भारत और अमेरिका के बीच हुए अंतरिम व्यापार समझौते को लेकर कांग्रेस ने केंद्र सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। पार्टी प्रवक्ता पवन खेड़ा ने इस समझौते को देश के हितों के खिलाफ बताते हुए कहा कि इससे भारत की आर्थिक प्राथमिकताओं और आत्मसम्मान को नुकसान पहुंचा है।
क्या बोली कॉंग्रेस?
शनिवार को बयान जारी करते हुए खेड़ा ने मौजूदा सरकार की विदेश नीति की तुलना पूर्व सरकारों से की। उन्होंने कहा कि पहले भारत वैश्विक ताकतों के साथ बराबरी के स्तर पर संवाद करता था, लेकिन अब वह आत्मविश्वास कहीं खोता हुआ दिखाई देता है। कांग्रेस नेता ने पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति रिचर्ड निक्सन, जॉर्ज बुश और बराक ओबामा का उल्लेख करते हुए कहा कि उन दौरों में भारतीय नेतृत्व ने अमेरिका के साथ मजबूती से रिश्ते निभाए थे।पवन खेड़ा ने सवाल उठाया कि वह भारत आज कहां है जो कभी विश्व शक्तियों से आंखों में आंखें डालकर बातचीत करता था। उन्होंने आरोप लगाया कि मौजूदा दौर में आम भारतीयों के हितों को नजरअंदाज कर चुनिंदा उद्योगपतियों के फायदे को प्राथमिकता दी जा रही है। उनके मुताबिक यह समझौता अमेरिका के साथ नहीं, बल्कि भारत के आत्मसम्मान के साथ किया गया समझौता है।कांग्रेस प्रवक्ता ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, विदेश मंत्री एस. जयशंकर और वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि सरकार इस व्यापारिक फ्रेमवर्क को उपलब्धि के तौर पर पेश कर रही है, जबकि सच्चाई कुछ और ही है। खेड़ा ने इसे “डील नहीं बल्कि समर्पण” करार दिया।उन्होंने यह आरोप भी लगाया कि इस मुद्दे पर संसद में खुली चर्चा से जानबूझकर बचा जा रहा है। पवन खेड़ा का दावा है कि विपक्ष के नेता राहुल गांधी को कई बार इस विषय पर बोलने से रोका गया। उनके अनुसार सरकार को डर है कि अगर बहस हुई तो समझौते की वास्तविक शर्तें जनता के सामने आ जाएंगी।खेड़ा ने आगे कहा कि सरकार ने कुछ अस्पष्ट और गोपनीय शर्तों के तहत भारत की सौदेबाजी की ताकत को कमजोर किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि भारत के हितों को वॉशिंगटन के सामने गिरवी रखने जैसा व्यवहार किया गया है।कांग्रेस का कहना है कि संसद में बहस से बचना इस बात का संकेत है कि सरकार खुद इस समझौते को लेकर पूरी तरह आश्वस्त नहीं है और उसे इसके राजनीतिक और सार्वजनिक असर का डर सता रहा है।

