ईरान और इज़राइल, अप्रत्यक्ष रूप से अमेरिका के जरिए के बीच समझौता फिलहाल मुश्किल नजर आ रहा है। ईरान के राष्ट्रपति मसूद Pezeshkian ने बताया कि बातचीत आगे क्यों नहीं बढ़ पा रही है। उनके मुताबिक, सबसे बड़ी वजह अमेरिका की नीतियां हैं—खासकर ईरानी बंदरगाहों पर जारी नौसैनिक नाकाबंदी।
उन्होंने तीन मुख्य कारण गिनाए:अमेरिका द्वारा किए गए वादों का पालन न करना, ईरानी बंदरगाहों की लगातार नाकाबंदी, बार-बार दी जा रही धमकियां, पेजेशकियान ने यह भी कहा कि ईरान बातचीत के खिलाफ नहीं है, लेकिन मौजूदा हालात में सकारात्मक नतीजे निकलना कठिन है।इसी बीच, ईरान और अमेरिका के बीच पाकिस्तान में होने वाली बातचीत को फिलहाल टाल दिया गया है।
यह फैसला तब आया जब अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने युद्धविराम को आगे बढ़ाने का ऐलान किया। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान की मध्यस्थता में ईरान को प्रस्ताव तैयार करने के लिए और समय दिया गया है।हालांकि युद्धविराम बढ़ने के बावजूद तनाव कम नहीं हुआ है। ईरान ने तीन विदेशी जहाजों—MSC Francesca, Epaminondas और Euphoria—को अपने कब्जे में ले लिया है।
दूसरी ओर, अमेरिका ने भी ईरानी बंदरगाहों के आसपास अपनी नौसैनिक गतिविधियां जारी रखी हैं।व्हाइट हाउस की प्रेस सेक्रेटरी Karoline Leavitt ने स्पष्ट किया कि अमेरिका ने ईरान के प्रस्ताव पर कोई तय समयसीमा नहीं रखी है। अंतिम निर्णय राष्ट्रपति ही करेंगे कि आगे की प्रक्रिया कैसे और कब आगे बढ़ेगी।सबसे बड़ा विवाद फिलहाल होर्मुज जलडमरूमध्य के पास जारी नाकाबंदी को लेकर है।
ट्रंप ने साफ कर दिया है कि यह नाकाबंदी जारी रहेगी और अमेरिकी सेना हर स्थिति के लिए तैयार है।वहीं, संयुक्त राष्ट्र में ईरान के प्रतिनिधि Amir-Saeid Iravani ने संकेत दिया है कि अगर नाकाबंदी हटती है, तो बातचीत दोबारा शुरू हो सकती है।

