भगवान बिरसा मुंडा जी ने स्वधर्म, स्वसंस्कृति की रक्षा, प्रकृति संरक्षण, एकजुटता और राष्ट्रप्रेम के जो संस्कार जनजातीय समाज में स्थापित किए, उन्हीं पदचिह्नों पर चलते हुए आज आदिवासी समाज विश्व के समक्ष जीवन जीने का सस्टेनेबल मॉडल प्रस्तुत कर रहा है। दिल्ली में आयोजित ‘जनजाति सांस्कृतिक समागम’ में लाखों की संख्या में उपस्थित आदिवासी बहनों-भाइयों को नमन। दिल्ली में देश के कोने-कोने से आए 550 से अधिक जनजातीय समाजों के भाइयों-बहनों के साथ भगवान बिरसा मुंडा जी के 150वें जयंती वर्ष समारोह में संवाद किया। धरती आबा ने उलगुलान आंदोलन के जरिए एक ओर जनजातीय समाज को एकजुट कर मातृभूमि की रक्षा के लिए प्रेरित किया, तो दूसरी ओर उन्हें धर्मांतरण के विरुद्ध भी जागरूक किया। बिरसा भगवान की विरासत इस देश को अनंत काल तक सामाजिक एकता व मातृभूमि की अखंडता के लिए प्रेरित करती रहेगी।


