वाराणसी/लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार एवं ग्रामीण विकास मंत्रालय, भारत सरकार के संयुक्त तत्वावधान में आज वाराणसी स्थित रुद्राक्ष इंटरनेशनल कन्वेंशन सेंटर में ‘पंच सम्मेलन’ का भव्य आयोजन किया गया जिसकी अध्यक्षता उत्तर प्रदेश के उप मुख्यमंत्री, श्री केशव प्रसाद मौर्य जी ने की, इस सम्मेलन का उद्देश्य ‘वीबी-जी राम जी अधिनियम, 2025’ के प्रभावी एवं परिणामोन्मुखी क्रियान्वयन के लिए ग्राम पंचायतों की संस्थागत क्षमता को सुदृढ़ करना तथा जमीनी स्तर पर विकास योजनाओं के प्रभावी संचालन के लिए पंचायत प्रतिनिधियों को प्रशिक्षित एवं जागरूक करना था। सम्मेलन में उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड एवं उत्तराखंड के लगभग 500 ग्राम पंचायत प्रधानों ने भाग लिया। इनमें उत्तर प्रदेश से 350, बिहार से 75, झारखंड से 50 तथा उत्तराखंड से 25 ग्राम पंचायत प्रधान सम्मिलित हुए।पंच सम्मेलन के दौरान विभिन्न स्वयं सहायता समूहों द्वारा लगाए गए स्टॉलों एवं प्रदर्शनी का अवलोकन किया तथा महिलाओं द्वारा तैयार किए जा रहे उत्पादों की सराहना की। उन्होंने काशी प्रेरणा कैण्टीन का निरीक्षण करते हुए वहां उपलब्ध कराए जा रहे खाद्य पदार्थों एवं संचालन व्यवस्था की जानकारी प्राप्त की। इसके उपरांत उन्होंने स्वयं सहायता समूह की महिलाओं द्वारा रबर की चप्पलें तैयार करने की पूरी निर्माण प्रक्रिया को विस्तार से देखा और महिलाओं से उत्पादन, विपणन तथा आय के संबंध में जानकारी प्राप्त की। स्वयं सहायता समूह द्वारा संचालित महिला सूट स्टॉल पर भी पहुंचे, जहां उन्होंने महिलाओं द्वारा तैयार किए गए परिधानों की गुणवत्ता की सराहना करते हुए उनके आत्मनिर्भरता के प्रयासों की प्रशंसा की। उन्होंने वाराणसी लाल भरवा मिर्च के स्टॉल का भी निरीक्षण किया तथा उत्पादों की बिक्री, बाजार की मांग और समूह की महिलाओं की बढ़ती आय के विषय में जानकारी ली। उन्होंने कहा कि स्वयं सहायता समूह ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई ऊर्जा प्रदान कर रहे हैं और महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण का सशक्त माध्यम बन रहे हैं।
अपने अध्यक्षीय संबोधन में उप मुख्यमंत्री श्री केशव प्रसाद मौर्य जी ने देश के यशस्वी प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी तथा केंद्रीय ग्रामीण विकास एवं कृषि मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान का हार्दिक आभार व्यक्त करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री के नेतृत्व में ग्रामीण भारत के विकास की नई इबारत लिखी जा रही है। उन्होंने कहा कि वर्षों तक गरीबों की मेहनत की कमाई पर सेंध लगाने वाली व्यवस्थाओं को समाप्त कर गरीबों के हितों की रक्षा करने का ऐतिहासिक कार्य किया गया है। मंच से प्रदेशवासियों से “एक पेड़ माँ के नाम” अभियान से जुड़ने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि प्रत्येक नागरिक अपनी माता के सम्मान में कम से कम एक पौधा अवश्य लगाए तथा उसके संरक्षण का भी संकल्प ले। उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण और आने वाली पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य