नई दिल्ली: दक्षिण दिल्ली के साकेत मेट्रो स्टेशन के पास स्थित सैदुलाजाब इलाके में शनिवार शाम ,पांच मंजिला इमारत गिरने से छह लोगों की दर्दनाक मौत हो गई, जबकि नौ लोग घायल हो गए। इस हादसे के बाद अब यह सवाल उठ रहा है कि क्या समय रहते कार्रवाई होती तो इन जानों को बचाया जा सकता था। स्थानीय लोगों और दस्तावेजों से सामने आई जानकारी के अनुसार, इमारत की खतरनाक स्थिति को लेकर पहले ही कई शिकायतें की गई थीं, लेकिन संबंधित विभागों ने समय पर कदम नहीं उठाए।
पहले से दी गई थी चेतावनी
इमारत के पास नाई की दुकान चलाने वाले अब्दुल साकिर ने दावा किया है कि उन्होंने मार्च महीने में ही पुलिस, एमसीडी और जिला प्रशासन को भवन में चल रहे निर्माण कार्य और उसकी जर्जर स्थिति की शिकायत की थी। उनका कहना है कि बेसमेंट में खुदाई और ऊपरी मंजिलों के निर्माण के कारण इमारत झुकने लगी थी और कभी भी गिर सकती थी।
शिकायत के बाद अधिकारियों ने मौके का निरीक्षण किया, लेकिन कथित तौर पर सब कुछ सामान्य बताकर मामला बंद कर दिया गया। साकिर को एमसीडी की ओर से शिकायत दर्ज होने का संदेश भी मिला था, लेकिन बाद में बिना ठोस कार्रवाई के शिकायत बंद कर दी गई।
हाई कोर्ट तक पहुंचा मामला
स्थानीय निवासी ने मामले को गंभीर मानते हुए हाई कोर्ट में भी याचिका दायर की थी। याचिका में स्पष्ट रूप से कहा गया था कि भवन की स्थिति खतरनाक है और किसी भी समय बड़ा हादसा हो सकता है। आरोप है कि एमसीडी ने अदालत में जवाब देते हुए कहा था कि मौके पर कोई निर्माण कार्य नहीं चल रहा है।
अब हादसे के बाद यही जवाब सवालों के घेरे में है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि शिकायतों और चेतावनियों को गंभीरता से लिया जाता, तो यह त्रासदी टाली जा सकती थी।
कैंटीन पर गिरी इमारत, छह लोगों की मौत
शनिवार शाम करीब 7:35 बजे इमारत अचानक भरभराकर गिर गई। मलबा पास स्थित एक कैंटीन पर आ गिरा, जहां कई छात्र और अन्य लोग खाना खा रहे थे। हादसे में कैंटीन संचालिका समेत छह लोगों की मौत हो गई, जबकि नौ लोग घायल हुए। घटना के बाद पुलिस, एनडीआरएफ और सिविल डिफेंस की टीमों ने राहत और बचाव अभियान शुरू किया, जो कई घंटों तक चलता रहा।
एमसीडी मेयर ने स्वीकार की लापरवाही
हादसे के बाद एमसीडी मेयर प्रवेश वाही ने माना कि मामले में अधिकारियों की ओर से लापरवाही हुई है। उन्होंने साकेत और आसपास के इलाकों में खतरनाक इमारतों की जांच के आदेश दिए हैं। साथ ही लापरवाही के आरोप में दो जूनियर इंजीनियरों को निलंबित कर दिया गया है।
वहीं, मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने घटनास्थल का दौरा कर दोषी अधिकारियों और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का आश्वासन दिया है।
जवाबदेही पर उठ रहे सवाल
इस हादसे ने एक बार फिर दिल्ली में अवैध निर्माण और भवन सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि शिकायतों पर समय रहते कार्रवाई की जाती, तो छह लोगों की जान बचाई जा सकती थी। अब सभी की नजर इस बात पर है कि जांच में किसकी जिम्मेदारी तय होती है और दोषियों के खिलाफ क्या कार्रवाई की जाती है।

