नयी दिल्ली। खेतों की सेहत बचाने की मुहिम शुरू, किसानों तक पहुंचेगा वैज्ञानिक खेती का संदेश , कृषि क्षेत्र को अधिक टिकाऊ और लाभकारी बनाने के उद्देश्य से केंद्र सरकार ने 1 जून से देशभर में ‘खेत बचाओ अभियान’ शुरू किया है। इस अभियान के जरिए किसानों को खेती से जुड़ी नई तकनीकों, मिट्टी संरक्षण और संसाधनों के बेहतर उपयोग के बारे में जागरूक किया जाएगा। अभियान की शुरुआत मध्य प्रदेश के रायसेन जिले से की गई है।
इस पहल के तहत कृषि वैज्ञानिक, कृषि विश्वविद्यालयों के विशेषज्ञ, कृषि विज्ञान केंद्रों के अधिकारी और विभिन्न सरकारी संस्थानों की टीमें गांवों का दौरा करेंगी। ये टीमें किसानों को खेतों की उत्पादकता बढ़ाने और लागत कम करने के उपायों की जानकारी देंगी।
विशेषज्ञ किसानों को बताएंगे कि लगातार रासायनिक उर्वरकों के अत्यधिक उपयोग से मिट्टी की गुणवत्ता पर क्या असर पड़ता है और इसे कैसे सुधारा जा सकता है। मिट्टी परीक्षण, सॉयल हेल्थ कार्ड, जैविक और प्राकृतिक खेती, जल संरक्षण तथा हरी खाद के महत्व पर भी विस्तार से जानकारी दी जाएगी।
अभियान का एक प्रमुख उद्देश्य किसानों को नकली खाद, बीज और कीटनाशकों से होने वाले नुकसान के प्रति सतर्क करना भी है। इसके लिए गांव स्तर पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, जहां किसानों को असली और नकली उत्पादों की पहचान के तरीके समझाए जाएंगे।
कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि बदलते मौसम, घटते जलस्तर और मिट्टी की बिगड़ती गुणवत्ता जैसी चुनौतियों से निपटने के लिए वैज्ञानिक खेती को बढ़ावा देना समय की आवश्यकता है। इसी सोच के साथ यह अभियान किसानों को आधुनिक कृषि पद्धतियों से जोड़ने का प्रयास करेगा।
अभियान के दौरान किसानों को किसान क्रेडिट कार्ड, प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि, फसल बीमा योजना, कृषि यंत्रीकरण और अन्य सरकारी योजनाओं की जानकारी भी उपलब्ध कराई जाएगी, ताकि वे उपलब्ध सुविधाओं का पूरा लाभ उठा सकें।
केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान भी विभिन्न राज्यों में किसानों से सीधे संवाद करेंगे और उनकी समस्याओं व सुझावों को जानने का प्रयास करेंगे। सरकार को उम्मीद है कि यह अभियान खेती को अधिक टिकाऊ, लाभदायक और भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

