दिल्ली में पेश संशोधित बजट अनुमानों से यह साफ संकेत मिलता है कि सरकार ने महिलाओं से जुड़ी कल्याणकारी योजनाओं पर खर्च बढ़ाया है, जबकि तकनीकी परियोजनाओं में कटौती की गई है।सबसे बड़ा बदलाव बिजली और बस यात्रा से जुड़ी सुविधाओं में देखने को मिला। बिजली सब्सिडी के लिए बजट को बढ़ाकर करीब 4,200 करोड़ रुपये कर दिया गया है, जो पहले तय राशि से ज्यादा है। इसका कारण बढ़ती उपभोक्ता संख्या और लंबित भुगतान बताया जा रहा है। मौजूदा व्यवस्था के तहत 200 यूनिट तक बिजली मुफ्त मिलती है, जबकि 201 से 400 यूनिट तक के उपयोग पर 50 प्रतिशत सब्सिडी दी जाती है।
महिलाओं के लिए मुफ्त बस यात्रा योजना पर भी खर्च में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई है। डीटीसी बसों में इस सुविधा के लिए सब्सिडी 240 करोड़ रुपये से बढ़कर 328 करोड़ रुपये हो गई है। वहीं क्लस्टर बस सेवाओं में यह राशि 200 करोड़ रुपये के अनुमान से बढ़कर 342 करोड़ रुपये तक पहुंच गई है। कुल मिलाकर महिलाओं के मुफ्त सफर पर खर्च 440 करोड़ रुपये से बढ़कर करीब 670 करोड़ रुपये हो गया है।इसके विपरीत, ई-गवर्नेंस और आईटी परियोजनाओं के बजट में भारी कटौती की गई है।
इन योजनाओं के लिए पहले जहां 150 करोड़ रुपये का प्रावधान था, उसे घटाकर सिर्फ 15 करोड़ रुपये कर दिया गया है।इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि सरकार ने इस बार सामाजिक और सब्सिडी आधारित योजनाओं, खासकर महिलाओं को राहत देने वाली योजनाओं को प्राथमिकता दी है, जबकि तकनीकी विकास से जुड़े प्रोजेक्ट्स के खर्च को सीमित कर दिया गया है।