के लिए यह अभियान जन-आंदोलन का स्वरूप ग्रहण करे, यही हम सबकी जिम्मेदारी है। इस अवसर पर उप मुख्यमंत्री श्री केशव प्रसाद मौर्य ने उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन की पुस्तक का विमोचन भी किया। उन्होंने कहा कि यह प्रकाशन ग्रामीण विकास, महिला सशक्तिकरण और स्वयं सहायता समूहों की सफलताओं को समाज तक पहुंचाने का महत्वपूर्ण माध्यम बनेगा। पीएम गति शक्ति पोर्टल पर गांवों की सड़कें, तालाब, सार्वजनिक परिसंपत्तियां और विकास कार्यों का पूरा विवरण उपलब्ध रहेगा। इससे किसी भी विकास कार्य में दोबारा भुगतान या अनियमितता की संभावना समाप्त होगी और भ्रष्टाचार पर प्रभावी अंकुश लगेगा।
प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी देश के विकास के लिए बिना अवकाश लिए निरंतर कार्य कर रहे हैं, आज विश्व के लगभग 35 देशों ने उन्हें सर्वोच्च नागरिक सम्मान से सम्मानित किया है। यह सम्मान केवल प्रधानमंत्री का नहीं बल्कि 140 करोड़ भारतीयों का सम्मान है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी का स्पष्ट संदेश है— “न खाऊँगा, न खाने दूँगा ।” भ्रष्टाचारियों को उल्टा लटका देंगे , प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र एवं राज्य सरकारें गांव, गरीब, किसान, महिला एवं युवा को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए निरंतर कार्य कर रही हैं। आज ग्राम पंचायतों को केवल प्रशासनिक इकाई नहीं, बल्कि ग्रामीण विकास के सबसे मजबूत स्तंभ के रूप में विकसित किया जा रहा है। उन्होंने ग्राम प्रधानों का आह्वान किया कि वे नई व्यवस्था को पूरी पारदर्शिता, ईमानदारी एवं जनभागीदारी के साथ लागू करें तथा प्रत्येक पात्र परिवार तक योजनाओं का लाभ सुनिश्चित करें।
महिला उद्यमी क्रेडिट कार्ड योजना का उल्लेख करते हुए कहा कि इसके माध्यम से समूह की दीदियों को सीधे 20 हजार रुपये तक का ऋण उपलब्ध कराया जाएगा, जिससे वे अपने स्वरोजगार और लघु उद्योगों का विस्तार कर सकेंगी। डबल इंजन सरकार प्रत्येक गांव में उपलब्ध सरकारी भूमि पर स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं के लिए लघु उत्पादन इकाइयों एवं फैक्टरियों की स्थापना का प्रस्ताव भी ला रही है,
उन्होंने कहा कि वीबी-जी राम जी योजना गरीब, मजदूर एवं ग्रामीण परिवारों के आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में एक क्रांतिकारी पहल है। इस योजना के माध्यम से श्रमिकों की मजदूरी पूर्ण पारदर्शिता के साथ डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (डीबीटी) के जरिए सीधे उनके बैंक खातों में समयबद्ध रूप से पहुंचेगी, जिससे किसी भी प्रकार की बिचौलिया व्यवस्था अथवा भ्रष्टाचार की संभावना समाप्त होगी। उन्होंने कहा कि यह योजना गरीबों के सम्मान, आत्मनिर्भरता एवं आर्थिक सुरक्षा को नई मजबूती प्रदान करेगी। ग्रामीण परिवारों को अब 100 दिनों के स्थान पर 125 दिनों के वैतनिक रोजगार की गारंटी प्रदान की जाएगी, जिससे उनकी आय एवं आजीविका सुरक्षा को और अधिक मजबूती मिलेगी। रोजगार की मांग के लिए आवेदन करने के 15 दिनों के भीतर कार्य उपलब्ध कराना अनिवार्य होगा यदि निर्धारित अवधि में रोजगार उपलब्ध