पाकिस्तान के सेना प्रमुख आसिम मुनीर का अचानक ईरान दौरा क्षेत्रीय राजनीति और कूटनीति से जुड़ा एक अहम घटनाक्रम माना जा रहा है।दरअसल, यह दौरा ऐसे समय हुआ जब अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत में गतिरोध बना हुआ है।
सूत्रों के अनुसार, इस्लामाबाद में हालिया वार्ता सफल नहीं होने के बाद पाकिस्तान ने मध्यस्थ की भूमिका निभाते हुए ईरान से सीधे संपर्क साधने की कोशिश की। इसी कड़ी में आसिम मुनीर तेहरान पहुंचे।इस प्रतिनिधिमंडल में मोहसिन नकवी और अन्य वरिष्ठ सैन्य अधिकारी भी शामिल थे। खास तौर पर सैन्य संचालन से जुड़े अधिकारी को साथ ले जाने का मकसद ईरान को यह भरोसा दिलाना था कि हाल में की गई पाकिस्तानी सैन्य तैनाती उसके खिलाफ नहीं है।बताया जा रहा है कि यह पहल अमेरिकी दूत स्टीव विटकॉफ के संपर्क के बाद हुई।
पाकिस्तान ने ईरान को अमेरिका की ओर से दिए गए संभावित प्रस्तावों और रियायतों की जानकारी भी दी। इस दौरान ईरानी पक्ष का नेतृत्व अब्बास अराघची ने किया।हालांकि, बातचीत में सबसे बड़ा विवाद परमाणु मुद्दे को लेकर बना हुआ है। अमेरिका चाहता है कि ईरान लंबे समय तक यूरेनियम संवर्धन (एनरिचमेंट) न करे, जबकि ईरान अपनी घरेलू जरूरतों के चलते कम अवधि की शर्त पर ही सहमत है।
ध्यान देने वाली बात यह है कि पाकिस्तान पहले भी अमेरिका और ईरान के बीच बैक-चैनल कूटनीति में भूमिका निभाता रहा है, खासकर 1979 के बाद से जब दोनों देशों के औपचारिक संबंध समाप्त हो गए थे।फिलहाल ईरान ने पाकिस्तान के जरिए मिले प्रस्तावों का मूल्यांकन करने की बात कही है। इसके बाद ही तय होगा कि अमेरिका के साथ अगले दौर की बातचीत आगे बढ़ेगी या नहीं।

