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आयुष्मान खुराना ने किया सुरक्षित बचपन का आह्वान, जालना में बच्चों और समुदायों से की मुलाकात

नई दिल्ली। प्रसिद्ध अभिनेता और यूनिसेफ इंडिया के राष्ट्रीय एम्बेसडर आयुष्मान खुराना ने महाराष्ट्र के जालना का दौरा कर बच्चों, किशोरियों और समुदाय के सदस्यों से मुलाकात की। उनका यह दौरा यूनिसेफ समर्थित किनशिप और कम्युनिटी केयर कार्यक्रम का हिस्सा था, जिसका उद्देश्य सीजनल माइग्रेशन से प्रभावित बच्चों को परिवार और समुदाय आधारित देखभाल के माध्यम से सुरक्षित रखना है।

खुराना के साथ यूनिसेफ इंडिया की टीम भी मौजूद रही, जिसमें डिप्टी रिप्रेजेंटेटिव प्रोग्राम्स जेस्पर मोलर शामिल थे। इस पहल को सरकार और गैर-सरकारी संगठन (NGO) साझेदारों का सहयोग प्राप्त है।

पलायन से बच्चों के सामने बढ़ती चुनौतियां

कई हाशिए पर रहने वाले परिवारों के लिए मजबूरी में किया जाने वाला सीजनल माइग्रेशन जीवन की नियमित वास्तविकता है। ऐसे हालात में बच्चों के सामने बाल मजदूरी, बाल विवाह, शिक्षा में व्यवधान, उपेक्षा और हिंसा का जोखिम बढ़ सकता है।

वहीं, जो बच्चे अपने विस्तारित परिवार या दादा-दादी के साथ गांव में रहते हैं, वे स्कूल और स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े रह सकते हैं, लेकिन उन्हें भावनात्मक तनाव, उपेक्षा और अतिरिक्त घरेलू जिम्मेदारियों जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है।

समुदाय आधारित देखभाल पर जोर

जालना में जिला प्रशासन और NGO साझेदारों के साथ लागू किया जा रहा किनशिप और कम्युनिटी केयर कार्यक्रम समुदाय और सरकार के सहयोग से बच्चों को सुरक्षित रखने पर केंद्रित है। इसके तहत बच्चों को शिक्षा, स्वास्थ्य, पोषण और मनोसामाजिक सहयोग जैसी सेवाओं से जोड़ने के साथ बाल मजदूरी और बाल विवाह के जोखिम को कम करने का प्रयास किया जा रहा है।

बच्चों और समुदाय के सदस्यों से मुलाकात के बाद आयुष्मान खुराना ने कहा कि मजबूरी में होने वाला सीजनल माइग्रेशन कई परिवारों की कठोर वास्तविकता है, लेकिन किसी भी बच्चे को अपनी परिस्थितियों के कारण अपना बचपन नहीं खोना चाहिए। उन्होंने जालना में समुदायों द्वारा बच्चों को परिवार, देखभाल और सहयोग से जोड़े रखने के प्रयासों की सराहना की।

युवा कम्युनिटी लीडरों से भी मिले खुराना

दौरे के दौरान आयुष्मान खुराना ने युवा कम्युनिटी लीडरों से भी बातचीत की। इनमें शंकर आसाराम शामिल थे, जिन्होंने यूथ वालंटियर के रूप में काम करते हुए समुदाय का विश्वास हासिल किया और बाद में गांव के सरपंच चुने गए।

उन्होंने कक्षा 12 की छात्रा और बालमित्र प्रतिक्षा से भी मुलाकात की। प्रतिक्षा ने माइग्रेशन से किशोरियों पर पड़ने वाले प्रभावों को करीब से देखा है।

खुराना ने कहा कि बालमित्र बच्चों और उनके समुदायों के लिए भरोसेमंद भूमिका निभाते हैं। बच्चों के अधिकारों, सुरक्षा और कल्याण का समर्थन करते हुए वे बच्चों को स्कूल में बनाए रखने तथा बाल मजदूरी और बाल विवाह को रोकने में महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं।

शिक्षा से बदल रही है बच्चों की जिंदगी

किशोरियों से बातचीत के दौरान खुराना ने 18 वर्षीय शिल्पा से मुलाकात का भी उल्लेख किया। शिल्पा कभी अपने परिवार के साथ प्रवास कर चुकी थीं। अब उन्होंने स्कूल की पढ़ाई पूरी कर ली है और एक व्यावसायिक पाठ्यक्रम में दाखिला लिया है।

खुराना ने कहा कि लड़कियों के सपने तभी पूरे हो सकते हैं, जब बच्चों को शिक्षा, स्वास्थ्य और सुरक्षित वातावरण मिले। उन्होंने उम्मीद जताई कि शिक्षा शिल्पा जैसी बेटियों को सीजनल माइग्रेशन के पीढ़ीगत चक्र से बाहर निकलने में मदद करेगी।

परिवारों को सेवाओं से जोड़ने पर जोर

दौरे के दौरान खुराना ने ऐसे परिवार से भी मुलाकात की, जो सीजनल काम के लिए बाहर गए पिता के दो छोटे बच्चों की देखभाल कर रहा है। बालमित्रों और समुदाय के सहयोग से ये बच्चे स्कूल से जुड़े हुए हैं और उन्हें पोषण तथा टीकाकरण जैसी आवश्यक सेवाएं मिल रही हैं।

आयुष्मान खुराना ने कहा कि हर बच्चे को सुरक्षित, प्यार भरे और पोषण देने वाले पारिवारिक वातावरण में बड़ा होने का अधिकार है। उन्होंने यूनिसेफ, महाराष्ट्र सरकार, जिला प्रशासन और गांव के समुदायों के साथ मिलकर बच्चों की सुरक्षा के लिए किए जा रहे प्रयासों पर गर्व व्यक्त किया।

बाल संरक्षण प्रणालियों को मजबूत करने की जरूरत

यूनिसेफ इंडिया के कार्यवाहक प्रतिनिधि जेस्पर मोलर ने कहा कि बच्चों के खिलाफ हिंसा को रोका जा सकता है। उन्होंने कहा कि जोखिमों की जल्द पहचान करने और परिवारों को आवश्यक सेवाओं तथा सामाजिक सुरक्षा से जोड़ने के लिए जमीनी स्तर की बाल संरक्षण प्रणालियों को मजबूत करना जरूरी है।

उन्होंने आयुष्मान खुराना द्वारा बच्चों की सुरक्षा और देखभाल के अधिकार के समर्थन में आवाज उठाने के लिए उनका आभार जताया।

दौरे के दौरान आयुष्मान खुराना और यूनिसेफ इंडिया के डिप्टी रिप्रेजेंटेटिव प्रोग्राम्स ने जालना के जिला कलेक्टर से भी मुलाकात की और बच्चों तथा परिवारों पर कार्यक्रम के प्रभाव की सराहना की।

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