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यूनेस्को की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत सूची में छठ को शामिल कराने की पहल, दिल्ली में लगेगी ‘अर्घ्य’ प्रदर्शनी

नई दिल्ली। बिहार के लोक जीवन, कला और सांस्कृतिक परंपराओं में विशेष स्थान रखने वाले छठ महापर्व को यूनेस्को की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत सूची में शामिल कराने के उद्देश्य से राजधानी दिल्ली में विशेष प्रदर्शनी ‘अर्घ्य’ का आयोजन किया जाएगा। भारतीय सांस्कृतिक निधि (इंटैक) की ओर से आयोजित यह प्रदर्शनी 28 सितंबर से 1 अक्टूबर तक नई दिल्ली स्थित इंटैक मुख्यालय में आयोजित होगी।

इंटैक बिहार के राज्य संयोजक भैरव लाल दास ने बताया कि ‘अर्घ्य’ प्रदर्शनी का शुभारंभ 28 सितंबर को सुबह 11 बजे राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश करेंगे। इस अवसर पर इंटैक के अध्यक्ष अशोक सिंह ठाकुर, सदस्य सचिव रविंद्र सिंह (आईएएस) और क्राफ्ट डिविजन की प्रमुख बिंदु वंदना मनचंदा सहित अन्य गणमान्य लोग उपस्थित रहेंगे।

35 से अधिक लोक कलाकारों की कलाकृतियां होंगी प्रदर्शित

इंटैक बिहार के सह-संयोजक डॉ. शिव कुमार मिश्र ने बताया कि प्रदर्शनी में बिहार के 35 से अधिक लोक कलाकारों को स्थान दिया गया है। कलाकार छठ और सूर्य पूजा से जुड़ी परंपराओं, प्रतीकों और मान्यताओं पर आधारित अपनी कलाकृतियां प्रदर्शित करेंगे।

प्रदर्शनी में मिथिला पेंटिंग, पटना कलम, मंजूषा कला, भोजपुरी कला, सिक्की, पेपरमेशी, टेराकोटा, सुजनी, वैद्यनाथ सहित बिहार के विभिन्न क्षेत्रों की लोकप्रिय लोक कला विधाओं को शामिल किया गया है।

इन कलाकृतियों और शिल्प के माध्यम से छठ महापर्व से जुड़े प्रतीकों, रीति-रिवाजों और सांस्कृतिक मान्यताओं को प्रदर्शित किया जाएगा। आयोजकों का कहना है कि इसका उद्देश्य यह रेखांकित करना है कि लोक कलात्मक परंपराएं किस तरह छठ के सांस्कृतिक महत्व को पीढ़ी-दर-पीढ़ी संरक्षित और आगे बढ़ाती रही हैं।

कलाकारों को काम करते हुए देखने का भी मिलेगा अवसर

प्रदर्शनी की क्यूरेटर मिथिला चित्रकला की चितेरी मनीषा झा और अलका दास ने बताया कि ‘अर्घ्य’ की खासियत केवल तैयार कलाकृतियों का प्रदर्शन नहीं है। यहां आने वाले दर्शकों को कलाकारों को काम करते हुए देखने, उनसे संवाद करने और उनकी कला-निर्माण प्रक्रिया को समझने का अवसर भी मिलेगा।

उन्होंने कहा कि ‘अर्घ्य’ केवल एक प्रदर्शनी नहीं, बल्कि छठ की कला, परंपरा और सांस्कृतिक विरासत को समर्पित एक अर्पण है। यह रीति-रिवाजों और कलात्मक अभिव्यक्तियों के संगम के साथ यह समझने का अवसर भी देती है कि विरासत केवल अतीत की धरोहर नहीं, बल्कि वर्तमान में भी रची, अपनाई और अगली पीढ़ियों तक पहुंचाई जा रही जीवंत परंपरा है।

छठ की ऐतिहासिकता पर होगी विद्वत संगोष्ठी

प्रदर्शनी के दौरान 30 सितंबर को दोपहर 2 बजे छठ महापर्व की ऐतिहासिकता और सांस्कृतिक महत्व पर एक विद्वत संगोष्ठी का भी आयोजन किया जाएगा। इसमें कैलाश कुमार मिश्र, दक्षेस विश्वविद्यालय के प्रो. देवनाथ पाठक, दरभंगा के पर्यावरणविद् प्रो. विद्यानाथ झा, दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रो. राधा माधव भारद्वाज, रिपुंजय ठाकुर और पटना के डॉ. मनोज कुमार अम्बष्ठ सहित अन्य विद्वानों को आमंत्रित किया गया है।

इन कलाकारों की कलाकृतियां होंगी शामिल

प्रदर्शनी में अर्चना सिन्हा, मृणाल सिंह, मनु मीनाक्षी, साधना देवी, मिंकी दास, सविता कुमारी, प्रो. दिनेश कुमार, तृप्ति रानी, संजु दास, निभा लाभ, ममता भारती, संतोष कुमार, रामू कुमार, जीतेन्द्र मोहन, अर्चना चौधरी, विनीता, प्रतीक प्रभाकर, ज्ञानती देवी, चारू वर्मा, सोमा आनंद, मनोज चौधरी, संजय कुमार जायसवाल, अर्चना कुमारी, कंचन, नूतन लाभ, अमृता शांभवी और अन्नु झा समेत 35 से अधिक कलाकारों की कलाकृतियां प्रदर्शित की जाएंगी।

निःशुल्क प्रवेश, सुबह 10:30 से शाम 6 बजे तक खुलेगी प्रदर्शनी

‘अर्घ्य’ प्रदर्शनी इंटैक मुख्यालय, 71 लोधी एस्टेट, के.के. बिड़ला लेन, नई दिल्ली में आयोजित होगी। यह प्रदर्शनी आम दर्शकों के लिए सुबह 10:30 बजे से शाम 6 बजे तक खुली रहेगी। प्रदर्शनी में प्रवेश निःशुल्क रखा गया है।

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