केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने आज यानी रविवार को वित्त वर्ष 2026-27 का आम बजट संसद में पेश किया। करीब दस साल बाद ऐसा पहली बार हुआ है जब बजट रविवार के दिन प्रस्तुत किया गया। इस बजट में सरकार ने विकास, रोजगार, मैन्युफैक्चरिंग और लोकल इकॉनमी को मजबूत करने पर खास जोर दिया है। बजट में बायोफार्मा, इलेक्ट्रॉनिक्स, एमएसएमई, टूरिज्म और महिला शिक्षा से जुड़े कई बड़े ऐलान किए गए हैं। साथ ही कुछ जरूरी चीजें सस्ती हुई हैं तो कुछ पर खर्च बढ़ सकता है।
देश में 7 हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर विकसित किए जाएंगे, बायोफार्मा सेक्टर को बढ़ावा देने के लिए 10,000 करोड़ रुपये का प्रावधान, बड़े स्तर पर टेक्सटाइल पार्क स्थापित किए जाएंगे, शहरी आर्थिक क्षेत्रों के विकास के लिए हर साल 5,000 करोड़ रुपये खर्च, 20 नए जलमार्गों के निर्माण की योजना, 4 राज्यों में खनिज कॉरिडोर तैयार होंगे, 3 केमिकल पार्क बनाए जाएंगे, एसएमई सेक्टर के लिए 10,000 करोड़ रुपये का समर्थन, महात्मा गांधी स्वरोजगार योजना की घोषणा
क्या-क्या हुआ सस्ता?
कैंसर और डायबिटीज से जुड़ी दवाइयां, 7 दुर्लभ बीमारियों के इलाज में इस्तेमाल होने वाली दवाएं, सोलर एनर्जी से जुड़े उपकरण, चमड़ा और कपड़ा निर्यात से जुड़े उत्पाद, जूते, बैटरी और माइक्रोवेव ओवन, रक्षा क्षेत्र से जुड़े कुछ आयातों पर कस्टम ड्यूटी में राहत
किन चीजों पर बढ़ेगा खर्च?
कुछ सेक्टर्स में कीमतें बढ़ने की संभावना है:खनिज और मिनरल्स, स्क्रैप से जुड़े उत्पाद, शराब, वायदा कारोबार (फ्यूचर्स ट्रेडिंग), रोजगार और टूरिज्म पर खास फोकस, सरकार ने युवाओं के लिए रोजगार के अवसर बढ़ाने और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के उद्देश्य से टूरिज्म सेक्टर को बजट का अहम हिस्सा बनाया है। इसमें स्किल डेवलपमेंट, डिजिटल डॉक्यूमेंटेशन, संस्थागत ढांचा और इको-टूरिज्म को बढ़ावा देने की योजना शामिल है। इससे रोजगार, विदेशी मुद्रा आय और लोकल ग्रोथ को गति मिलने की उम्मीद है।गर्ल्स एजुकेशन को लेकर बड़ा कदम भी उठाया गया है बता दे कि महिला शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने हर जिले में एक लड़कियों का हॉस्टल बनाने का प्रस्ताव रखा है। खासतौर पर STEM और उच्च शिक्षा में पढ़ने वाली छात्राओं को ध्यान में रखते हुए यह योजना लाई गई है, ताकि उन्हें सुरक्षित और सुविधाजनक आवास मिल सके।बजट 2026 में सरकार ने विकास, रोजगार, महिला शिक्षा और आत्मनिर्भर भारत की दिशा में संतुलित कदम उठाने की कोशिश की है। कुछ चीजें सस्ती होकर आम लोगों को राहत देंगी, वहीं कुछ सेक्टर्स में खर्च बढ़ सकता है।

