नई दिल्ली। भारत ऊर्जा परिवर्तन (Energy Transition) के एक नए दौर से गुजर रहा है। सरकार परिवहन, उद्योग, कृषि और घरेलू क्षेत्रों में बिजली आधारित आधुनिक तकनीकों को बढ़ावा देकर देश को अधिक स्वच्छ, ऊर्जा-दक्ष और टिकाऊ अर्थव्यवस्था की ओर ले जाने के लिए कई महत्वपूर्ण योजनाएं लागू कर रही है। इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी) के विस्तार से लेकर बैटरी ऊर्जा भंडारण, ऊर्जा दक्ष उद्योगों और कृषि के सौरकरण तक, अनेक पहलें इस परिवर्तन को गति दे रही हैं।
लोकसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में विद्युत मंत्रालय में राज्य मंत्री श्री श्रीपाद नाईक ने बताया कि विभिन्न मंत्रालय अपने-अपने क्षेत्रों में विद्युतीकरण और बिजली आधारित तकनीकों को अपनाने के लिए समन्वित रूप से कार्य कर रहे हैं।
ईवी क्रांति को मिल रहा नया आधार
देश में इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने के लिए विद्युत मंत्रालय ने इलेक्ट्रिक वाहन चार्जिंग अवसंरचना स्थापना एवं संचालन दिशा-निर्देश, 2024 तथा बैटरी स्वैपिंग और चार्जिंग स्टेशन दिशा-निर्देश, 2025 जारी किए हैं। इनका उद्देश्य देशभर में चार्जिंग नेटवर्क का विस्तार करना है।
इसके अलावा भारी उद्योग मंत्रालय की पीएम ई-ड्राइव योजना तथा आवास एवं शहरी कार्य मंत्रालय की पीएम-ईबस सेवा योजना भी इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को नई गति दे रही हैं।
उद्योगों में ऊर्जा दक्षता पर विशेष जोर
ऊर्जा दक्षता ब्यूरो (BEE) उद्योगों को कम ऊर्जा में अधिक उत्पादन के लिए प्रोत्साहित कर रहा है। इसके लिए परफॉर्म, अचीव एंड ट्रेड (PAT), कार्बन क्रेडिट ट्रेडिंग स्कीम (CCTS) तथा ADEETIE योजना जैसी पहलें संचालित की जा रही हैं।
विशेष रूप से सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSME) के लिए जुलाई 2025 में शुरू की गई ADEETIE योजना का कुल बजट 1,000 करोड़ रुपये है। यह योजना 14 ऊर्जा-गहन क्षेत्रों के 60 औद्योगिक क्लस्टरों को कवर करती है। इसके तहत ऊर्जा ऑडिट के साथ ऊर्जा दक्ष तकनीकों को अपनाने के लिए सूक्ष्म एवं लघु उद्योगों को 5 प्रतिशत तथा मध्यम उद्योगों को 3 प्रतिशत ब्याज अनुदान दिया जा रहा है।
कृषि क्षेत्र में सौर ऊर्जा का विस्तार
कृषि क्षेत्र में प्रधानमंत्री किसान ऊर्जा सुरक्षा एवं उत्थान महाभियान (पीएम-कुसुम) के माध्यम से कृषि पंपों के विद्युतीकरण और सौरकरण को बढ़ावा दिया जा रहा है। वहीं ऊर्जा दक्षता ब्यूरो ई-कुकिंग सहित ऊर्जा बचाने वाले उपकरणों के उपयोग के लिए जागरूकता अभियान भी चला रहा है।
मजबूत हो रहा बिजली वितरण नेटवर्क
सरकार संशोधित वितरण क्षेत्र योजना (RDSS) के तहत राज्यों और डिस्कॉम को वितरण नेटवर्क के आधुनिकीकरण और सुदृढ़ीकरण में सहायता प्रदान कर रही है। इसके साथ ही क्षमता निर्माण और डिमांड साइड मैनेजमेंट (DSM) कार्यक्रमों को भी बढ़ावा दिया जा रहा है।
बैटरी स्टोरेज से बढ़ेगी ग्रिड की क्षमता
बढ़ती बिजली मांग और नवीकरणीय ऊर्जा के बेहतर उपयोग को ध्यान में रखते हुए सरकार बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणालियों (BESS) पर भी बड़े पैमाने पर निवेश कर रही है।
13.8 गीगावाट-घंटा (GWh) क्षमता के बीईएसएस के लिए 3,760 करोड़ रुपये की व्यवहार्यता अंतर वित्तपोषण (VGF) योजना लागू की जा रही है।
इसके अतिरिक्त 15 राज्यों और एनटीपीसी के लिए 30 GWh क्षमता वाले बीईएसएस विकास हेतु 5,400 करोड़ रुपये की सहायता भी स्वीकृत की गई है।
ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर से मजबूत होगा बिजली तंत्र
बढ़ती बिजली मांग और नवीकरणीय ऊर्जा के एकीकरण के लिए सरकार कई बड़े कदम उठा रही है। इनमें—
अंतरराज्यीय एवं राज्य स्तरीय पारेषण नेटवर्क का विस्तार
ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर (GEC) का विकास
बैटरी ऊर्जा भंडारण और पम्प्ड स्टोरेज परियोजनाएं
रिन्यूएबल एनर्जी मैनेजमेंट सेंटर (REMC) की स्थापना
रियल टाइम मार्केट (RTM) और सहायक सेवाओं का विस्तार
तापीय बिजली संयंत्रों का लचीला संचालन
जैसे उपाय शामिल हैं।
बढ़ रही है बिजली की हिस्सेदारी
ऊर्जा दक्षता ब्यूरो की भारत ऊर्जा परिदृश्य रिपोर्ट 2024-25 के अनुसार देश की कुल अंतिम ऊर्जा खपत में बिजली की हिस्सेदारी लगभग 23 प्रतिशत हो चुकी है। सरकार विभिन्न क्षेत्रों में बिजली के उपयोग को बढ़ाने के साथ-साथ गैर-जीवाश्म ईंधन आधारित बिजली उत्पादन, मजबूत पारेषण नेटवर्क और ऊर्जा भंडारण क्षमता पर भी लगातार निवेश कर रही है।
ऊर्जा परिवर्तन की नई दिशा
विशेषज्ञों का मानना है कि परिवहन, उद्योग और कृषि क्षेत्रों में तेजी से बढ़ता विद्युतीकरण न केवल कार्बन उत्सर्जन कम करेगा, बल्कि भारत की ऊर्जा सुरक्षा, औद्योगिक प्रतिस्पर्धा और हरित विकास को भी नई गति देगा। सरकार की विभिन्न योजनाएं आने वाले वर्षों में देश को स्वच्छ ऊर्जा आधारित अर्थव्यवस्था की दिशा में मजबूत आधार प्रदान कर सकती हैं।

