नई दिल्ली। ग्रामीण क्षेत्रों पर महत्वपूर्ण प्रभाव डालने वाली बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के वित्तपोषण में सहयोग मजबूत करने के उद्देश्य से राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक (NABARD) और नेशनल बैंक फॉर फाइनेंसिंग इंफ्रास्ट्रक्चर एंड डेवलपमेंट (NaBFID) ने एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए हैं।
यह साझेदारी NABARD की ग्रामीण एवं कृषि बुनियादी ढांचे के क्षेत्र में विशेषज्ञता और NaBFID की विशेषीकृत इंफ्रास्ट्रक्चर फाइनेंसिंग क्षमताओं को एक साथ लाएगी। समझौते के तहत दोनों संस्थान संयुक्त वित्तपोषण, ज्ञान साझा करने और नवीन वित्तीय समाधान विकसित करने की दिशा में काम करेंगे। इसका उद्देश्य ग्रामीण बुनियादी ढांचे और मूल्य शृंखलाओं को मजबूत करने वाली परियोजनाओं के लिए दीर्घकालिक और प्रतिस्पर्धी दरों पर वित्त उपलब्धता बढ़ाना है।
MoU पर हस्ताक्षर के अवसर पर NaBFID की उप प्रबंध निदेशक एवं मुख्य वित्तीय अधिकारी सुश्री मोनिका कालिया, NABARD के उप प्रबंध निदेशक श्री गोवर्धन एस. रावत और डॉ. अजय के. सूद सहित दोनों संस्थानों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
ग्रामीण-शहरी अंतर को पाटने में मिलेगी मदद
NABARD के चेयरमैन डॉ. शाजी कृष्णन वी. ने कहा कि ग्रामीण बुनियादी ढांचे का सामाजिक और व्यावसायिक, दोनों तरह का महत्व है। उन्होंने कहा कि NABARD का प्रयास वित्तीय रूप से टिकाऊ और बाजार आधारित ढांचों को वित्त उपलब्ध कराना रहा है।
उन्होंने कहा कि यह साझेदारी मूल्य शृंखला वित्तपोषण, दोनों संस्थानों के प्रशिक्षण संस्थानों के माध्यम से क्षमता निर्माण तथा वित्तीय गतिविधियों के परिसंपत्ति और देनदारी दोनों पक्षों पर मिलकर काम करने का अवसर प्रदान करती है। उन्होंने विश्वास जताया कि यह सहयोग ग्रामीण-शहरी अंतर को कम करने और ग्रामीण समृद्धि को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
डॉ. शाजी कृष्णन ने कहा, “यह MoU एक अच्छी शुरुआत है और हम इस बड़े राष्ट्रीय लक्ष्य की दिशा में मिलकर काम करने को लेकर आशान्वित हैं।”
खाद्य प्रसंस्करण और कोल्ड-चेन जैसे क्षेत्रों पर जोर
NaBFID के प्रबंध निदेशक श्री राजकिरण राय जी ने कहा कि NABARD ग्रामीण क्षेत्र में लंबे समय से गहरी विशेषज्ञता रखता है और ग्रामीण बुनियादी ढांचा आर्थिक विकास का एक प्रमुख आधार बनकर उभर रहा है।
उन्होंने कहा कि दोनों संस्थानों के बीच यह सहयोग स्वाभाविक तालमेल को दर्शाता है। खाद्य प्रसंस्करण, भंडारण और कोल्ड-चेन कनेक्टिविटी जैसे क्षेत्रों में व्यावसायिक रूप से व्यवहार्य और बैंकिंग योग्य परियोजनाएं तैयार करने की बड़ी संभावना है। इससे किसानों की आय बढ़ाने और भारत की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में योगदान मिलेगा।
परियोजना के पूरे जीवनचक्र में सहयोग
समझौते के तहत NABARD और NaBFID परियोजनाओं के पूरे जीवनचक्र में वित्तपोषण व्यवस्था और इंफ्रास्ट्रक्चर सलाहकार सेवाओं की संभावनाएं तलाशेंगे। इसमें परियोजना की पहचान, मूल्यांकन एवं ड्यू डिलिजेंस, ऋण संरचना एवं मूल्य निर्धारण तथा संयुक्त निगरानी शामिल होगी।
दोनों संस्थान परियोजना संरचना तैयार करने, वित्तीय मॉडलिंग और ऋण सिंडिकेशन जैसी सलाहकार सेवाओं में भी सहयोग करेंगे। इसके अलावा, NABARD और NaBFID के संबंधित प्रशिक्षण संस्थानों के माध्यम से संयुक्त क्षमता निर्माण कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, जिससे ज्ञान के आदान-प्रदान और इंफ्रास्ट्रक्चर फाइनेंसिंग से जुड़ी क्षमताओं को मजबूत किया जा सके।
इन क्षेत्रों में होगा सहयोग
साझेदारी के दायरे में पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) परियोजनाएं, कृषि मूल्य शृंखलाएं और ग्रामीण क्षेत्रों से मजबूत जुड़ाव रखने वाला बुनियादी ढांचा शामिल होगा।
प्रमुख क्षेत्रों में शामिल हैं—
- जल एवं स्वच्छता
- सिंचाई
- फसल कटाई के बाद भंडारण
- कोल्ड-चेन सुविधाएं
- टर्मिनल मार्केट
- ग्रामीण सड़कें एवं पुल
- वेयरहाउसिंग
- कंप्रेस्ड बायोगैस
इन क्षेत्रों को विकसित भारत के विजन के अनुरूप मजबूत, टिकाऊ और भविष्य के लिए तैयार ग्रामीण बुनियादी ढांचे के निर्माण में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
इस साझेदारी का व्यापक उद्देश्य ग्रामीण बुनियादी ढांचे और उससे जुड़ी मूल्य शृंखलाओं के लिए दीर्घकालिक वित्त की उपलब्धता बढ़ाना, व्यावसायिक रूप से व्यवहार्य परियोजनाओं को बढ़ावा देना, कनेक्टिविटी एवं बाजार पहुंच में सुधार करना और ग्रामीण आय में वृद्धि में योगदान देना है।
NABARD और NaBFID अपनी-अपनी विशेषज्ञताओं को एक साथ लाकर सतत ग्रामीण विकास को गति देने तथा ग्रामीण-शहरी अंतर को कम करने की दिशा में काम करेंगे।

