नई दिल्ली। अंतरराष्ट्रीय योग दिवस (आईडीवाई) 2026 का आयोजन 21 जून को देश और दुनिया भर में उत्साह के साथ किया जाएगा। इस वर्ष की थीम ‘स्वस्थ आयु के लिए योग’ रखी गई है, जिसका उद्देश्य लोगों को केवल लंबा जीवन ही नहीं, बल्कि स्वस्थ, सक्रिय और संतुलित जीवन जीने के लिए प्रेरित करना है। इस बार 12वें अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के मुख्य राष्ट्रीय कार्यक्रम की मेजबानी कोलकाता करेगा।
अंतरराष्ट्रीय योग दिवस की शुरुआत वर्ष 2015 में हुई थी। संयुक्त राष्ट्र महासभा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रस्ताव पर 21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के रूप में मान्यता दी थी, जिसे 175 देशों का समर्थन प्राप्त हुआ था। आज यह आयोजन 190 से अधिक देशों में मनाया जाता है और दुनिया के सबसे बड़े जन-भागीदारी आधारित स्वास्थ्य आंदोलनों में शामिल हो चुका है।
भारत की प्राचीन धरोहर बना वैश्विक आंदोलन
योग की परंपरा हजारों वर्षों पुरानी है और इसकी जड़ें सिंधु-सरस्वती सभ्यता तक पहुंचती हैं। वेदों, उपनिषदों, महाभारत, रामायण तथा बौद्ध और जैन परंपराओं में योग का उल्लेख मिलता है। महर्षि पतंजलि ने योग सूत्रों के माध्यम से इसकी व्यवस्थित दार्शनिक और व्यावहारिक संरचना प्रस्तुत की। वर्ष 2016 में यूनेस्को ने योग को मानवता की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत की प्रतिनिधि सूची में शामिल किया था।
‘कॉमन योग प्रोटोकॉल’ बना वैश्विक पहचान का आधार
अंतरराष्ट्रीय योग दिवस को एक समान स्वरूप में मनाने के लिए आयुष मंत्रालय ने वर्ष 2015 में ‘कॉमन योग प्रोटोकॉल’ (सीवाईपी) तैयार किया। 45 मिनट के इस मानक योग सत्र में योगासन, प्राणायाम, ध्यान और विश्राम तकनीकों को शामिल किया गया है। इस वर्ष संस्थानों को आवश्यकता अनुसार अतिरिक्त 15 मिनट तक योग निद्रा, ध्यान और सत्संग जैसी गतिविधियों को जोड़ने की छूट दी गई है।
स्वस्थ जीवनशैली पर विशेष जोर
वर्ष 2026 की थीम ‘स्वस्थ आयु के लिए योग’ के तहत गैर-संचारी रोगों और बढ़ती उम्र से जुड़ी स्वास्थ्य चुनौतियों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि योग शरीर की लचीलापन, मानसिक स्वास्थ्य, श्वसन क्षमता और भावनात्मक संतुलन को बेहतर बनाने में सहायक है। ताड़ासन, त्रिकोणासन, भुजंगासन और अनुलोम-विलोम जैसे अभ्यास स्वस्थ जीवनशैली को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
देशभर में चल रहे हैं विशेष अभियान
योग दिवस 2026 की तैयारियां मार्च से ही शुरू हो गई थीं। नई दिल्ली, महाराष्ट्र के लोनार, हैदराबाद के कान्हा शांति वनम और खजुराहो जैसे स्थानों पर काउंटडाउन कार्यक्रम आयोजित किए गए। 14 जून को आयोजित विशेष लाइव योग सत्र में चार लाख से अधिक लोगों ने भाग लेकर नया गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाया।
सरकार ने ‘100 दिन, 100 शहर, 100 संगठन’ अभियान के साथ-साथ ‘योग 365’ पहल भी शुरू की है, जिसका उद्देश्य योग को एक दिन के आयोजन तक सीमित न रखकर लोगों की दैनिक जीवनशैली का हिस्सा बनाना है।
नई पहलों से बढ़ेगी पहुंच
इस वर्ष ‘योग फॉर एयर ट्रैवल’ जैसी नई पहल शुरू की गई है, जिसे लंबी दूरी की यात्रा करने वाले यात्रियों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। इसके अलावा मधुमेह, उच्च रक्तचाप, अस्थमा और मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के लिए विशेष ‘10 योग प्रोटोकॉल’ विकसित किए गए हैं। बच्चों, बुजुर्गों, महिलाओं और नशा मुक्ति की प्रक्रिया से गुजर रहे लोगों के लिए भी अलग-अलग मॉड्यूल तैयार किए गए हैं।
दुनिया भर में बढ़ रही लोकप्रियता
पिछले एक दशक में अंतरराष्ट्रीय योग दिवस वैश्विक स्तर पर स्वास्थ्य और कल्याण का प्रतीक बन चुका है। न्यूयॉर्क स्थित संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय, जापान, दक्षिण अफ्रीका, ब्राजील, सऊदी अरब, ओमान, श्रीलंका और कई अन्य देशों में हर वर्ष बड़े पैमाने पर योग कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। वर्ष 2026 में भारतीय दूतावासों और सांस्कृतिक केंद्रों के सहयोग से दुनिया भर के लगभग 2,500 स्थानों पर योग दिवस कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
एक दिन नहीं, जीवनशैली का हिस्सा बन रहा योग
अंतरराष्ट्रीय योग दिवस 2026 का संदेश स्पष्ट है कि योग केवल 21 जून तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि इसे साल के 365 दिनों तक जीवन का हिस्सा बनाया जाना चाहिए। सरकार, शैक्षणिक संस्थानों, कॉर्पोरेट संगठनों और समाज के विभिन्न वर्गों की भागीदारी के साथ योग अब एक व्यापक जन-आंदोलन का स्वरूप ले चुका है, जो स्वस्थ और संतुलित जीवन की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

