Saturday, April 25, 2026
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क्या महंगे होने वाले हैं चाय बिस्कुट?

वैश्विक हालात का असर अब आम लोगों की रोजमर्रा की चीज़ों पर पड़ सकता है। ईरान में तनाव और होर्मुज स्ट्रेट में बाधाओं के कारण भारत पहले ही कच्चे तेल की सप्लाई में कमी महसूस कर रहा है। अब इसके साथ ही पाम ऑयल की उपलब्धता को लेकर भी चिंता बढ़ रही है।

भारत दुनिया में सबसे ज्यादा पाम ऑयल आयात करने वाले देशों में शामिल है। देश में हर साल करीब 9.5 मिलियन टन पाम ऑयल की खपत होती है, जबकि घरेलू उत्पादन बहुत कम, लगभग 4 लाख टन के आसपास है। इसका मतलब है कि भारत अपनी जरूरत का अधिकांश हिस्सा विदेशों से मंगाता है।

पाम ऑयल मुख्य रूप से ताड़ के पेड़ों से निकाला जाता है, जो अधिक बारिश और पानी वाले इलाकों में उगते हैं। दक्षिण-पूर्व एशिया, खासकर इंडोनेशिया और मलेशिया, इसके बड़े उत्पादक हैं और भारत भी इन्हीं देशों से इसका आयात करता है।हालांकि, अब इंडोनेशिया ने अपने यहां पाम ऑयल का इस्तेमाल बढ़ाकर बायोडीजल उत्पादन (B50) पर जोर देना शुरू कर दिया है। इसके चलते वैश्विक बाजार में पाम ऑयल की आपूर्ति कम हो सकती है।

अनुमान है कि इससे हर साल 15 से 20 लाख टन तक की कमी आ सकती है।अगर ऐसा होता है, तो खाने के तेल के साथ-साथ उन उत्पादों की कीमतें भी बढ़ सकती हैं, जिनमें पाम ऑयल का इस्तेमाल होता है—जैसे बिस्कुट, नमकीन और अन्य पैकेज्ड फूड। इसका असर आम उपभोक्ताओं की जेब पर पड़ सकता है।

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