त्रिशूली-1 पावर प्रोजेक्ट के 73 कर्मचारी और कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गए श्रद्धालु भी शामिल, भारत ने भेजी 47.5 टन मानवीय सहायता
नई दिल्ली। नेपाल में आई भीषण बाढ़ और प्राकृतिक आपदा के बीच करीब 288 भारतीय नागरिकों से संपर्क नहीं हो पा रहा है। इनमें त्रिशूली-1 पावर प्रोजेक्ट में कार्यरत कर्मचारी, कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गए श्रद्धालु तथा विभिन्न राज्यों के अन्य भारतीय नागरिक शामिल हैं। भारत सरकार ने स्थिति को गंभीरता से लेते हुए राहत एवं बचाव अभियान तेज कर दिया है।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने बताया कि नेपाल में फंसे भारतीय नागरिकों के संबंध में भारतीय दूतावास और नेपाल के अधिकारियों के साथ लगातार संपर्क किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि स्थिति लगातार बदल रही है और सरकार प्रभावित भारतीय नागरिकों को सुरक्षित निकालने के लिए हर संभव प्रयास कर रही है।
पाँच प्रमुख समूहों में 288 भारतीय
विदेश मंत्रालय के अनुसार, संपर्क से बाहर भारतीय नागरिकों में सबसे बड़ा समूह त्रिशूली-1 पावर प्रोजेक्ट में काम करने वाले 73 भारतीयों का है। काठमांडू स्थित भारतीय दूतावास परियोजना प्रमुख के संपर्क में है और इन नागरिकों की स्थिति के संबंध में लगातार जानकारी जुटाई जा रही है।
इसके अलावा तमिलनाडु के 37 और 49 लोगों के दो अलग-अलग समूह हैं, जो सम्राट और फ्लाई एवरेस्ट ट्रैवल्स के माध्यम से कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गए थे।
पश्चिम बंगाल के 32 भारतीय नागरिकों का एक समूह भी रसुवा जिले के तिमुरे में फंसा हुआ है। इसके अलावा विभिन्न राज्यों के 61 भारतीय नागरिकों और केरल के 33 नागरिकों का समूह भी संपर्क से बाहर है।
इस तरह इन पांच प्रमुख समूहों में कुल 288 भारतीय नागरिक शामिल हैं, जिनसे फिलहाल संपर्क नहीं हो पा रहा है।
भारत ने भेजी 47.5 टन मानवीय सहायता
नेपाल में राहत कार्यों को मजबूत करने के लिए भारत ने तत्काल मानवीय सहायता भी भेजी है। भारत की ओर से दो विमानों के जरिए कुल 47.5 टन राहत सामग्री नेपाल भेजी गई है।
इसमें करीब 8 टन दवाइयां और 1 टन खाद्य सामग्री सहित अन्य आवश्यक मानवीय सहायता शामिल है। भारत ने स्पष्ट किया है कि नेपाल में जारी राहत एवं बचाव प्रयासों के लिए उसका सहयोग आगे भी जारी रहेगा।
प्रधानमंत्री मोदी ने नेपाल को दिया मदद का भरोसा
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नेपाल के प्रधानमंत्री से बातचीत कर आपदा में हुई जनहानि पर गहरी संवेदना व्यक्त की। उन्होंने नेपाल के लोगों के साथ भारत की एकजुटता जताते हुए हर संभव सहायता उपलब्ध कराने का भरोसा दिया।
भारत सरकार का कहना है कि नेपाल के साथ लगातार संपर्क बनाए रखा जा रहा है और भारतीय नागरिकों की सुरक्षा एवं उन्हें सुरक्षित निकालना सर्वोच्च प्राथमिकता है।
चीन की ओर फंसे भारतीय श्रद्धालुओं को निकालने की कोशिश
विदेश मंत्रालय नेपाल के अलावा चीन की ओर फंसे भारतीय श्रद्धालुओं की भी मदद कर रहा है। मंत्रालय के मुताबिक करीब 200 भारतीय नागरिकों ने चीन की तरफ से बाहर निकलने के लिए सहायता मांगी है।
इनमें लगभग 95 लोग गारचन में हैं और नेपाल में प्रवेश के लिए बिल्सा की ओर बढ़ रहे हैं। इसके अलावा चार लोग जीलोंग शहर में हैं, जबकि 13 लोग जुटुलपो में बताए गए हैं और सागा शहर की ओर जाने की कोशिश कर रहे हैं।
विदेश मंत्रालय ने कहा कि वहां की स्थिति तेजी से बदल रही है, इसलिए भारतीय अधिकारियों द्वारा लगातार हालात की निगरानी की जा रही है।
21 भारतीय नागरिकों को सुरक्षित निकाला गया
रणधीर जायसवाल ने बताया कि तमिलनाडु के 21 भारतीय नागरिकों को सुरक्षित निकाला जा चुका है। सरकार नेपाल और चीन की ओर फंसे अन्य भारतीय नागरिकों को भी सुरक्षित निकालने के लिए संबंधित अधिकारियों के साथ समन्वय कर रही है।
नेपाल में आई इस भीषण बाढ़ के बीच भारत की ओर से राहत सामग्री भेजने और भारतीय नागरिकों के लिए चलाए जा रहे बचाव प्रयासों ने एक बार फिर पड़ोसी देश के साथ भारत की मानवीय प्रतिबद्धता को सामने रखा है।

