नई दिल्ली। विश्व मांगल्य सभा 23 और 24 जुलाई को नई दिल्ली के चाणक्यपुरी स्थित विश्व युवक केंद्र में उत्तर भारत का दो दिवसीय प्रबोधन सम्मेलन आयोजित करेगी। संगठन की राष्ट्रीय संगठन सचिव वृशाली जोशी ने बुधवार को बताया कि इस वर्ष पहली बार राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत देश की प्रबुद्ध महिलाओं के साथ ‘मातृत्व’ विषय पर विशेष व्याख्यान और संवाद करेंगे। इसी विषय पर दक्षिण भारत के लिए हैदराबाद में भी एक विशेष कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा।
उन्होंने बताया कि दिल्ली में होने वाले इस सम्मेलन में उत्तर भारत के विभिन्न राज्यों एवं प्रांतों से लगभग 280 महिला प्रतिनिधि भाग लेंगी। इनमें जम्मू, बारामूला, अनंतनाग, लेह-लद्दाख, पश्चिम बंगाल के दूरस्थ क्षेत्रों, अवध, मालवा, बिहार, ओडिशा, हिमाचल प्रदेश सहित अनेक क्षेत्रों की महिलाएं शामिल होंगी।
24 जुलाई को होगा विशेष संवाद कार्यक्रम
वृशाली जोशी ने बताया कि 24 जुलाई की सुबह विश्व युवक केंद्र में स्वयंसेविकाओं की बैठक और डॉ. मोहन भागवत का प्रबोधन सत्र आयोजित होगा। इसके बाद शाम 5 बजे जनपथ स्थित डॉ. अंबेडकर अंतरराष्ट्रीय केंद्र में देश की प्रबुद्ध महिलाओं के साथ उनका विशेष संवाद कार्यक्रम होगा। हाई-टी के साथ प्रारंभ होने वाला यह कार्यक्रम लगभग ढाई घंटे तक चलेगा।
उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष के अवसर पर आयोजित यह कार्यक्रम ऐतिहासिक महत्व का है। संघ के सभी पांच सरसंघचालकों के कार्यकाल में पहली बार वर्तमान सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत देश की प्रबुद्ध महिलाओं के साथ “मातृत्व विमर्श” विषय पर विस्तृत संवाद करेंगे। कार्यक्रम में प्रश्नोत्तर सत्र भी आयोजित किया जाएगा।
700 से 800 महिलाओं की सहभागिता की उम्मीद
संगठन के अनुसार, दिल्ली के अंबेडकर अंतरराष्ट्रीय केंद्र में आयोजित संवाद कार्यक्रम में 700 से 800 महिलाओं के शामिल होने की संभावना है, जबकि हैदराबाद में आयोजित दक्षिण भारत के कार्यक्रम में लगभग 1,300 प्रतिनिधियों की भागीदारी अपेक्षित है।
मीडिया प्रतिनिधियों के लिए 24 जुलाई की सुबह 9:30 बजे विश्व युवक केंद्र में डॉ. मोहन भागवत के समापन सत्र के प्रारंभ में फोटो अवसर भी उपलब्ध कराया जाएगा। सम्मेलन के समापन के बाद संगठन अपने वार्षिक कार्ययोजना और बैठक के प्रमुख निष्कर्षों की जानकारी मीडिया के साथ साझा करेगा।
16 वर्षों से महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में सक्रिय
वृशाली जोशी ने बताया कि विश्व मांगल्य सभा पिछले 16 वर्षों से महिला सशक्तिकरण, परिवार जागरण और सामाजिक चेतना के क्षेत्र में कार्य कर रही है। संगठन का मूल मंत्र “न मातुः परं दैवतम्” है, जिसका अर्थ है— “माता से बढ़कर कोई देवता नहीं है।”
उन्होंने बताया कि संगठन के संस्थापक देवनाथ पीठ, अंजनगांव सुर्जी (महाराष्ट्र) के श्रीनाथ पीठाधीश्वर आचार्य स्वामी श्री जितेंद्रनाथ जी महाराज हैं। संगठन के संरक्षक एवं मार्गदर्शक डॉ. मोहन भागवत हैं, जो प्रतिवर्ष संगठन की कार्ययोजना को दिशा देने के लिए समय देते हैं।
आरएसएस से संबद्ध नहीं, स्वतंत्र संगठन
वृशाली जोशी ने स्पष्ट किया कि विश्व मांगल्य सभा न तो आरएसएस की शाखा है और न ही उसका आनुषंगिक संगठन। यह महिलाओं के बीच सामाजिक, सांस्कृतिक और वैचारिक कार्य करने वाला एक स्वतंत्र संगठन है। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार संघ पुरुषों के बीच कार्य करता है, उसी प्रकार विश्व मांगल्य सभा महिलाओं के माध्यम से समाज जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने का प्रयास करती है।
उन्होंने बताया कि संगठन वर्तमान में देश के 33 प्रांतों में सक्रिय है। हाल ही में दिल्ली सहित 23 प्रांतों में महिला सम्मेलनों का आयोजन किया गया, जिनमें लगभग 7 लाख महिलाओं ने भाग लिया। इन संवादों के आधार पर संगठन ने आने वाले वर्षों में “युगानुकूल मातृत्व” विषय को केंद्र में रखकर विभिन्न सामाजिक एवं जागरण कार्यक्रम संचालित करने का निर्णय लिया है।

