HomePolticalपश्चिमी यूपी में सियासी समीकरणों पर नजर, 16 अक्टूबर को राज्यसभा की...

पश्चिमी यूपी में सियासी समीकरणों पर नजर, 16 अक्टूबर को राज्यसभा की 10 सीटों के लिए चुनाव

नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले राज्यसभा की 10 सीटों के लिए होने वाले चुनाव ने सियासी हलचल बढ़ा दी है। निर्वाचन आयोग के कार्यक्रम के मुताबिक, यूपी की 10 और उत्तराखंड की एक राज्यसभा सीट के लिए 16 अक्टूबर 2026 को मतदान होगा। उसी दिन मतगणना भी होगी। यूपी में मौजूदा 10 सीटों में से आठ भाजपा, एक सपा और एक बसपा के पास है।

राज्यसभा चुनाव की घोषणा के साथ ही भाजपा के संभावित प्रत्याशियों को लेकर राजनीतिक चर्चाएं तेज हो गई हैं। पश्चिमी उत्तर प्रदेश से पूर्व केंद्रीय राज्यमंत्री डॉ. संजीव बालियान और पूर्व मंत्री सुरेश राणा के नाम भी राजनीतिक हलकों में चर्चा में बताए जा रहे हैं। हालांकि, भाजपा की ओर से इन नामों पर अभी कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है।

जाट चेहरे के तौर पर संजीव बालियान की चर्चा

पश्चिमी यूपी की राजनीति में डॉ. संजीव बालियान को भाजपा के प्रमुख जाट चेहरों में गिना जाता है। वह 2014 और 2019 में मुजफ्फरनगर से लोकसभा चुनाव जीत चुके हैं और केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार में मंत्री भी रहे हैं।

हालांकि, 2024 के लोकसभा चुनाव में उन्हें समाजवादी पार्टी के हरेंद्र मलिक के हाथों करीब 25 हजार मतों से हार का सामना करना पड़ा था। इसके बावजूद पश्चिमी यूपी में भाजपा के जाट नेतृत्व के संदर्भ में उनका नाम राजनीतिक चर्चाओं में बना रहा है।

भाजपा-रालोद गठबंधन से जाट समीकरण अहम

भाजपा और राष्ट्रीय लोकदल के गठबंधन के बाद पश्चिमी यूपी के जाट समीकरण को लेकर राजनीतिक चर्चा और महत्वपूर्ण हो गई है। 2024 के लोकसभा चुनाव में रालोद ने भाजपा के साथ मिलकर चुनाव लड़ा था और जयंत चौधरी केंद्र सरकार में मंत्री हैं।

इसी राजनीतिक संदर्भ में संजीव बालियान के संभावित राज्यसभा उम्मीदवार होने की चर्चा को देखा जा रहा है। हालांकि, इसे लेकर अभी पार्टी की ओर से कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

बालियान बोले—पार्टी का फैसला स्वीकार होगा

राज्यसभा जाने की चर्चाओं पर डॉ. संजीव बालियान ने कोई दावा नहीं किया है। उनका कहना है कि प्रत्याशी का चयन पार्टी हाईकमान का विषय है और पार्टी स्तर पर जो भी निर्णय होगा, वह उसे स्वीकार करेंगे।

उन्होंने पश्चिमी उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर भाजपा की तैयारियों का भी जिक्र किया है।

सुरेश राणा का नाम भी चर्चा में

पश्चिमी यूपी से पूर्व विधायक और पूर्व गन्ना विकास एवं चीनी उद्योग मंत्री सुरेश राणा का नाम भी संभावित उम्मीदवारों की चर्चा में है। राणा थानाभवन से दो बार विधायक रहे और 2017 में योगी आदित्यनाथ सरकार में गन्ना विकास एवं चीनी उद्योग विभाग के मंत्री बने थे।

ऐसे में यदि भाजपा पश्चिमी यूपी से किसी नेता को राज्यसभा भेजती है, तो राजनीतिक चर्चाओं में जाट और राजपूत—दोनों सामाजिक समीकरणों का उल्लेख हो रहा है। हालांकि अंतिम फैसला भाजपा का केंद्रीय नेतृत्व करेगा।

2024 के बाद पश्चिमी यूपी में बदला चुनावी परिदृश्य

2024 के लोकसभा चुनाव में पश्चिमी यूपी में भाजपा के प्रदर्शन में 2019 की तुलना में बदलाव देखने को मिला। क्षेत्र की 19 लोकसभा सीटों में भाजपा ने 10 और रालोद ने दो सीटें जीतीं, जबकि 2019 में भाजपा के खाते में 12 सीटें थीं।

ऐसे में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले पश्चिमी उत्तर प्रदेश के राजनीतिक और सामाजिक समीकरणों को लेकर सभी प्रमुख दलों की रणनीति पर नजर है। राज्यसभा चुनाव इसी व्यापक राजनीतिक प्रक्रिया का एक महत्वपूर्ण पड़ाव है।

फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि भाजपा पश्चिमी यूपी से किस चेहरे को राज्यसभा भेजती है। इसका जवाब पार्टी के आधिकारिक उम्मीदवारों की घोषणा के बाद ही स्पष्ट होगा।

चुनावी कार्यक्रम: 29 सितंबर को अधिसूचना, 6 अक्टूबर नामांकन की अंतिम तारीख, 7 अक्टूबर नामांकन पत्रों की जांच, 9 अक्टूबर नाम वापसी की अंतिम तारीख और 16 अक्टूबर को मतदान व मतगणना होगी।

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisment -

Most Popular

Recent Comments