक संसाधन एवं प्रशिक्षण केंद्र (सीसीआरटी) देशभर के शिक्षकों और विद्यार्थियों के लिए संग्रहालयों, ऐतिहासिक स्मारकों और सांस्कृतिक संस्थानों की शैक्षणिक यात्राएं आयोजित कर रहा है। इन कार्यक्रमों का उद्देश्य नई पीढ़ी को भारत की सांस्कृतिक विरासत से जोड़ना और अनुभवात्मक शिक्षा को बढ़ावा देना है।
विज्ञान केंद्रों का भी हो रहा आधुनिकीकरण
सरकार विज्ञान संस्कृति संवर्धन योजना (एसपीओसीएस) के तहत देश के विभिन्न राज्यों में विज्ञान केंद्रों के आधुनिकीकरण और उन्नयन का कार्य भी कर रही है। इसके अंतर्गत रांची, दीमापुर, शिलांग, आइजोल, अगरतला और मणिपुर सहित कई विज्ञान केंद्रों को आधुनिक तकनीकों से सुसज्जित किया गया है।
डिजिटल संरक्षण से बढ़ी पहुंच
संस्कृति मंत्रालय के अनुसार पांडुलिपियों, तस्वीरों, अभिलेखों और सांस्कृतिक धरोहरों के डिजिटलीकरण, ऑनलाइन संसाधनों की उपलब्धता, मल्टीमीडिया तकनीकों के उपयोग और डिजिटल दस्तावेजीकरण से शोधकर्ताओं, विद्यार्थियों तथा आम नागरिकों के लिए सांस्कृतिक संसाधनों तक पहुंच पहले की तुलना में कहीं अधिक आसान और व्यापक हुई है। सरकार का लक्ष्य तकनीक के माध्यम से भारत की सांस्कृतिक धरोहर को संरक्षित करने के साथ-साथ उसे वैश्विक स्तर पर भी सुलभ बनाना है।

