नई दिल्ली। छात्रों के मुद्दों, नीट (NEET) परीक्षा और हालिया विरोध-प्रदर्शनों को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। भाजपा नेताओं ने जहां केंद्र सरकार की कार्रवाई का बचाव करते हुए विपक्ष पर छात्रों के मुद्दों का राजनीतिकरण करने का आरोप लगाया, वहीं कांग्रेस ने शिक्षा व्यवस्था में सुधार और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग दोहराई।
भाजपा सांसद बांसुरी स्वराज ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देश के युवाओं को राष्ट्र का निर्माता मानते हैं और मोदी सरकार छात्रों के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता देती है। उन्होंने कहा कि NEET पेपर लीक मामले में सरकार ने त्वरित कार्रवाई करते हुए 13 आरोपियों को गिरफ्तार किया, जो अब भी हिरासत में हैं। उनके अनुसार, केवल 37 दिनों के भीतर दोबारा परीक्षा आयोजित कराई गई, जिसमें लगभग 20 लाख विद्यार्थियों ने भाग लिया। उन्होंने विपक्ष के इस आरोप को खारिज किया कि देश की शिक्षा व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त हो चुकी है।
भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव तरुण चुघ ने विपक्ष पर छात्रों की समस्याओं को राजनीतिक लाभ के लिए इस्तेमाल करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि देशभर में जनता में आक्रोश है, लेकिन विपक्ष समाधान निकालने के बजाय राजनीतिक रोटियां सेंकने में लगा है। उन्होंने प्रधानमंत्री आवास को विरोध-प्रदर्शन का निशाना बनाए जाने को दुर्भाग्यपूर्ण और निंदनीय बताया।
वहीं, कांग्रेस सांसद दीपेंद्र हुड्डा ने कहा कि जब तक केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा नहीं होता और शिक्षा प्रणाली में व्यापक सुधारों पर संसद में चर्चा नहीं होती, तब तक उनका विरोध-प्रदर्शन जारी रहेगा। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने युवाओं की आवाज को बलपूर्वक दबाने का प्रयास किया है, जिसे स्वीकार नहीं किया जाएगा।
इस बीच भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने कांग्रेस और गांधी परिवार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि आपातकाल के दौरान हजारों युवाओं की मौत हुई थी, लेकिन उस समय उनकी खबरें सामने नहीं आईं। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस देशविरोधी ताकतों के साथ मिलकर देश को कमजोर करने की राजनीति कर रही है।
केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने भी लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के प्रदर्शन पर कड़ी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने आरोप लगाया कि संवैधानिक पद पर रहते हुए राहुल गांधी का आचरण संविधान की गरिमा के अनुरूप नहीं है। गिरिराज सिंह ने उनके व्यवहार को लोकतांत्रिक मर्यादाओं के विरुद्ध बताते हुए उनके खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की मांग की।
छात्रों के मुद्दों, शिक्षा व्यवस्था और विरोध-प्रदर्शनों को लेकर राजनीतिक दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर लगातार तेज होता जा रहा है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर संसद और देश की राजनीति में बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है।

