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चिकित्सा उपकरणों की लाइसेंसिंग होगी तेज, केंद्र ने मेडिकल डिवाइस नियमों में बड़े बदलाव का प्रस्ताव रखा

नई दिल्ली। केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने चिकित्सा उपकरणों की लाइसेंसिंग प्रक्रिया को अधिक सरल, पारदर्शी और तेज़ बनाने के उद्देश्य से चिकित्सा उपकरण नियम, 2017 (Medical Devices Rules, 2017) में संशोधन का मसौदा जारी किया है। प्रस्तावित बदलावों का उद्देश्य गुणवत्ता, सुरक्षा और प्रदर्शन के निर्धारित मानकों से समझौता किए बिना लाइसेंस जारी करने की प्रक्रिया को तेज करना तथा देश में उच्च गुणवत्ता वाले चिकित्सा उपकरणों की समय पर उपलब्धता सुनिश्चित करना है।

मंत्रालय के अनुसार, इन संशोधनों से कारोबार करने में आसानी (Ease of Doing Business) को बढ़ावा मिलेगा, नियामकीय दक्षता में सुधार होगा और चिकित्सा उपकरण उद्योग को भी राहत मिलेगी।

जोखिम के आधार पर तय होती है उपकरणों की श्रेणी

मौजूदा नियमों के तहत चिकित्सा उपकरणों को जोखिम के आधार पर चार श्रेणियों—क्लास A, क्लास B, क्लास C और क्लास D—में वर्गीकृत किया गया है। इनमें क्लास D सबसे अधिक जोखिम वाले उपकरणों की श्रेणी है।

प्रस्तावित संशोधन में विभिन्न श्रेणियों के उपकरणों के लाइसेंस जारी करने की समय-सीमा को कम करने का प्रस्ताव रखा गया है, ताकि नियामकीय स्वीकृतियां पहले से अधिक तेजी से मिल सकें।

क्लास B उपकरणों की मंजूरी 140 दिन से घटकर 115 दिन

मंत्रालय ने क्लास B श्रेणी के चिकित्सा उपकरणों के लाइसेंस जारी करने की समय-सीमा 140 दिनों से घटाकर 115 दिन करने का प्रस्ताव दिया है।

इस श्रेणी में निम्न से मध्यम जोखिम वाले उपकरण शामिल हैं, जैसे—

ब्लड प्रेशर मॉनिटर
हाइपोडर्मिक सुइयां
पल्स ऑक्सीमीटर
उच्च जोखिम वाले उपकरणों की मंजूरी भी होगी तेज

इसी प्रकार क्लास C और क्लास D श्रेणी के चिकित्सा उपकरणों की लाइसेंसिंग समय-सीमा 105 दिनों से घटाकर 90 दिन करने का प्रस्ताव है।

इन श्रेणियों में शामिल प्रमुख उपकरण हैं—

हृदय स्टेंट
कूल्हे एवं घुटने के प्रत्यारोपण (Hip & Knee Implants)
अन्य ऑर्थोपेडिक प्रत्यारोपण
लाइसेंसिंग प्रक्रिया के हर चरण की तय होगी समय-सीमा

प्रस्तावित संशोधनों में केवल कुल समय-सीमा ही नहीं घटाई गई है, बल्कि लाइसेंसिंग प्रक्रिया के प्रत्येक चरण के लिए भी स्पष्ट समय-सीमा निर्धारित करने का प्रस्ताव रखा गया है।

इनमें शामिल हैं—

आवेदन की प्रारंभिक जांच
अधिसूचित निकायों (Notified Bodies) द्वारा ऑडिट
अनुपालन का सत्यापन
लाइसेंस जारी करने की प्रक्रिया

मंत्रालय का मानना है कि इससे पूरी प्रक्रिया अधिक पारदर्शी, पूर्वानुमेय और दक्ष बनेगी।

उद्योग और मरीज दोनों को होगा लाभ

स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, इन सुधारों से चिकित्सा उपकरण उद्योग को नियामकीय मंजूरी तेजी से प्राप्त होगी, जिससे नए और गुणवत्तापूर्ण उपकरण जल्द बाजार में उपलब्ध हो सकेंगे। वहीं मरीजों को भी सुरक्षित और उच्च गुणवत्ता वाले चिकित्सा उपकरण समय पर उपलब्ध होने का लाभ मिलेगा।

हितधारकों से मांगे गए सुझाव

मंत्रालय ने प्रस्तावित संशोधनों के मसौदे को सार्वजनिक कर सभी संबंधित हितधारकों से सुझाव और आपत्तियां आमंत्रित की हैं। यह मसौदा अधिसूचना राजपत्र तथा केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (CDSCO) की वेबसाइट पर उपलब्ध है। मंत्रालय ने निर्धारित समय-सीमा के भीतर सभी हितधारकों से अपने सुझाव भेजने का अनुरोध किया है।

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