नई दिल्ली। यूनिसेफ-युवाह के वार्षिक प्रमुख कार्यक्रम ‘यूथ सेंट्रल’ में सरकार, निजी क्षेत्र, फाउंडेशन, नागरिक समाज और युवा समुदाय के 100 से अधिक हितधारक एक मंच पर जुटे। कार्यक्रम में युवाओं के विकास से जुड़े विभिन्न महत्वपूर्ण मुद्दों पर व्यापक चर्चा हुई। इनमें युवा-केंद्रितता, महिलाओं के लिए आर्थिक अवसर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और उद्यमिता, इंटर्नशिप, दिव्यांगजन समावेशन और सेवा-आधारित शिक्षा प्रमुख रहे।
कार्यक्रम में युवा मामले एवं खेल मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव नितेश कुमार मिश्रा, जेनरेशन अनलिमिटेड की कार्यवाहक सीईओ डॉ. नादी अल्बिनो, एसएपी की चीफ इंक्लूजन एंड सोशल इम्पैक्ट ऑफिसर रश्मि वर्मा, यूनिसेफ इंडिया के डिप्टी रिप्रेजेंटेटिव (प्रोग्राम्स) जेस्पर मोलर, यूएनएफपीए के कुमार मनीष और यूनिसेफ युवाह की युवा प्रतिनिधि पूजा महालदार सहित कई प्रमुख प्रतिनिधि मौजूद रहे।
युवाओं को निर्णय प्रक्रिया में बराबर स्थान देने पर जोर
यूनिसेफ इंडिया के डिप्टी रिप्रेजेंटेटिव जेस्पर मोलर ने कहा कि यूथ सेंट्रल जैसे मंच क्रॉस-सेक्टर सहयोग की ताकत को सामने लाते हैं। उन्होंने कहा कि 100 से अधिक सार्वजनिक, निजी और युवा साझेदार बच्चों एवं युवाओं से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर संवाद के लिए एक साथ आए हैं।
उन्होंने कहा कि यूथ सेंट्रल में युवा बातचीत के केंद्र में हैं और युवा प्रतिनिधि सरकार, निजी क्षेत्र तथा नागरिक समाज के नेताओं के साथ बराबरी से भाग ले रहे हैं। उनके मुताबिक, ऐसे मंच वास्तव में युवा-केंद्रित प्रणालियों, नीतियों और कार्यक्रमों के निर्माण के लिए महत्वपूर्ण हैं।
‘द रोड टू यूटोपिया’ फ्रेमवर्क का अनावरण
कार्यक्रम के दौरान यूनिसेफ युवाह और एसएपी इंडिया ने ‘द रोड टू यूटोपिया: यूथ सेंट्रलिटी एट वर्कप्लेस फ्रेमवर्क’ का अनावरण किया।
यह एक व्यावहारिक मार्गदर्शिका है, जिसका उद्देश्य व्यवसायों और संगठनों को युवा-अनुकूल, समावेशी और भविष्य के लिए तैयार कार्यस्थल बनाने में मदद करना है।
यह फ्रेमवर्क विशेष रूप से युवाओं को रोजगार देने वाले संगठनों के लिए तैयार किया गया है। इसमें भर्ती से लेकर कार्यस्थल की संस्कृति, शासन व्यवस्था और नवाचार तक विभिन्न स्तरों पर युवाओं के विचारों, अनुभवों और दृष्टिकोणों को शामिल करने का रोडमैप दिया गया है।
युवाओं को केवल कर्मचारी नहीं, भागीदार बनाने की पहल
जेनरेशन अनलिमिटेड की कार्यवाहक सीईओ डॉ. नादी अल्बिनो ने कहा कि युवा हर दिन ऊर्जा, महत्वाकांक्षा और नए सवालों के साथ कार्यस्थल पर आते हैं, लेकिन कई कार्यस्थल अभी भी उन्हें सुनने, समझने और उन पर भरोसा करने के लिए पूरी तरह तैयार नहीं हैं।
उन्होंने कहा कि ‘द रोड टू यूटोपिया’ व्यवसायों को युवाओं को भर्ती, मार्गदर्शन, संवाद, सहयोग और निर्णय लेने की प्रक्रिया में शामिल करने की व्यावहारिक दिशा देता है।
उन्होंने कहा कि जब युवाओं को वास्तविक योगदान का अवसर मिलता है, तो वे पुरानी कार्यशैलियों को चुनौती देते हैं, समस्याओं को सामने लाते हैं और नए समाधान तलाशते हैं। काम का भविष्य युवाओं को केवल सौंपने की चीज नहीं है, बल्कि उसे युवाओं के साथ मिलकर तैयार करने की जरूरत है।
युवा साझेदारी पर आधारित है यूटोपिया
यह फ्रेमवर्क यूटोपिया पहल पर आधारित है। यह यूनिसेफ युवाह और एसएपी इंडिया द्वारा संयुक्त रूप से संचालित एक सार्वजनिक-निजी-युवा गठबंधन है।
यूटोपिया की परिकल्पना ऐसे भविष्य की है, जहां युवा केवल प्रतिभागी या कर्मचारी बनकर न रहें, बल्कि साझेदार, सह-निर्माता और नेतृत्वकर्ता के रूप में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएं।
युवाओं को सही कौशल और अवसर देने पर जोर
एसएपी लैब्स इंडिया की एमडी और इंडो-जर्मन चैंबर ऑफ कॉमर्स की प्रेसिडेंट सिंधु गंगाधरन ने कहा कि जब युवाओं को सही कौशल, सहयोग प्रणाली और निर्णय प्रक्रिया में वास्तविक भागीदारी मिलती है, तो वे नवाचार, समावेशन और विकास के शक्तिशाली उत्प्रेरक बन जाते हैं।
उन्होंने कहा कि यूनिसेफ युवाह के साथ साझेदारी के माध्यम से एसएपी ऐसे कार्यस्थल बनाने के लिए प्रतिबद्ध है, जहां हर युवा अपनी क्षमता के अनुरूप आगे बढ़ सके और सार्थक योगदान दे सके।
युवाओं के विचारों से आकार लेने वाले कार्यस्थल की जरूरत
एसएपी की चीफ इंक्लूजन एंड सोशल इम्पैक्ट ऑफिसर रश्मि वर्मा ने कहा कि युवा कार्यस्थल पर नई सोच, ऊर्जा और उद्देश्य की भावना लेकर आते हैं।
उन्होंने कहा कि जब संगठनों में युवाओं को केवल अपनी बात रखने का अवसर नहीं, बल्कि निर्णय प्रक्रिया में वास्तविक भागीदारी मिलती है, तो वे संगठनों को तेजी से नवाचार करने, अलग तरीके से सोचने और व्यवसाय तथा समाज पर सकारात्मक प्रभाव डालने के लिए प्रेरित करते हैं।
रश्मि वर्मा ने कहा कि एसएपी का लक्ष्य केवल युवा प्रतिभाओं को कार्यस्थल में शामिल करना नहीं, बल्कि युवाओं के विचारों और दृष्टिकोण से संगठनों को आकार देना है।
‘द रोड टू यूटोपिया’ फ्रेमवर्क ऐसे कार्यस्थलों की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है, जहां युवाओं की आवाज को महत्व देने के साथ-साथ उन्हें संगठन के विकास, नवाचार और निर्णय प्रक्रिया में सक्रिय भागीदार बनाया जा सके।

