मध्य पूर्व के संघर्षों में कुर्द महिला लड़ाकों ने एक अलग पहचान बनाई है। Women’s Protection Units (YPJ) के नाम से जानी जाने वाली ये महिलाएं न सिर्फ हथियारों के साथ मोर्चे पर उतरीं, बल्कि उन्होंने दुश्मनों के मनोबल को भी तोड़ने में अहम भूमिका निभाई।
Islamic State के कई लड़ाकों के बीच यह धारणा प्रचलित थी कि अगर वे किसी महिला के हाथों मारे जाते हैं, तो उन्हें जन्नत नहीं मिलेगी। इस मानसिकता ने कुर्द महिला लड़ाकों को एक मनोवैज्ञानिक बढ़त दिलाई। युद्ध के दौरान वे अक्सर जोरदार नारे लगाकर अपनी मौजूदगी जताती थीं, जिससे दुश्मन पर दबाव बनता था।इन महिला लड़ाकों को केवल प्रतीकात्मक शक्ति समझना गलत होगा। वे पूरी तरह प्रशिक्षित सैनिक हैं और कठिन से कठिन हालात में लड़ने में सक्षम हैं।
स्नाइपर के रूप में सटीक हमले करनादुश्मन के ठिकानों को निशाना बनानाशहरी युद्ध (Urban Combat) में सक्रिय भूमिका निभानाKobani और Raqqa जैसे शहरों में हुई भीषण लड़ाइयों में इन महिला लड़ाकों ने फ्रंटलाइन पर रहकर मुकाबला किया। इन्होंने इमारत-दर-इमारत और गली-दर-गली लड़ाई लड़ते हुए ISIS को पीछे धकेला।यह सिर्फ युद्ध नहीं, विचारधारा की लड़ाई भीयह संघर्ष केवल हथियारों तक सीमित नहीं था। एक तरफ ISIS जैसी सोच थी, जो महिलाओं को सीमित भूमिका में देखती थी।
दूसरी तरफ ये कुर्द महिला लड़ाके थीं, जो समानता, स्वतंत्रता और आत्मरक्षा के सिद्धांतों के लिए लड़ रही थीं।कुर्द महिला लड़ाके सिर्फ सैनिक नहीं, बल्कि एक बदलाव का प्रतीक बनकर उभरी हैं। उन्होंने यह दिखाया कि युद्ध के मैदान में भी महिलाएं किसी से कम नहीं हैं और वे अपनी पहचान और अधिकारों के लिए मजबूती से खड़ी हो सकती हैं।

