ग्लासगो। ग्लासगो में आयोजित कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत ने अपना पदक खाता खोल दिया है। पुरुषों की हेवीवेट पैरा पावरलिफ्टिंग स्पर्धा में भारतीय खिलाड़ी झंडू कुमार ने शानदार प्रदर्शन करते हुए कांस्य पदक अपने नाम किया। उनकी इस उपलब्धि से पूरे देश में खुशी की लहर है और खेल जगत ने इसे भारतीय पैरा खेलों के लिए बड़ी सफलता बताया है।
बिहार के नालंदा जिले के रहने वाले झंडू कुमार ने फाइनल मुकाबले में दूसरी कोशिश में 190 किलोग्राम वजन सफलतापूर्वक उठाया और 130.9 अंक हासिल कर पोडियम पर जगह बनाई। उन्होंने अपने अभियान की शुरुआत 181 किलोग्राम वजन उठाकर की थी। तीसरे प्रयास में उन्होंने 196 किलोग्राम वजन उठाने का प्रयास किया, जो सफल होने पर बर्मिंघम 2022 के कॉमनवेल्थ गेम्स रिकॉर्ड को भी पीछे छोड़ सकता था, लेकिन वह इसमें सफल नहीं हो सके।
प्रधानमंत्री मोदी ने दी बधाई
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया पर झंडू कुमार को बधाई देते हुए कहा कि उनका प्रदर्शन देश के लिए गर्व का विषय है। उन्होंने लिखा कि यह सफलता उनकी असाधारण ताकत, अटूट संकल्प और वर्षों की अनुशासित मेहनत का परिणाम है। प्रधानमंत्री ने कहा कि झंडू कुमार ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत का गौरव बढ़ाया है और उनका संघर्ष देश के लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा बनेगा।
लाइटवेट स्पर्धाओं में पदक से चूका भारत
इससे पहले लाइटवेट पैरा पावरलिफ्टिंग स्पर्धाओं में भारतीय खिलाड़ी पदक जीतने से चूक गए। पुरुषों के लाइटवेट फाइनल में अशोक मलिक ने व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ 200 किलोग्राम वजन उठाया, लेकिन चौथे स्थान पर रहे। वहीं परमजीत कुमार सातवें स्थान पर रहे।
महिला वर्ग में जसप्रीत कौर छठे और सुमन देवी सातवें स्थान पर रहीं, जबकि कस्तूरी राजामणि हेवीवेट फाइनल में कोई भी वैध प्रयास दर्ज नहीं करा सकीं।
संघर्ष से सफलता तक का सफर
झंडू कुमार की सफलता उनके कठिन संघर्ष की कहानी भी बयां करती है। बचपन में पोलियो से प्रभावित होने के बावजूद उन्होंने कभी हार नहीं मानी। आर्थिक चुनौतियों के बीच परिवार का सहयोग करते हुए उन्होंने अपनी मेहनत और समर्पण के दम पर पैरा पावरलिफ्टिंग में राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाई।
उनकी यह उपलब्धि न केवल भारतीय दल के लिए कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 का पहला पदक है, बल्कि यह देश के पैरा खिलाड़ियों के बढ़ते आत्मविश्वास और वैश्विक मंच पर उनकी मजबूत उपस्थिति का भी प्रतीक है। आने वाले मुकाबलों में भारतीय खिलाड़ियों से और पदकों की उम्मीदें बढ़ गई हैं।