नहीं कराया जाता है, तो संबंधित पात्र व्यक्ति को बेरोजगारी भत्ता प्राप्त करने का कानूनी अधिकार होगा। मजदूरी का भुगतान निर्धारित समयसीमा में न होने की स्थिति में श्रमिकों को विलंबित भुगतान पर 0.05 प्रतिशत की दर से मुआवजा प्रदान किया जाएगा, जिससे समयबद्ध भुगतान सुनिश्चित हो सके। यदि श्रमिकों को अपने गांव से 5 किलोमीटर से अधिक दूरी पर कार्य करना पड़ता है, तो उन्हें निर्धारित मजदूरी के 10 प्रतिशत अतिरिक्त भुगतान किया जाएगा। योजना के अंतर्गत जल सुरक्षा एवं जल संरक्षण से जुड़े कार्यों को प्राथमिकता दी जाएगी, ताकि जल संसाधनों का संरक्षण एवं सतत उपयोग सुनिश्चित हो सके। ग्रामीण बुनियादी ढांचे के विकास से संबंधित कार्यों, जैसे ग्रामीण सड़कें, सार्वजनिक परिसंपत्तियां एवं सामुदायिक सुविधाओं का पक्के निर्माण एवं सुदृढ़ीकरण किया जाएगा। आजीविका संबंधी बुनियादी ढांचे के निर्माण पर विशेष बल दिया जाएगा, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार सृजन, कृषि एवं स्वरोजगार गतिविधियों को बढ़ावा मिल सके। चरम मौसम एवं जलवायु परिवर्तन से बचाव के लिए आवश्यक संरचनाओं एवं संरक्षण कार्यों को भी योजना में शामिल किया गया है, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों की आपदा सहनशीलता एवं पर्यावरणीय सुरक्षा को सुदृढ़ बनाया जा सके।
जीआईजेड (GIZ) द्वारा विकसित ग्राम पंचायत योजना (डीजीपीडीपी) पर तथा प्रदान (PRADAN) द्वारा ग्रामीण आजीविका सुदृढ़ीकरण के सफल मॉडलों पर विस्तृत प्रस्तुति दी गई। वहीं राष्ट्रीय ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज संस्थान (एनआईआरडीपीआर) द्वारा आयोजित विशेष सत्र में ग्राम पंचायत प्रधानों की भूमिका, नेतृत्व क्षमता, सुशासन एवं अधिनियम के प्रभावी क्रियान्वयन पर विस्तार से मार्गदर्शन प्रदान किया गया। नवाचार, जनभागीदारी, पारदर्शिता, सामाजिक उत्तरदायित्व, डिजिटल तकनीकों के उपयोग तथा ग्राम पंचायतों को आत्मनिर्भर एवं सशक्त बनाने के विभिन्न पहलुओं पर विशेषज्ञों एवं पंचायत प्रतिनिधियों के बीच विचारों का आदान-प्रदान भी हुआ।
सम्मेलन में यह विश्वास व्यक्त किया गया कि ‘पंच सम्मेलन’ ग्राम पंचायतों को अधिक सक्षम, सशक्त, पारदर्शी एवं उत्तरदायी बनाने की दिशा में मील का पत्थर सिद्ध होगा। साथ ही ‘विकसित ग्राम–विकसित भारत’ के संकल्प को साकार करने, ग्रामीण विकास कार्यक्रमों के प्रभावी क्रियान्वयन तथा आत्मनिर्भर एवं समृद्ध ग्रामीण भारत के निर्माण में यह सम्मेलन महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
इस अवसर पर केंद्रीय ग्रामीण विकास राज्य मंत्री श्री कमलेश पासवान, उत्तर प्रदेश सरकार के राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री हंसराज विश्वकर्मा, विधान परिषद सदस्य श्री धर्मेन्द्र सिंह, विधायक श्री सौरभ श्रीवास्तव, श्री त्रिभुवन राम, डॉ. सुनील पटेल, ग्राम्य विकास आयुक्त श्री जी.एस. प्रियदर्शी, ग्रामीण विकास विभाग की संयुक्त सचिव सुश्री रोहिणी आर. भाजीभाकरे, जनप्रतिनिधिगण, पार्टी पदाधिकारी, विभिन्न राज्यों से आए बड़ी संख्या में ग्राम पंचायत प्रधान, अधिकारी एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।

