नई दिल्ली। संसद का मानसून सत्र सोमवार से शुरू होने जा रहा है। सत्र के पहले ही दिन सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस और टकराव के आसार हैं। रविवार को लोकसभा अध्यक्ष की अध्यक्षता में हुई बिजनेस एडवाइजरी कमेटी (BAC) की बैठक में विभिन्न विधेयकों पर चर्चा के लिए समय निर्धारित किया गया। सरकार इस सत्र में छह महत्वपूर्ण विधेयक पेश करेगी, जबकि विपक्ष भी कई मुद्दों को लेकर सरकार को घेरने की तैयारी में है।
मानसून सत्र के दौरान विदेशी अंशदान विनियमन अधिनियम (FCRA) संशोधन विधेयक, 2026 पर चर्चा होगी। सरकार का कहना है कि इस संशोधन का उद्देश्य विदेश से प्राप्त होने वाले फंड की निगरानी, पारदर्शिता और जवाबदेही को मजबूत करना है। इस विधेयक पर लोकसभा में चार घंटे चर्चा का समय निर्धारित किया गया है।
इसी तरह आयकर (संशोधन) विधेयक, 2026 भी सदन में पेश किया जाएगा। सरकार के अनुसार, यह विधेयक देश के सॉवरेन डेट मार्केट को मजबूत करने और विदेशी निवेश को आकर्षित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। इससे वित्तीय बाजार में तरलता बढ़ाने और वैश्विक आर्थिक चुनौतियों के बीच भारत की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलने की उम्मीद जताई गई है।
न्यायिक व्यवस्था को मजबूत बनाने के उद्देश्य से सरकार सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीशों की संख्या बढ़ाने संबंधी विधेयक भी लाएगी। इसके तहत भारत के मुख्य न्यायाधीश को छोड़कर सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की संख्या 33 से बढ़ाकर 37 करने का प्रस्ताव है। सरकार का मानना है कि इससे लंबित मामलों के शीघ्र निपटारे में मदद मिलेगी।
इसके अलावा जन्म एवं मृत्यु पंजीकरण (संशोधन) विधेयक भी चर्चा के लिए सूचीबद्ध है। सरकार का उद्देश्य जन्म और मृत्यु के विलंबित पंजीकरण की प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित, पारदर्शी और विश्वसनीय बनाना है।
मानसून सत्र का एक प्रमुख विधेयक राष्ट्रीय सम्मान के अपमान की रोकथाम (संशोधन) विधेयक भी होगा। इस संशोधन के माध्यम से राष्ट्रीय ध्वज, राष्ट्रगान और अन्य राष्ट्रीय प्रतीकों के अपमान से जुड़े मामलों में दंड के प्रावधानों को और अधिक सख्त बनाने का प्रस्ताव है। इस विधेयक को लेकर विपक्ष पहले दिन से ही सरकार को घेरने की रणनीति बना रहा है।
वहीं सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (MSME) विकास (संशोधन) विधेयक पर सबसे अधिक पांच घंटे चर्चा का समय निर्धारित किया गया है। इस विधेयक का उद्देश्य कारोबार को और सुगम बनाना, एमएसएमई क्षेत्र में भुगतान में देरी की समस्या का समाधान करना तथा राज्यों की भूमिका को अधिक सशक्त बनाना है।
संसद के इस मानसून सत्र में इन विधेयकों के अलावा नीट परीक्षा विवाद, सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक का मुद्दा, तृणमूल कांग्रेस सांसदों की मान्यता, शिवसेना सांसदों के विलय और अन्य राजनीतिक विषयों पर भी विपक्ष सरकार से जवाब मांगने की तैयारी में है। ऐसे में पूरे सत्र के दौरान तीखी बहस और राजनीतिक गर्माहट देखने की संभावना है।

