पटना। बिहार पुलिस में शामिल होने जा रहे करीब 21 हजार नये सिपाहियों की तैनाती को लेकर पुलिस मुख्यालय ने ऐसी व्यवस्था लागू की है, जिसे राज्य पुलिस व्यवस्था में एक बड़े संरचनात्मक सुधार के रूप में देखा जा रहा है। प्रशिक्षण के अंतिम चरण में पहुंच चुके ये जवान जून के अंत तक विभिन्न जिलों में अपनी जिम्मेदारी संभाल सकते हैं। इससे पहले पुलिस महानिदेशक (DGP) विनय कुमार ने सभी जिला पुलिस अधीक्षकों और पुलिस कप्तानों को स्पष्ट निर्देश जारी करते हुए कहा है कि नये सिपाहियों का शुरुआती पांच वर्षों का कार्यकाल पूरी तरह फील्ड पुलिसिंग के लिए समर्पित रहेगा।
पुलिस मुख्यालय के आदेश के अनुसार इन जवानों को डिस्ट्रिक्ट आर्म्ड पुलिस (DAP) के तहत कानून-व्यवस्था बनाए रखने, गश्त, दंगा नियंत्रण, अपराधियों की धरपकड़ और अन्य सशस्त्र ड्यूटी में लगाया जाएगा। पिछले वर्षों में यह देखा गया था कि भर्ती के कई जवानों को अधिकारियों की सुरक्षा, कार्यालयी कामकाज या विशेष इकाइयों में तैनात कर दिया जाता था, जिसके कारण उन्हें जमीनी पुलिसिंग का पर्याप्त अनुभव नहीं मिल पाता था। इसी अनुभव को ध्यान में रखते हुए पुलिस मुख्यालय ने साफ कर दिया है कि अगले पांच वर्षों तक किसी भी नये सिपाही को किसी अधिकारी का बॉडीगार्ड नहीं बनाया जाएगा और न ही उन्हें कार्यालयों या विशेष शाखाओं में भेजा जाएगा।
बिहार पुलिस के इस निर्णय का एक उद्देश्य राज्य में कानून-व्यवस्था की चुनौतियों से निपटने के लिए जमीनी स्तर पर पुलिस बल को मजबूत करना भी है। राज्य के कई जिलों में लंबे समय से पुलिस बल की कमी महसूस की जा रही थी। कई जगहों पर गश्ती दल और सुरक्षा व्यवस्था के लिए होमगार्ड जवानों पर निर्भरता बढ़ गई थी। डीजीपी ने इस पर असंतोष जताते हुए निर्देश दिया है कि संवेदनशील ड्यूटी, भीड़ नियंत्रण, पेट्रोलिंग और सुरक्षा संबंधी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों में नियमित पुलिस बल को प्राथमिकता दी जाए।
महिलाओं और छात्राओं की सुरक्षा के लिए शुरू की गई ‘पुलिस दीदी’ योजना में भी बदलाव किया गया है। अब नयी महिला सिपाहियों को सीधे इस विशेष इकाई में शामिल नहीं किया जाएगा। पुलिस मुख्यालय का मानना है कि इस जिम्मेदारी के लिए अनुभव और व्यवहारिक समझ जरूरी है, इसलिए कम से कम पांच साल की सेवा पूरी करने के बाद ही महिला पुलिसकर्मी ‘पुलिस दीदी’ टीम का हिस्सा बन सकेंगी। यह टीम स्कूल-कॉलेजों, बाजारों और सार्वजनिक स्थलों पर गश्त कर महिलाओं और छात्राओं को सुरक्षा का भरोसा देती है।
पुलिस मुख्यालय ने डिस्ट्रिक्ट आर्म्ड पुलिस की एक कंपनी का ढांचा भी तय कर दिया है। एक डीएपी कंपनी में कुल 95 पुलिसकर्मी होंगे, जिनमें एक सूबेदार, चार एनसीओ, 18 हवलदार और 72 सिपाही शामिल रहेंगे। इससे जिलों में पुलिस बल के संचालन और कमांड सिस्टम को अधिक व्यवस्थित बनाने में मदद मिलेगी।
पुलिस विशेषज्ञों का मानना है कि यह निर्णय बिहार पुलिस की कार्य संस्कृति में महत्वपूर्ण बदलाव ला सकता है। शुरुआती वर्षों में फील्ड पुलिसिंग का अनुभव मिलने से जवानों की पेशेवर दक्षता बढ़ेगी, अपराध नियंत्रण की क्षमता मजबूत होगी और भविष्य में विशेष इकाइयों में तैनाती के दौरान वे अधिक प्रभावी साबित होंगे। राज्य सरकार पहले से ही पुलिस आधुनिकीकरण, तकनीकी संसाधनों के विस्तार और मानव संसाधन को मजबूत करने पर जोर दे रही है। 21 हजार नये जवानों की तैनाती और उनके लिए बनाए गए नये नियम बिहार पुलिस की कार्यक्षमता बढ़ाने के साथ-साथ आम लोगों की सुरक्षा व्यवस्था को भी अधिक मजबूत बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम हैं।

