नई दिल्ली। दिल्ली में दुर्गा पूजा को लेकर बंगाली समाज की आस्था और पर्यावरणीय नियमों के बीच संतुलन का सवाल एक बार फिर सामने आया है। अखिल भारतीय बंग परिषद के तत्वावधान और मीडिया स्कैन के सहयोग से कॉन्स्टीट्यूशन क्लब ऑफ इंडिया में आयोजित ‘स्वाभिमान समारोह’ में दिल्ली-एनसीआर के दुर्गा पूजा आयोजकों और सामाजिक-सांस्कृतिक प्रतिनिधियों ने मूर्ति विसर्जन की मौजूदा व्यवस्था पर चिंता जताई।
समारोह में वक्ताओं ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण जरूरी है, लेकिन धार्मिक आस्था और परंपराओं का सम्मान करते हुए समाधान तलाशना भी उतना ही आवश्यक है। बंगाली समाज के लिए दुर्गा पूजा महज एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि भावनाओं, संस्कृति और परंपरा से जुड़ा पर्व है।
विसर्जन को लेकर समाज की चिंता
बंगाली समाज के प्रतिनिधियों का कहना है कि मां दुर्गा की पूजा के बाद विसर्जन की परंपरा का विशेष धार्मिक महत्व है। दिल्ली में यमुना में मूर्ति विसर्जन पर प्रतिबंध और वैकल्पिक व्यवस्थाओं के कारण श्रद्धालुओं को कई कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।
कृत्रिम तालाबों में विसर्जन के बाद मूर्तियों को अलग प्रक्रिया से निस्तारित किया जाता है। समाज के प्रतिनिधियों का मानना है कि इस पूरी प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित, सम्मानजनक और पर्यावरण-अनुकूल बनाने की आवश्यकता है।
अखिल भारतीय बंग परिषद के राष्ट्रीय संयोजक अरुण मुखर्जी ने कहा कि दिल्ली का बंगाली समुदाय लंबे समय से इस समस्या का सामना कर रहा है। उनके अनुसार, आस्था और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन बनाकर ऐसा समाधान निकाला जा सकता है, जिससे धार्मिक भावनाएं भी सुरक्षित रहें और पर्यावरणीय मानकों का भी पालन हो।
समाधान की जिम्मेदारी प्रशासन की
यहां सवाल किसी एक पक्ष को चुनने का नहीं, बल्कि व्यावहारिक समाधान खोजने का है। पर्यावरण की रक्षा के लिए नियम जरूरी हैं, लेकिन उन नियमों के क्रियान्वयन में धार्मिक परंपराओं और श्रद्धालुओं की भावनाओं को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए।
कृत्रिम विसर्जन स्थलों को बेहतर सुविधाओं से लैस करना, पर्याप्त संख्या में व्यवस्थित तालाब उपलब्ध कराना, पर्यावरण-अनुकूल मूर्तियों को बढ़ावा देना और विसर्जन के बाद वैज्ञानिक तरीके से अवशेषों का निस्तारण करना ऐसे विकल्प हो सकते हैं, जिन पर प्रशासन और पूजा समितियां मिलकर काम कर सकती हैं।
कार्यक्रम में भाजपा राष्ट्रीय प्रवक्ता भारती घोष, भाजपा प्रदेश महामंत्री एवं कालकाजी निगम पार्षद योगिता सिंह, त्रिपुरा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष सुबोल भौमिक, भाजपा नेता अशोक ठाकुर, कवि एवं भाजपा प्रवक्ता गजेंद्र सोलंकी और हास्य कवि शंभू शिखर सहित अनेक गणमान्य लोग मौजूद रहे।
योगिता सिंह ने दुर्गा पूजा आयोजनों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने तथा पर्यावरण-अनुकूल व्यवस्था विकसित करने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि धार्मिक आस्था और पर्यावरण संरक्षण एक-दूसरे के विरोधी नहीं हैं।
संवाद से निकल सकता है रास्ता
समारोह में विश्व हिंदू परिषद के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष आलोक कुमार ने मोबाइल के माध्यम से संबोधित करते हुए मां दुर्गा और मां काली की शक्ति, साहस और धर्म की विजय का संदेश दिया।
अब जरूरत है कि दिल्ली सरकार, स्थानीय प्रशासन, प्रदूषण नियंत्रण से जुड़े निकाय और दुर्गा पूजा समितियां एक साथ बैठकर स्थायी समाधान तलाशें। नियम भी रहें और परंपरा की गरिमा भी बनी रहे—यही संतुलित रास्ता है।
मां दुर्गा की विदाई श्रद्धा और सम्मान के साथ हो तथा यमुना और दिल्ली का पर्यावरण भी सुरक्षित रहे—इसी उद्देश्य से आगामी दुर्गा पूजा से पहले ठोस व्यवस्था तैयार करना समय की मांग है।

