कोलकाता: पश्चिम बंगाल की राजनीति में इन दिनों एक नई चर्चा ने जोर पकड़ लिया है। सूत्रों के हवाले से ऐसी खबरें सामने आई हैं कि कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी ने तृणमूल कांग्रेस प्रमुख और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से संपर्क कर दोनों दलों के बीच बड़े राजनीतिक तालमेल, विलय के विकल्प पर भी बातचीत की है। हालांकि, दोनों पार्टियों की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है।
सूत्रों के मुताबिक, सोनिया गांधी का मानना है कि राष्ट्रीय स्तर पर विपक्षी दलों के बिखराव का फायदा भाजपा को मिल रहा है। ऐसे में यदि कांग्रेस और तृणमूल कांग्रेस एक साझा राजनीतिक ढांचे के तहत साथ आते हैं तो विपक्ष की ताकत को नया आधार मिल सकता है। बताया जा रहा है कि ममता बनर्जी ने इस प्रस्ताव पर तत्काल प्रतिक्रिया देने के बजाय कुछ समय मांगा है।
टीएमसी में अंदरूनी चुनौतियों के बीच तेज हुई अटकलें
यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब तृणमूल कांग्रेस को पार्टी के भीतर असंतोष और कुछ नेताओं के अलग रुख जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। संगठन के भविष्य और नेतृत्व को लेकर भी समय-समय पर सवाल उठते रहे हैं।
राहुल गांधी और अभिषेक बनर्जी की मुलाकात बनी चर्चा का विषय
हाल ही में कांग्रेस सांसद राहुल गांधी और टीएमसी महासचिव अभिषेक बनर्जी के बीच हुई लंबी बैठक को भी इसी संदर्भ में देखा जा रहा है। दोनों नेताओं के बीच मौजूदा राजनीतिक हालात और पश्चिम बंगाल के चुनावी समीकरणों पर विस्तार से बातचीत हुई। इस मुलाकात के बाद विपक्षी खेमे में संभावित नए समीकरणों को लेकर कयास और तेज हो गए हैं।
क्या टीएमसी अपनी अलग पहचान छोड़ने को तैयार होगी
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि तृणमूल कांग्रेस का कांग्रेस में विलय महज संगठनात्मक फैसला नहीं होगा। ममता बनर्जी ने करीब तीन दशक पहले कांग्रेस से अलग होकर अपनी पार्टी बनाई थी और बंगाल में एक मजबूत क्षेत्रीय शक्ति के रूप में स्थापित किया। ऐसे में पार्टी की स्वतंत्र पहचान को खत्म करने जैसा कोई भी कदम आसान नहीं माना जा रहा है।
फिलहाल सामने आई सारी जानकारी सूत्रों पर आधारित है और न तो कांग्रेस और न ही तृणमूल कांग्रेस ने इन खबरों की पुष्टि की है। लेकिन अगर आने वाले दिनों में इस दिशा में कोई ठोस पहल होती है तो यह सिर्फ पश्चिम बंगाल ही नहीं, बल्कि राष्ट्रीय राजनीति के लिए भी एक बड़ा घटनाक्रम साबित हो सकता है।

