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टीएमसी में गहराया संकट: हस्ताक्षर जालसाजी मामले में पार्टी के शीर्ष नेतृत्व तक पहुंची जांच

पश्चिम बंगाल की राजनीति में हलचल मचाने वाले कथित हस्ताक्षर जालसाजी मामले की जांच अब तृणमूल कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व के करीब पहुंच गई है। मंगलवार को पश्चिम बंगाल सीआईडी की टीम कोलकाता के कालीघाट स्थित उस तृणमूल कांग्रेस कार्यालय पहुंची, जो ममता बनर्जी के आवास के निकट स्थित है। इसी दौरान एक अन्य टीम अभिषेक बनर्जी के कैमैक स्ट्रीट स्थित कार्यालय भी पहुंची। विवाद की शुरुआत उस प्रस्ताव पत्र से हुई, जिसे 19 मई को पश्चिम बंगाल विधानसभा सचिवालय को भेजा गया था। इस प्रस्ताव में सोभनदेब चट्टोपाध्याय को विधानसभा में विपक्ष का नेता, नयना बंद्योपाध्याय और असीमा पात्रा को उपनेता तथा फिरहाद हकीम को मुख्य सचेतक (चीफ व्हिप) नियुक्त करने की सिफारिश की गई थी। बाद में दो विधायकों ने आरोप लगाया कि इस प्रस्ताव पर कई विधायकों के हस्ताक्षर फर्जी तरीके से किए गए हैं। शिकायत मिलने के बाद विधानसभा सचिवालय की ओर से एफआईआर दर्ज कराई गई और जांच सीआईडी को सौंप दी गई।

जांच एजेंसी का मानना है कि जिस बैठक में संबंधित प्रस्ताव को अंतिम रूप दिया गया था, वह कालीघाट स्थित पार्टी कार्यालय में हुई थी। इसी कारण सीआईडी यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि उस दिन वहां कौन-कौन मौजूद था, दस्तावेजों पर हस्ताक्षर किस परिस्थिति में हुए और क्या किसी स्तर पर जालसाजी की गई। जांच के दौरान अधिकारियों ने कार्यालय के सीसीटीवी फुटेज और अन्य रिकॉर्ड भी अपने कब्जे में लेने का प्रयास किया। सीआईडी टीम के पहुंचने पर शुरू में पार्टी कार्यालय में प्रवेश को लेकर विवाद खड़ा हो गया। तृणमूल के पूर्व सांसद और पार्टी कोषाध्यक्ष शुभाशीष चक्रवर्ती ने कहा कि ममता बनर्जी और पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी दिल्ली में हैं और उनकी अनुपस्थिति में बिना अनुमति किसी को अंदर नहीं जाने दिया जा सकता। हालांकि, सीआईडी अधिकारियों ने कानूनी नोटिस दिखाते हुए तलाशी की आवश्यकता बताई। लगभग एक घंटे की बहस के बाद जांच दल को कार्यालय के भीतर प्रवेश की अनुमति मिल गई। इस मामले में अभिषेक बनर्जी की भूमिका भी जांच के दायरे में है, क्योंकि आरोपित प्रस्ताव पत्र विधानसभा अध्यक्ष को उन्हीं की ओर से भेजा गया था। सीआईडी अब तक उन्हें तीन बार समन भेज चुकी है। उन्होंने पहले स्वास्थ्य कारणों और बाद में राजनीतिक व्यस्तताओं का हवाला देते हुए अतिरिक्त समय मांगा। उनकी कानूनी टीम ने समन की वैधता को लेकर कलकत्ता हाईकोर्ट का दरवाजा भी खटखटाया है और किसी कठोर कार्रवाई से संरक्षण की मांग की है।

सीआईडी अब तक कई विधायकों के बयान दर्ज कर चुकी है। कोलकाता के मेयर और वरिष्ठ टीएमसी नेता फिरहाद हकीम से भी पूछताछ की गई और उनके हस्ताक्षर के नमूने लिए गए। नयना बंद्योपाध्याय समेत अन्य नेताओं से भी एजेंसी ने संपर्क किया है। जांच अधिकारी दस्तावेजों, हस्ताक्षरों और डिजिटल साक्ष्यों का मिलान कर रहे हैं। लोकसभा चुनाव के बाद पार्टी के भीतर असंतोष और नेतृत्व को लेकर उठ रहे सवालों के बीच यह मामला तृणमूल कांग्रेस के लिए राजनीतिक रूप से संवेदनशील माना जा रहा है। सीआईडी की कार्रवाई ऐसे समय में हुई है जब ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी दिल्ली में विपक्षी दलों की बैठकों में भाग लेने पहुंचे थे। विपक्ष इस पूरे मामले को टीएमसी के अंदरूनी संकट और संगठनात्मक अव्यवस्था से जोड़कर देख रहा है, जबकि तृणमूल कांग्रेस इसे राजनीतिक प्रतिशोध की कार्रवाई बता रही है।

फिलहाल सीआईडी ने तलाशी के दौरान मिली सामग्री या जांच के निष्कर्षों को लेकर कोईफिलहाल सीआईडी ने तलाशी के दौरान मिली सामग्री या जांच के निष्कर्षों को लेकर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है। लेकिन कालीघाट और कैमैक स्ट्रीट स्थित कार्यालयों तक जांच का पहुंचना इस बात का संकेत है कि एजेंसी अब मामले की तह तक जाने के लिए दस्तावेजी और डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर आगे बढ़ रही है।

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