भारत क्या ईरान–इज़राइल तनाव को कम कर सकता है? इस सवाल पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा तेज हो गई है। अमेरिका और ईरान के बीच जारी टकराव को शांत करने के लिए दूसरी दौर की बातचीत की संभावनाएं जताई जा रही हैं। इससे पहले पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में हुई पहली बैठक किसी ठोस नतीजे पर नहीं पहुंच सकी थी।
इसी बीच भारत में अमेरिकी राजदूत और डोनाल्ड ट्रंप के करीबी सर्जियो गोर ने कहा है कि मध्य पूर्व में शांति स्थापित करने के प्रयासों में भारत की भागीदारी का स्वागत किया जाएगा। उनके अनुसार, यह भारत पर निर्भर करता है कि वह इस प्रक्रिया में किस तरह की भूमिका निभाना चाहता है।उन्होंने यह भी कहा कि शांति प्रयासों में किसी एक देश तक सीमित रहने की जरूरत नहीं है, बल्कि दुनिया का कोई भी देश इसमें योगदान दे सकता है।
ट्रंप प्रशासन भी हर उस देश का समर्थन करता है जो इस संघर्ष को समाप्त करने में मदद करना चाहता है।सर्जियो गोर ने संकेत दिए कि आने वाले दिनों में भारत और अमेरिका के बीच व्यापार और द्विपक्षीय संबंधों को लेकर कुछ महत्वपूर्ण घोषणाएं हो सकती हैं, हालांकि उन्होंने विवरण साझा करने से इनकार किया।उन्होंने बताया कि नरेंद्र मोदी और ट्रंप के बीच हाल ही में करीब 40 मिनट तक बातचीत हुई। साथ ही, अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो के जल्द भारत दौरे की भी संभावना जताई गई है।
ईरान से जुड़े मुद्दे पर गोर ने कहा कि क्षेत्र में तनाव के कारण तेल और गैस की कीमतों पर असर पड़ा है। खासतौर पर होर्मुज जलडमरूमध्य का मुद्दा वैश्विक चिंता का विषय बना हुआ है, क्योंकि यह वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण मार्ग है।उन्होंने यह भी कहा कि इस मार्ग को खुला रखना जरूरी है, क्योंकि इसका असर सिर्फ एक क्षेत्र पर नहीं बल्कि पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर पड़ता है।कुल मिलाकर, भारत को एक संभावित मध्यस्थ के रूप में देखा जा रहा है, लेकिन वह इस दिशा में कितना सक्रिय होता है, यह आने वाले समय में साफ होगा।

