कांग्रेस नेता डीके शिवकुमार ने बुधवार को बेंगलुरु स्थित लोक भवन के ग्लास हाउस में कर्नाटक के 34वें मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली। राज्यपाल थावरचंद गहलोत ने उन्हें पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाई। उनके साथ 13 विधायकों ने भी मंत्री पद की शपथ ग्रहण की, जिनमें कई नेता सिद्धारमैया सरकार में मंत्री रह चुके हैं।
कर्नाटक की राजनीति ने एक बार फिर नया मोड़ लिया है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और संगठनात्मक कौशल के लिए पहचाने जाने वाले डीके शिवकुमार ने राज्य के 34वें मुख्यमंत्री के रूप में शपथ लेकर सत्ता की कमान संभाल ली है। उनके साथ जी. परमेश्वर को उपमुख्यमंत्री बनाया गया है। यह केवल नेतृत्व परिवर्तन नहीं, बल्कि राज्य की राजनीति में नये समीकरणों और नई प्राथमिकताओं की शुरुआत भी माना जा रहा है। डीके शिवकुमार लंबे समय से कर्नाटक कांग्रेस के सबसे प्रभावशाली नेताओं में गिने जाते रहे हैं। संकट के दौर में पार्टी को एकजुट रखने और चुनावी रणनीति को सफल बनाने में उनकी भूमिका महत्वपूर्ण रही है। मुख्यमंत्री पद तक उनका पहुंचना कांग्रेस संगठन में उनकी स्वीकार्यता और राजनीतिक क्षमता का प्रमाण है।
कर्नाटक की राजनीति के जानकारों का मानना है कि शिवकुमार के नेतृत्व में कांग्रेस सरकार विकास, सामाजिक न्याय और क्षेत्रीय संतुलन को प्राथमिकता देने की कोशिश करेगी। किसानों, राज्य में नई सरकार के सामने चुनावी वादों को धरातल पर उतारने की बड़ी चुनौती होगी।
शपथ ग्रहण समारोह में राहुल गांधी, मल्लिकार्जुन खड़गे समेत कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेताओं की मौजूदगी ने यह संकेत दिया कि पार्टी कर्नाटक को राष्ट्रीय राजनीति के लिए एक महत्वपूर्ण मॉडल के रूप में देख रही है। दक्षिण भारत में कांग्रेस की राजनीतिक मजबूती के लिए कर्नाटक का महत्व लगातार बढ़ता जा रहा है। नई सरकार के सामने कई चुनौतियां भी हैं। राज्य की आर्थिक स्थिति, बुनियादी ढांचे का विस्तार, रोजगार सृजन और विभिन्न सामाजिक समूहों की अपेक्षाओं को संतुलित करना आसान नहीं होगा।
राजनीतिक दृष्टि से देखा जाए तो डीके शिवकुमार का मुख्यमंत्री बनना कांग्रेस के लिए केवल सत्ता प्राप्ति नहीं, बल्कि संगठन और सरकार के बीच बेहतर तालमेल स्थापित करने का अवसर भी है। यदि सरकार अपने वादों को प्रभावी ढंग से लागू करने में सफल रहती है, तो इसका असर आगामी चुनावों में राष्ट्रीय स्तर पर भी दिखाई दे सकता है।

