ईरान और अमेरिका के बीच प्रस्तावित शांति वार्ता को लेकर स्थिति उलझी हुई नजर आ रही है। पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में 21 अप्रैल 2026 को बातचीत का दूसरा दौर होने की योजना है, लेकिन ईरान ने इसमें शामिल होने से फिलहाल इनकार कर दिया है।
रिपोर्ट्स के अनुसार, ईरान का कहना है कि जब तक स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में अमेरिका की नौसैनिक नाकेबंदी जारी रहेगी, तब तक वह किसी भी तरह की बातचीत के लिए अपना प्रतिनिधिमंडल नहीं भेजेगा। ईरानी पक्ष इसे अपनी संप्रभुता और आर्थिक हितों पर दबाव बनाने की कोशिश मान रहा है।दूसरी ओर, डोनाल्ड ट्रंप ने पुष्टि की है कि अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल तय कार्यक्रम के अनुसार इस्लामाबाद पहुंचेगा।
इस टीम का नेतृत्व स्टीव विटकॉफ करेंगे, जबकि उनके साथ जेरेड कुशनर भी शामिल रहेंगे। हालांकि, इस बार अमेरिका की उपराष्ट्रपति जेडी वैंस इस वार्ता में हिस्सा नहीं लेंगी।ट्रंप ने एक इंटरव्यू में कड़ा रुख दिखाते हुए चेतावनी दी कि यदि समझौता नहीं होता, तो अमेरिका सख्त कदम उठा सकता है।
उनके बयान से यह साफ है कि दोनों देशों के बीच तनाव अभी भी काफी गहरा है।कुल मिलाकर, ईरान के इस फैसले के पीछे मुख्य वजह अमेरिकी सैन्य दबाव और भरोसे की कमी मानी जा रही है, जिसके चलते बातचीत की प्रक्रिया फिलहाल अधर में लटकती दिखाई दे रही है।

