भारत की राजनीति में बड़े बदलाव के दावों के बीच आम आदमी पार्टी (AAP) को एक बड़ा झटका लगा है। 24 अप्रैल 2026 को पार्टी के सात राज्यसभा सदस्यों ने इस्तीफा देकर भारतीय जनता पार्टी (BJP) में शामिल होने का फैसला किया। इस घटनाक्रम ने पार्टी की एकता और मजबूती पर सवाल खड़े कर दिए हैं, क्योंकि यह उसके राज्यसभा सांसदों का लगभग दो-तिहाई हिस्सा माना जा रहा है।
राघव चड्ढा ने बताया कि संविधान के अनुसार यदि किसी दल के दो-तिहाई सांसद एक साथ दूसरी पार्टी में शामिल होते हैं, तो यह कानूनी रूप से मान्य होता है। उनके साथ अशोक मित्तल और संदीप पाठक ने औपचारिक रूप से बीजेपी जॉइन कर ली है। वहीं स्वाति मालीवाल, हरभजन सिंह, राजिंदर गुप्ता और विक्रम साहनी के भी बीजेपी में शामिल होने की बात कही गई है, हालांकि इन चारों ने सार्वजनिक रूप से इसकी पुष्टि नहीं की है।
इस पूरे मामले को आम आदमी पार्टी ने बीजेपी का “ऑपरेशन लोटस” बताया है। संजय सिंह ने आरोप लगाया कि केंद्रीय एजेंसियों का डर दिखाकर पार्टी नेताओं को तोड़ा जा रहा है और इसका मकसद पंजाब की भगवंत मान सरकार को अस्थिर करना है।दूसरी ओर, बीजेपी की तरफ से इन नेताओं का स्वागत किया गया। पार्टी नेतृत्व ने इसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में काम करने का अवसर बताया।AAP ने इस कदम को नियमों के खिलाफ बताते हुए कार्रवाई की तैयारी शुरू कर दी है।
पार्टी के व्हिप एनडी गुप्ता ने कहा कि जो सांसद आधिकारिक रूप से बीजेपी में शामिल हो चुके हैं, उनके खिलाफ शिकायत दर्ज कराई जाएगी। साथ ही उन्हें राज्यसभा से अयोग्य घोषित करने की मांग भी की जाएगी।यह पूरा विवाद संविधान की 10वीं अनुसूची, यानी ‘दल-बदल विरोधी कानून’ से जुड़ा है। 1985 में लागू इस कानून का उद्देश्य राजनीतिक स्थिरता बनाए रखना है।
इसके तहत यदि कोई सांसद या विधायक अपनी पार्टी छोड़ता है या पार्टी लाइन के खिलाफ वोट करता है, तो उसकी सदस्यता खत्म की जा सकती है। हालांकि, अगर किसी दल के दो-तिहाई सदस्य एक साथ दूसरी पार्टी में शामिल होते हैं, तो उन्हें इस कानून से छूट मिल जाती है।

